Climate Change Conference: कब शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन? कब और कहां हो चुके हैं ये सम्मेलन?
Climate Change Conference: जलवायु परिवर्तन इस पृथ्वी पर मानव ही नहीं बल्कि समस्त जीवधारियों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है। धरती की धारक क्षमता को कम करने के लिए यह उत्तरदायी है। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव वातावरण के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन से इस धरती को बचाने के लिए ही अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मंच (सम्मेलन) का जन्म हुआ।

अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन कानूनी रूप से एक बाध्यकारी समझौता है। यह मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वाले, आजीविका और आर्थिक विकास में बाधा डालने वाले, खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करने वाले और पर्यावरण को क्षति पहुँचाने वाले आदि कारणों को रोकने के लिए कार्यवाही करता है। यह इन कारणों के अंतरसंबंधों पर चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करता है एवं वैश्विक पर्यावरणीय खतरे से निपटने या इसे कम करने हेतु सरकारों को मिलकर कार्यवाही करने का आह्वान करता है।
पहला अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन
अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण चेतना एवं पर्यावरण आंदोलन के प्रारंभिक सम्मेलन के रूप में 5-16 जून 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्वीडन स्थित स्टॉकहोम में पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया था। जिसमें 113 देशों के प्रतिनिधियों तथा 400 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों ने भाग लिया।
यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र का पहला बड़ा सम्मेलन था और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण राजनीति के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme) का जन्म हुआ तथा 5 जून को पर्यावरण दिवस घोषित किया गया। 5 जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।
तत्पश्चात् वर्ष 1974 में 'समुद्री पर्यावरण की रक्षा' विषय को लेकर फिनलैंड के हेलसिंकी शहर में इस सम्मेलन का आयोजन किया गया। विषय की अस्पष्टता के कारण यह सम्मेलन असफल हो गया।
'समुद्री कचरे का निस्तारण' विषय को लेकर लंदन (ब्रिटेन) में 1975 में अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया। लगभग 10 वर्ष बाद 1985 में वियना सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में ओजोन परत के संरक्षण के लिए एक बहुपक्षीय पर्यावरण समझौता बना। 16 सिंतबर 1987 को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर विश्व के कई देशों ने हस्ताक्षर किये और 16 सितंबर को ओजोन दिवस घोषित किया गया।
19-21 जून 1988 को 'ग्रीनहाउस गैसों के अंतर्गत आने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस' विषय को लेकर 14वां जी-7 सम्मेलन टोरंटो और ओंटारियो (कनाडा) में आयोजित किया गया। इसमें सभी देशों की भागीदारी समान रूप से नहीं हुई, जिस कारण यह सम्मेलन असफल रहा।
पृथ्वी सम्मेलन (रियो सम्मेलन), 3-14 जून 1992 को ब्राजील की राजधानी रिओ डि जेनेरियो में हुआ। इस सम्मेलन का मुख्य विषय 'एजेंडा-21' (21वीं सदी के लिए पर्यावरण के महत्वपूर्ण नियमों का एक दस्तावेज) रहा।
यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC)
जलवायु परिवर्तन पर 21 मार्च 1994 को यूएनएफसीसीसी लागू हुआ। इस सम्मेलन के पक्षकार के रूप में 197 देशों ने पुष्टि की है। यूएनएफसीसीसी को ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने के प्रयास के रूप में परिभाषित करता है।
कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (CoP) का इतिहास
सीओपी अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन (कन्वेंशन) का निर्णय लेने वाला निकाय है। सम्मेलन के पक्षकार सभी देशों का प्रतिनिधित्व सीओपी में किया जाता है, जिस पर सम्मेलन के कार्यान्वयन की समीक्षा की जाती हैं।
सीओपी का पहला सम्मेलन (कोप-1) 28 मार्च से 7 अप्रैल 1995 को बर्लिन (जर्मनी) में हुआ। यह सम्मेलन संयुक्त रूप से पर्यावरण संबंधित गतिविधियों को क्रियान्वित करने में सहमत हुआ।
8-19 जुलाई 1996 को जिनेवा (स्विटजरलैंड) में कोप-2 सम्मेलन आयोजित हुआ।
कोप-3 का आयोजन 3 दिसंबर 1997 को जापान के क्योटो शहर में हुआ। इस सम्मेलन में विकसित देश ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए विशिष्ट लक्ष्यों पर सहमत हुए। इस सम्मेलन को क्योटो प्रोटोकॉल के नाम से भी जाना जाता है।
कोप-4 अर्जेटिना के ब्यूनस आयर्स में 4 नवंबर 1998 को आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में क्योटो प्रोटोकॉल को पूरा करने के लिए 2 वर्ष की कार्य योजना को तैयार करने का प्रस्ताव रखा।
