Basti News: डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने नर्सिंग छात्रों को दी बड़ी सौगात,जारी किया यह निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने नर्सिंग की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वालों को बड़ी सौगात दी है।उन्होंने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में पांच साल के अंदर नर्सिंग की पढ़ाई शुरु करने के निर्देश दिए हैं। बस्
बस्ती,26सितंबर: उत्तर प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने नर्सिंग की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वालों को बड़ी सौगात दी है।उन्होंने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में पांच साल के अंदर नर्सिंग की पढ़ाई शुरु करने के निर्देश दिए हैं। बस्ती में आयोजित एक कार्यक्रम में यह घोषणा की।डिप्टी सीएम लगातार क्षेत्र भ्रमण पर हैं।इस दौरान वह कई प्राथमिक विद्यालय व स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर चुके हैं।

डिप्टी सीएम ने कहा कि अगले पांच साल में प्रदेश के सभी मेडिकल कालेज में नर्सिंग कालेज खोलने रूप रेखा तैयार हो चुकी है। अस्पताल के लिए जितना महत्वपूर्ण डाक्टर हैं, उतना ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ।डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। वर्ष 2016 तक जहां उत्तर प्रदेश में महज 13 मेडिकल कालेज थे। वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 35 हो गई है। इसके अलावा 30 निजी मेडिकल कालेज भी खुल चुके हैं। 14 जिलों को छोड़कर अन्य सभी जिलों में मेडिकल कालेज खोलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। छह जिलों में पीपीपी माडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) पर मेडिकल कालेज खोले जाएंगे। इसके लिए सरकार 150 करोड़ की सब्सिडी देगी।
उन्होंने कहा कि शहर से लेकर गांव तक के अस्पतालों में डाक्टरों और दवाओं की कमी का मुद्दा समाप्त हो गया है। पहले दवा समाप्त होने के बाद इसकी डिमांड की जाती थी लेकिन अब उससे पहले ही अस्पताल में दवा पहुंच जा रही है। हरेक जगह एक सप्ताह की दवा का भंडारण अनिवार्य कर दिया गया है। बदलाव की ही देन है सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ रहा है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन एक लाख सत्तर हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
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इनमें से बारह हजार मरीज सड़क एवं अन्य हादसोें में घायल होकर आते हैं जबकि आठ हजार मरीज लीवर,किडनी और हर्ट जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित होते हैं। हर रोज सरकारी अस्पतालों में पांच हजार मरीजों का आपरेशन किया जा रहा है। मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आंकड़ों की निरंतर मानीटरिंग की जा रही है, जहां जिस रोग मरीज ज्यादा आ रहे हैं, वहां के अस्पतालों में उसके अनुरूप व्यवस्था भी दुरूस्त की जा रही है। हाईवे से जुड़े जिलों में ट्रामा सेंटर को प्रभावी बनाया जाएगा। इस दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।
मरीजों को पहले बदन दर्द, पेट दर्द, उल्टी, बुखार और खांसी के इलाज के लिए दूर जाना पड़ता था। 25 हजार उपकेंद्र और 15 हजार हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित कर सरकार ने एक बड़ा काम किया है। इन सेंटरों पर एएनएम और कम्युनिटी हेल्थ अफसर कार्यरत तो हैं ही दवाओं की भी कोई कमी नहीं है। इन सेंटरों पर कोई गंभीर मरीज पहुंचता है तो संजीवनी एप के जरिए वो विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क कर जरूरी परामर्श ले सकते हैं












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