US Iran War: जारी रहेगी जंग, ईरान और अमेरिका ने सीजफायर के लिए बात करने से किया इनकार
War will continue in the Middle East: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य टकराव थमने के बजाय और तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और इज़रायल के हालिया हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में पहुंच गया है। कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान युद्धविराम को लेकर तैयार दिख रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर बढ़ने की आशंका है।
कूटनीतिक प्रयासों को अमेरिका ने ठुकराया
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट के कई सहयोगी देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए मध्यस्थता की कोशिश की। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इन कूटनीतिक प्रयासों को ठुकरा दिया।
उधर, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका और इज़रायल के हवाई हमले बंद नहीं होते, तब तक वह किसी भी युद्धविराम पर सहमत नहीं होगा। दोनों पक्षों की सख्त स्थिति से संकेत मिल रहे हैं कि यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हर हाल में खुला रहेगा।
ट्रंप ने उम्मीद जताई कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देश भी इस क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजकर समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। उनका कहना है कि संयुक्त सैन्य मौजूदगी से इस मार्ग को किसी भी खतरे से बचाया जा सकेगा।
ईरान को अमेरिकी की सैन्य चेतावनी
ट्रंप ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरानी समुद्री तट से दूर बड़े पैमाने पर बमबारी करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी नौकाओं और जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेगी।
अमेरिका का दावा है कि वह पहले ही ईरान की सैन्य क्षमता के बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचा चुका है। इसके बावजूद आशंका जताई जा रही है कि ईरान ड्रोन, समुद्री बारूदी सुरंगों और कम दूरी की मिसाइलों के जरिए समुद्री मार्ग को बाधित करने की कोशिश कर सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित
होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव का असर समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। कई तेल टैंकर इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं और जहाजों की आवाजाही में कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति बनी रही तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।
खर्ग द्वीप पर हमले से बढ़ा खतरा
हाल ही में अमेरिकी हमलों में ईरान के खर्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इस द्वीप के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमला हुआ तो वह अमेरिका से जुड़े तेल ढांचों को पूरी तरह तबाह कर सकता है।
इस बीच, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव अब वैश्विक चिंता का विषय बनता जा रहा है, क्योंकि इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ रहा है।












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