आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के राम मंदिर बयान पर क्या बोले उलेमा?

सहारनपुर। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन अयोध्या प्रकरण को लेकर विवादित बयानबाजी का सिलसिला जारी है। सोमवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर उसी जगह बनाने का दावा किया है, जहां पहले से बना हुआ था। देवबंदी उलेमा ने भागवत के इस बयान को कोर्ट की अवमानना करार दिया है।

Ulema commented on statement of Mohann Bhagwat in Saharanpur

महाराष्ट्र राज्य के जिला पालघर के दहानू में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में मोहन भागवत ने कहा कि अगर अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनाया गया तो हमारी संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी। इसलिए मंदिर वहीं बनाया जाएगा, जहां वह पहले था। आरएसएस प्रमुख के इस बयान पर तंजीम उलेमा ए हिंद के प्रदेशाध्यक्ष मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि अयोध्या मामला अदालत में विचाराधीन है। फिर भी पिछले तीन दशकों से इसे बेवजह मुद्दा बनाकर इस पर सियासी रोटियां सेकी जा रही हैं। कहा कि इस मामले में अदालत खुद कह चुकी है कि यह मामला भावनाओं का नहीं बल्कि मिल्कियत का है।

Ulema commented on statement of Mohann Bhagwat in Saharanpur

कोर्ट की इस टिप्पणी के बावजूद भी एक पक्ष जानबूझ कर इस पर विवाद बनाए रखना चाहता है। कहा कि ऐसी बयानबाजी अदालत की अवमानना है। फतवा आन मोबाइल सर्विस के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि अदालत में विचाराधीन मुद्दे पर अदालत के बाहर बोलना अदालत के सम्मान को ठेस पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विचाराधीन प्रकरण पर अदालत के बाहर बोलने वालो के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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