Importance of flowers: पुष्पों का महत्व केवल देवपूजा में ही नहीं, आयुर्वेद में भी है
Importance of flowers: प्रत्येक देवपूजा में पुष्पों और पत्रों का विशेष महत्व होता है। अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए अलग-अलग प्रकार के पुष्प आदि बताए हैं। पुष्पों का जितना महत्व देवपूजा में होता है उतना ही महत्व इन्हें आयुर्वेद में भी दिया गया है। अलग-अलग प्रकार के पुष्पों में विशेष प्रकार के औषधीय गुण होते हैं जो रोगों का शमन करते हैं। इन पुष्पों के स्पर्शमात्र से इनसे संबंधित रोगों का नाश होता है। आइए जानते हैं कुछ विशेष पुष्प और उनके औषधीय गुणों के बारे में।

- चमेली- यह स्वाद में तिक्त, व्रण कुष्ठनाशक, विष का प्रभाव दूर करने वाला, नेत्ररोग, मस्तिष्क रोग तथा मुख में होने वाले छालों में लाभप्रद होता है।
- जूही- यह शीतल और स्वादिष्ट होता है। यह मूत्र शर्करा, पित्तजनित रोगों जैसे जलन और प्यास अधिक लगने जैसी समस्याओं में आराम देता है।
- बेला- यह स्वाद में तिक्त, हल्का और शीतल गुणों वाला होता है। कर्ण, नेत्र और मुख के रोगों में लाभदायक है। इसके द्वारा त्रिदोष वात पित्त कफ का शमन होता है।
- सफेद गुलाब- इसे शतपत्री भी कहा जाता है। यह स्वाद में तिक्त, कसैला और शीतल होता है। यह दाह एवं पित्त का शामक, कुष्ठरोग नाशक और चेहरे पर पड़ने वाली झाई को दूर करता है।
- लाल गुलाब- यह वृश्चिक विष तथा रक्तदोषनाशक कहा गया है।
- मालती- कफ, पित्त एवं कुष्ठनाशक होता है। शरीर के सूजन को दूर करने वाला तथा कर्णरोगों में आरामदायक है।
- जपा पुष्प- शीतल होने के कारण दाहशामक, प्रमेह, धातुविकार, प्रदर तथा बवासीर को नष्ट करने वाला है।
- कमल पुष्प- कफ पित्त नाशक, रक्तविकार तथा विष को दूर करने वाला है।
- जाती पुष्प- यह उष्ण, कड़ुआ, चरपरा, तीक्ष्ण, हल्का, वमनकारक तथा मुखशोधक होता है। इससे कफ वातजनित रोग, नेत्ररोग, दंतरोग, कृमिरोग आदि दूर होते हैं। इससे रक्त विकार भी दूर होते हैं।
- चंदन- देवपूजा में रक्त और श्वेत दोनों तरह के चंदन का प्रयोग होता है। इनमें श्वेत चंदन शीतल एवं वीर्यवर्द्धक तथा रक्तचंदन रक्तविकार दूर करने वाला होता है। इसी प्रकार पूजन में प्रयुक्त होने वाला सिंदूर उष्ण, कुष्ठ, खाज-खुजली दूर करने तथा घावों को शीघ्र भरने वाला होता है।












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