• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

एक बिल्डर के लिए बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र में ऐसे हुआ 3,000 करोड़ का घोटाला

By Bbc Hindi

बैंक, घोटाला,बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र
Getty Images
बैंक, घोटाला,बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र

भारत में एक के बाद एक बैंकिंग घोटाले सामने आ रहे हैं. पीएनबी और आईसीआईसाआई के बाद अब नया नाम बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र का है. पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में बैंक के चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) समेत छह बड़े अधिकारियों को गिरफ़्तार कर लिया है.

बैंक के सीएमडी रविंद्र मराठे पर डीएसके लिमिटेड नाम की एक कंपनी को ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से 3,000 करोड़ रुपये का कर्ज़ बांटने का आरोप है.

पुलिस ने रविंद्र मराठे के अलावा बैंक के एग्ज़िक्युटिव डायरेक्टर राजेंद्र गुप्ता, ज़ोनल मैनेजर नित्यानंद देशपांडे और बैंक के पूर्व सीएमडी सुशील मन्होत को भी गिरफ़्तार किया है.

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक बैंक ने डीएस कुलकर्णी नाम के बिल्डर को पिछले 10 साल में 3,000 करोड़ का फ़र्ज़ी लोन दिया है.

4,000 लोगों के पैसे डूबे

डीएस कुलकर्णी फ़रवरी, 2018 से पुणे पुलिस हिरासत में हैं. उन पर 4,000 निवेशकों के 1,150 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और तक़रीबन 2,900 करोड़ रुपये के बैंक लोन में हेरफ़ेर के मामले में मुक़दमा चलाने की क़ोशिश की जा रही है.

पुणे पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, बैंक के अधिकारियों ने डीएसके ग्रुप के साथ लोन के नाम पर 'बेईमानी और धोखे से बैंक के पैसे बांटने' की साज़िश रची और फिर धीरे-धीरे ये पैसे ग़ायब कर दिए.

बैंकिग विशेषज्ञ देवीदास तुलजापुरकार ने बीबीसी को बताया कि डीएस कुलकर्णी को दी गई कर्ज़ राशि एनपीए (नॉन परफ़ॉर्मिंग ऐसेट) बनने की कगार पर थी. इसलिए ख़ुद को बचाने के लिए बैंक के अधिकारियों ने उन्हें ग़ैर-क़ानूनी तरीके से थोड़ा-थोड़ा करके कई कर्ज़ जारी कर दिए.

इसके बाद कुलकर्णी ने आंशिक तौर कर्ज़ चुकाने में मदद मिली और पहले लिया गया कर्ज़ कई सालों तक सामने नहीं आया.

इतना ही नहीं, बिना पूरे काग़ज़ात और ज़रूरी प्रक्रिया के कुलकर्णी को कर्ज़ दिया जाता रहा.

कौन हैं डीएस कुलकर्णी?

दीपक सखाराम कुलकर्णी पश्चिम महाराष्ट्र में एक जाना-माना नाम हैं जो मिडिल क्लास परिवारों के लिए घर बनाते हैं. स्थानीय लोगों के बीच वो घरों की बुनियाद रखने के साथ ही उनकी 'पज़ेशन डेट' का ऐलान करने के लिए जाने जाते हैं. तय तारीख़ पर घर न मिलने पर वो ग्राहक को भारी हर्जाना भी दिया करते थे.

बैंक, घोटाला,बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र
AFP
बैंक, घोटाला,बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र

रियल एस्टेट बिज़नेस में शुरुआती क़ामयाबी के बाद उन्होंने आईटी और ऑटो मार्केटिंग बिज़नेस में भी हाथ आज़माया. जल्दी ही वो ग्राहकों के लिए फ़िक्स डिपॉज़िट स्कीम्स जारी करने लगे. लोगों को उनमें भरोसा था.

बहुत लोगों ने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई उनकी स्कीमों में लगा दी. लेकिन अगले दो-तीन सालों में उनके कारोबार के गणित में गड़बड़ी हुई और वो अपने निवेशकों के पैसे लौटाने में असफल होने लगे.

आज उनके ज़्यादातर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स अधूरे पड़े हैं. ऐसे वक़्त में उनकी धोखाधड़ी भी सामने आ गई. सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुम्भार द्वारा दायर की गई याचिका से पता चला कि उन्होंने कई बैंकों को 2,900 करोड़ रुपये का कर्ज़ नहीं चुकाया है. साल 2003 से 2012 के बीच उन्होंने एक ही ज़मीन 10 बार बेची.

कैसे हुई ये धोखाधड़ी?

कुलकर्णी के काम करने का तरीका एकदम सीधा है. उन्होंने डीएसकेएल नाम की अपनी एक कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर कराई थी. उन्होंने कंपनी के नाम पर एक ज़मीन ख़रीदी जिस पर उन्हें अपना हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू करना था. अगले 10 सालों में उन्होंने वही ज़मीन कई दूसरी कंपनियों को बेची.

कुलकर्णी की चालाकी ये थी कि उन्होंने ज़मीन उन्हीं लोगों को बेची जो उन्हीं की दूसरी कंपनियों का काम देखते थे. ज़मीन के ख़रीदारों में उनके अपने लोग थे- उनकी पत्नी, उनका बेटा, उनका साला और उनके क़रीबी दोस्त.

हर बार ज़मीन महंगी होती गई और लिए गए कर्ज़ की राशि भी उसी अनुपात में बढ़ती चली गई. यानी एक ही ज़मीन के नाम पर कई बार लोन लिया गया और उसकी एवज में पुराना लोन चुकाया गया.

आर्थिक मामलों के जानकार वसंत कुलकर्णी इसे ऐसे समझाते हैं- पुराना लोन चुकाने के लिए नया लोन लिया गया. ये बैंक के हित में नहीं था. फिर भी बैंक ने सारी गड़बड़ियों के बावजूद उन्हें बार-बार लोन दिया है. ज़ाहिर है, बैंक के अधिकारी इस अपराध में उनका साथ दे रहे थे.

लोगों को यूं गुमराह किया

कुलकर्णी ग़रीब और मिडिल क्लास मराठी लोगों को अपना ज़्यादा निशाना बनाते थे. वो उन्हें ज़्यादा रिटर्न का लालच दिखाते थे. उन्होंने अपनी छवि ज़मीन से जुड़े एक ऐसे शख़्स की बनाई थी जिसने अपने बूते पर क़ामयाबी पाई है.

इन तरकीबों से उन्होंने 4,000 से ज़्यादा निवेशकों को अपनी स्कीमों में पैसा लगाने के लिए राज़ी कर लिया था. नौकरी से रिटायर हो चुके कुछ लोगों ने अपनी सारी जमा पूंजी उनकी स्कीमों में लगा दी. फिलहाल कुलकर्णी, उनकी पत्नी और बैंक अधिकारी जेल में हैं और निवेशकों के पैसे डूब चुके हैं.

ये भी पढ़ें:

अरविंद सुब्रमण्यन ने क्यों छोड़ा मोदी सरकार का साथ?

ग्राउंड रिपोर्ट: ममता के पश्चिम बंगाल में 'हिंसा', 'मौत' और 'आतंक' की कहानी

पुलिसवाली जिसने अपने बचपन के रेपिस्ट को जेल में डाला

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
A builder of Rs 3,000 crore happened in Bank Of Maharashtra
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X