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Bengaluru Suburban Railway: सबअर्बन रेलवे प्रोजेक्ट का बढ़ा बजट, 600 करोड़ से 2 कॉरिडोर का काम होगा तेज

Bengaluru Suburban Railway: कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु सबअर्बन रेलवे प्रोजेक्ट (BSRP) के लिए बजट बढ़ाया गया है। इस प्रोजेक्ट से शहर के सड़क ट्रैफिक दबाव को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। परियोजना को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण के दो महत्वपूर्ण कॉरिडोर-2 (मल्लिगे लाइन) और कॉरिडोर-4 (कनका लाइन) के निर्माण कार्य को तेज करना है।

करीब 15,700 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को 2020 में केंद्र सरकार की मंजूरी मिली थी। यह परियोजना कुल 148 किलोमीटर लंबा चार-कॉरिडोर वाला नेटवर्क तैयार करेगी, जो बेंगलुरु और उसके आसपास के इलाकों को तेज और किफायती रेल कनेक्टिविटी देगा।

Bengaluru Suburban Railway

Bengaluru Suburban Railway: कॉरिडोर-2 (मल्लिगे लाइन) पर तेजी

- कॉरिडोर-2, जिसे मल्लिगे लाइन कहा जाता है, बैयप्पनहल्ली से चिक्कबनावरा तक करीब 25 किलोमीटर लंबा है। इसमें लगभग 14 स्टेशन प्रस्तावित हैं।

- इस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।

- यह लाइन शहर के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों के बीच तेज कनेक्टिविटी देने का काम करेगी।

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Bengaluru Suburban Rail Project: कॉरिडोर-4 (कनका लाइन) सबसे लंबा

कॉरिडोर-4 यानी कनका लाइन हीललिगे से राजानकुंटे तक करीब 46 किलोमीटर लंबी होगी, जो पूरे प्रोजेक्ट की सबसे लंबी लाइन है। इसमें करीब 19 स्टेशन बनाए जाने की योजना है। इस कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण अंतिम चरण में है और सिविल निर्माण के लिए कई हिस्सों में काम शुरू हो चुका है।

K-RIDE कर रही परियोजना का संचालन

इस पूरे प्रोजेक्ट को रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (कर्नाटक) लिमिटेड (K-RIDE) लागू कर रही है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों की भागीदारी है। परियोजना के लिए यूरोपीय निवेश बैंक और जर्मनी की KfW बैंक जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों से भी वित्तीय सहायता ली जा रही है।

2028 और 2030 तक प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य

सरकार के संशोधित लक्ष्य के अनुसार कॉरिडोर-2 को 2028 तक और कॉरिडोर-4 को 2030 तक शुरू करने की योजना है। इस नेटवर्क के चालू होने के बाद बेंगलुरु में रोजाना लाखों यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है और शहर में ट्रैफिक जाम तथा निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट नम्मा मेट्रो और बस नेटवर्क के साथ मिलकर शहर के सार्वजनिक परिवहन सिस्टम को मजबूत करेगा और लंबी दूरी के दैनिक यात्रियों के लिए एक बड़ा विकल्प बनेगा।

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