कोप-5, 25 अक्टूबर से 5 नवंबर 1999 को बॉन (जर्मनी) में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन किसी प्रमुख निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा।
कोप-6, 13-25 नवंबर 2000 को द हेग (नीदरलैंडस) में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन के अध्यक्ष जन प्रोंक ने बिना किसी समझौते के निलंबित कर दिया।
29 अक्टूबर से 10 नंवबर 2001 तक माराकेश (मोरक्को) में कोप-7 सम्मेलन संपन्न हुआ। संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता में सक्रिय रूप से भाग लेने से मना करते हुए अपनी पर्यवक्षक भूमिका बनाए रखी।
कोप-8 सम्मेलन नई दिल्ली (भारत) में 23 अक्टूबर से 1 नवंबर 2002 को आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में विकसित देशों द्वारा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और विकासशील देशों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के प्रयासों का आह्वान किया गया।
कोप-9 का आयोजन 1-12 दिसंबर 2003 को ईटली के मिलान शहर में हुआ।
अर्जेटिना के ब्यूनस आयर्स में 6-17 दिसंबर 2004 को कोप-10 को आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में कोप के 10 साल की प्रगति और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा हुई।
कोप-11 सम्मेलन कनाड़ा के क्यूबेक शहर में 28 नवंबर से 9 दिसंबर 2005 तक आयोजित हुआ। यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन पर अब तक के सबसे बड़े अंतर-सरकारी सम्मेलनों में से एक था।
केन्या के नैरोबी शहर में 6-17 नंवबर तक कोप-12 सम्मेलन हुआ। सम्मलेन में सभी पक्षकार देशों ने विकासशील देशों द्वारा जलवायु परिवर्तन अनुकूलन का समर्थन करने के लिए कार्य की पंचवर्षीय योजना को अपनाया तथा अनुकूलन कोष के लिए प्रक्रियाओं और तौर-तरीकों तथा स्वच्छ विकास तंत्र के लिए परियोजनाओं में सुधार पर भी सहमति व्यक्त की।
कोप-13 का आयोजन 3-17 दिसंबर 2007 को इंडोनेशिया के बाली शहर में हुआ।
1-12 दिसंबर 2008 को पोलैंड के पॉज़्नान में कोप-14 का आयोजन हुआ। सम्मेलन का प्राथमिक फोकस क्योटो प्रोटोकॉल के उत्तराधिकारी पर बातचीत का रहा।
कोप-15 का आयोजन 7-18 दिसंबर 2009 को डेनमार्क के कोपेनहेगन शहर में हुआ।
मैक्सिको के कानकुन में दिनांक 28 नवंबर से 10 दिसंबर 2010 तक कोप-16 का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में ग्रीन क्लाइमेट फंड की फंडिंग पर सहमति नहीं बनी और न ही क्योटो प्रोटोकॉल की दूसरी अवधि के लिए प्रतिबद्धता पर सहमति बनी।
कोप-17, दक्षिण अफ्रीका के डरबन में दिनांक 28 नवंबर से 9 दिसंबर 2011 तक आयोजित हुआ।
दोहा (कतर) शहर में कोप-18 का आयोजन दिनांक 26 नवंबर से 7 दिंसबर 2012 को हुआ। 'दा दोहा क्लाइमेट गेटवे' शीर्षक से सम्मेलन में सामूहिक रूप से एक पैकेज तैयार किया गया।
कोप-19 सम्मेलन क्योटो प्रोटोकॉल के दलों की बैठक का 9वां सत्र था, जो 11-23 नवंबर 2013 को पोलैंड के वारसॉ में आयोजित हुआ।
1-12 दिसंबर 2014 को लीमा (पेरू) में कोप-20 को आयोजन हुआ।
फ्रांस की राजधानी पेरिस में दिनांक 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2015 तक कोप-21 आयोजित किया गया। 12 दिसंबर को पेरिस समझौते को अपनाया गया, जो 2020 से जलवायु परिवर्तन में कमी के उपायों को नियंत्रित करता है।
कोप-22, अफ्रीका के मोरक्को देश के माराकेश शहर में 7-18 नवंबर 2016 को आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में मुख्य फोकस पानी की कमी, पानी की सफाई व पानी की स्थिरता पर रहा।
6-17 नवंबर 2017 को जर्मनी के बॉन शहर में कोप-23 आयोजित किया गया।
कोप-24 का आयोजन 3-14 दिसंबर 2018 को पोलैंड के केटोवाइस शहर में किया गया।
स्पेन के मैड्रिड में दिनांक 2-13 दिसंबर 2019 को कोप-25 का आयोजन हुआ।
कोप-26, स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 31 अक्टूबर से 12 नवंबर 2021 को आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में भारत की ओर से पांच वादे किये गये। जिनके अनुसार भारत वर्ष 2030 तक - गैर जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा, 50 प्रतिशत ऊर्जा की जरूरत अक्षय ऊर्जा से पूरी करेगा, कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक बिलियन टन की कमी करेगा, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता को 45 प्रतिशत से भी कम करेगा, वर्ष 2070 तक भारत नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा।
अभी कोप-27 का आयोजन 6-18 नवंबर 2022 को मिस्र के शर्म अल शेख में किया जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन पर पिछली सफलताओं को ध्यान में रखकर वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भविष्य की महत्वाकांक्षा का मार्ग प्रशस्त करना है।
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