पिता की चिता को मुखाग्नि देने के बाद दिया इंटरव्यू, रूला देगी UPSC क्रैक करने वाली जूही दास की कहानी
UPSC Success Story: कभी-कभी ज़िंदगी इंसान की सबसे बड़ी परीक्षा उस वक्त लेती है, जब वह अपने सपनों के सबसे करीब होता है। लेकिन जो लोग दर्द को ताकत बना लेते हैं, वही इतिहास रचते हैं। बिहार के किशनगंज की बेटी जूही दास की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
UPSC इंटरव्यू से पहले उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया। यह दुख किसी को भी तोड़ सकता था, लेकिन पिता के निधन के बाद भी जूही नहीं टूटी और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा पास कर आईएएस बन चुकी हैं। जूही दास की सफलता की कहानी अटूट हौसले का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

दरअसल, 13 फरवरी को अचानक पिता निवारण दास की बीमारी के चलते आकस्मिक निधन से जूही का परिवार गहरे सदमे में डूब गया था। इस दुःखद घड़ी में जूही भी पूरी तरह से मानसिक रूप से टूट चुकी थीं, क्योंकि पिता का साया सिर से उठ जाना किसी भी बेटी के लिए सबसे बड़ा आघात होता है। इस अत्यंत कठिन परिस्थिति के बावजूद, जूही ने हार नहीं मानी।
पिता को मुखाग्नि दी और इंटरव्यू के लिए हुई रवाना
देश की सबसे प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा के इंटरव्यू का बुलावा मिला। पिता के निधन के ठीक दस दिन बाद, 24 फरवरी को दिल्ली में यह अहम इंटरव्यू निर्धारित था। ऐसे दुःखद समय में जूही के सामने बड़ी चुनौती थी कि क्या वे इस मानसिक स्थिति में इंटरव्यू देने जाएं या नहीं। पिता को मुखाग्नि देने के बाद भारी मन से और गहरे दर्द को समेटे हुए जूही दिल्ली के लिए रवाना हुईं, जहां उन्होंने पूरे साहस के साथ इंटरव्यू का सामना किया।
पिता के श्राद्ध के दिन दिया इंटरव्यू
सबसे भावुक कर देने वाला पहलू यह था कि जिस 24 फरवरी को जूही दिल्ली में अपना यूपीएससी इंटरव्यू दे रही थीं, ठीक उसी दिन किशनगंज स्थित उनके पैतृक आवास पर उनके पिता का श्राद्ध कर्म संपन्न हो रहा था। पिता को खोने के गहरे दर्द को अपने दिल में दबाकर, जूही ने दृढ़ता से इंटरव्यू दिया, उन्हें पूरा विश्वास था कि उनके पिता का आशीर्वाद उनके साथ है।
पिता के निधन के 21 दिन बाद IAS बनीं जूही दास रो पड़ी
दिल में पिता की याद और आंखों में उनके सपनों को पूरा करने का जुनून लेकर जूही दास ने संघर्ष जारी रखा - और आखिरकार किशनगंज की जूही दास ने यूपीएससी की परीक्षा में 649वीं रैंक हासिल कर पूरे जिले और देश का नाम भी रोशन कर दिया। इस घोर संकट के बावजूद उन्होंने मात्र 21 दिनों के भीतर अपने पिता के देखे सपने को पूरा कर दिखाया। जब यूपीएससी का परिणाम आया तो पिता की फोटाे चूम रोने लगी।
जूही दास के पिता चलाते थे मोटर पार्ट्स की दुकान
जूही के पिता घर के पास एक मोटर पार्ट्स की दुकान चलाते थे, जबकि उनकी माँ अन्निका दास एडवोकेट हैं। जूही ने बताया कि यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्हें सबसे अधिक प्रेरणा अपनी माँ से ही मिली, जो हर मुश्किल में उनके साथ खड़ी रहीं।
जूही दास ने मां का अधूरा सपना पूरा किया
जूही की इस सफलता के साथ ही उनकी मां, ऐडवोकेट अनिका दास का लगभग 30 वर्ष पुराना सपना भी साकार हो गया। अनिका दास ने स्वयं वर्ष 1996 में यूपीएससी की परीक्षा दी थी, लेकिन उस समय वे सफल नहीं हो पाईं थीं। उन्होंने यह सपना अधूरा छोड़कर आगे की पढ़ाई जारी रखी और अधिवक्ता बन गईं और अपनी बेटियों को इसके लिए लगातार प्रेरित करती रहीं। आखिरकार उनकी बड़ी बेटी जूही ने यूपीएससी में 649वीं रैंक हासिल कर अपनी मां के उस अधूरे सपने को भी साकार कर दिया।
जूही दास ने कहां से की है पढ़ाई?
जूही ने वर्ष 2015 में बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 9.4 सीजीपीए के साथ मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके उपरांत, वर्ष 2017 में उन्होंने चैतन्या, विशाखापट्टनम से 92 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट किया। उनकी उच्च शिक्षा कोलकाता से बीटेक पूरी करके हुई।
जूही दास ने कैसे की यूपीएससी की तैयारी?
जूही दास ने किसी कोचिंग संस्थान से नियमित पढ़ाई नहीं की और सेल्फ-स्टडी पर निर्भर। इसके साथ ही कुछ संस्थानों से ऑनलाइन नोट्स मंगाकर तैयारी को मजबूत बनाती रहीं। जूही ने संकेत दिया कि उनकी रैंक के आधार पर उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) या भारतीय राजस्व सेवा (IRS) जैसी प्रमुख सेवाएँ मिल सकती हैं।
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