UPSC में 301 रैंक पर 2 आकांक्षा सिंह! ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती या वाराणसी की डॉक्टर-कौन हुआ पास, क्या है सच?
UPSC Result Akanksha Singh Rank 301 Truth: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम आते ही देशभर में सफल अभ्यर्थियों के जश्न की खबरें आने लगीं। लेकिन इसी खुशी के बीच एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक बहस छेड़ दी। विवाद रैंक 301 को लेकर है। इस रैंक पर एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग आकांक्षा सिंह अपने-अपने चयन का दावा कर रही हैं।
एक तरफ बिहार के आरा से रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह हैं, जबकि दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के वाराणसी/गाजीपुर जिले से ताल्लुक रखने वाली डॉ. आकांक्षा सिंह भी खुद को इसी रैंक की सफल उम्मीदवार बता रही हैं। दोनों के दावे सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर 301 रैंक पर असली आकांक्षा सिंह कौन हैं?

एक ही रोल नंबर 0856794 और दो 'आकांक्षा सिंह' दावेदार
विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि दोनों उम्मीदवार आकांक्षा सिंह एक ही रोल नंबर 0856794 के साथ अपने चयन का दावा कर रही हैं। यूपीएससी के जारी अंतिम परिणाम में भी 301 रैंक नंबर पर यही रोल नंबर दर्ज है। इसी वजह से मामला और उलझ गया है।
बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनका चयन पूरी तरह सही है और उन्होंने अपने एडमिट कार्ड की दो-दो कॉपी भी दिखाई हैं। उनके एडमिट कार्ड पर भी यही रोल नंबर 0856794 लिखा हुआ है। उन्होंने साफ कहा कि इस पूरे मामले में अंतिम सच्चाई अब यूपीएससी ही स्पष्ट कर सकता है।

वाराणसी की आकांक्षा ने भी पेश किया सबूत
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानिया की रहने वाली डॉ. आकांक्षा सिंह ने भी सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने फेसबुक पोस्ट और एक वीडियो जारी कर कहा कि कुछ लोग उनके नाम और रैंक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ उन्होंने अपने इंटरव्यू कॉल लेटर यानी साक्षात्कार का एडमिट कार्ड भी साझा किया। इस एडमिट कार्ड पर भी वही रोल नंबर 0856794 दर्ज है।
डॉ. आकांक्षा सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि तीन साल की तैयारी, दो प्रयास और दो इंटरव्यू के बाद आखिरकार उनका सपना पूरा हुआ है। उन्होंने बताया कि उनका सपना स्कूल के दिनों से था, जो एमबीबीएस और एमएस की पढ़ाई के दौरान और मजबूत हुआ। वह फिलहाल एम्स पटना से मेडिकल पढ़ाई पूरी कर चुकी डॉक्टर बताई जा रही हैं।
आकांक्षा ने फेसबुक में लिखा, ''पता चला है कि मेरा रूतबा और पहचान दूसरों के सामने आ रही है। मैं स्पष्ट करना चाहूंगी कि यह मेरी ओरिजिनल आईडी है और इस पोस्ट में मेरा ई-मेल अटैच है। इसके अलावा, मैं उन नकली पोस्टों को साझा कर रही हूं जो मेरे सामने आए हैं। उम्मीद है कि सच सबके सामने आ जाएगा।''

UPSC क्यूआर कोड (QR Code) से क्या सच सामने आया?
इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प मोड़ एडमिट कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड ने ला दिया। मीडिया में आए दोनों एडमिट कार्ड के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर अलग-अलग जानकारी सामने आई।
वाराणसी वाली आकांक्षा सिंह के इंटरव्यू एडमिट कार्ड के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर रोल नंबर 0856794 और आवेदन संख्या 12507292880 दिखाई देता है। लेकिन आरा वाली आकांक्षा सिंह के एडमिट कार्ड के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर रोल नंबर 0856569 सामने आता है, जबकि एडमिट कार्ड पर लिखा रोल नंबर 0856794 है। यहीं से शक पैदा हुआ कि कहीं एडमिट कार्ड में छेड़छाड़ तो नहीं की गई।
एक और महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि आरा की आकांक्षा सिंह ने जो एडमिट कार्ड दिखाया है वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) का है। जबकि गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने जो दस्तावेज साझा किया है वह साक्षात्कार (Interview) का एडमिट कार्ड है। इसके अलावा दोनों के परीक्षा केंद्र भी अलग-अलग बताए जा रहे हैं। आरा वाली आकांक्षा के दस्तावेज में परीक्षा केंद्र 115 दिखाया गया है, जबकि गाजीपुर वाली आकांक्षा के दस्तावेज में केंद्र संख्या 001 बताया गया है। ऐसे में वाराणसी वाली आकांक्षा सिंह का पलड़ा भारी लग रहा है। लेकिन वनइंडिया हिंदी इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।
इस पूरे विवाद के बीच एक और जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि बिहार के अरवल की एक अन्य आकांक्षा सिंह को यूपीएससी सूची में 454वीं रैंक मिली है। कुछ लोगों का दावा है कि इसी वजह से भ्रम और ज्यादा बढ़ गया है और ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती वाली खबर गलत तरीके से फैल गई। हालांकि इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने-अपने तरीके से दावे करने शुरू कर दिए। कुछ लोगों का कहना है कि क्यूआर कोड के आधार पर गाजीपुर वाली आकांक्षा का दावा ज्यादा मजबूत लगता है। वहीं कुछ लोग आरा वाली आकांक्षा के पक्ष में भी खड़े दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि उन्होंने मीडिया में लगातार इंटरव्यू दिए हैं और अपने परिवार के इतिहास का जिक्र भी किया है।
दरअसल यूपीएससी ने 6 मार्च को सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम घोषित किए थे। इस परीक्षा में कुल 958 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। इनमें 317 सामान्य वर्ग, 104 ईडब्ल्यूएस, 306 ओबीसी, 158 एससी और 71 एसटी उम्मीदवार शामिल हैं।
लेकिन 301 रैंक पर दो आकांक्षा सिंह के दावे ने पूरे परिणाम की चर्चा को एक अलग दिशा दे दी है। अब इस पूरे विवाद का अंत तभी हो सकता है जब यूपीएससी आधिकारिक रूप से चयनित उम्मीदवार का पूरा विवरण-जैसे आवेदन संख्या, माता-पिता का नाम या पता-सार्वजनिक कर दे। तब तक यह मामला सोशल मीडिया और खबरों में चर्चा का विषय बना रहेगा कि 301वीं रैंक वाली असली आकांक्षा सिंह आखिर हैं कौन-आरा की या वाराणसी की।












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