Iran Israel Conflict: होर्मुज के बाद अब स्वेज नहर को बंद कराएगा ईरान, अमेरिका-इजरायल जाएंगे बैकफुट पर?
Iran Israel Conflict: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान ताबड़तोड़ पलटवार कर रहा है। तेहरान की कोशिश अब वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने की है। इससे अमेरिका और इजरायल पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के बाद अब ईरान की रणनीति स्वेज नहर को निशाना बनाने की हो सकती है। इसके लिए ईरान ने अपने प्रॉक्सी माने जाने वाले हूती विद्रोहियों को सक्रिय कर दिया है, जो लाल सागर क्षेत्र में हमले की तैयारी कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यमन में सक्रिय हूती विद्रोही जल्द ही लाल सागर में जहाजों को निशाना बना सकते हैं। उनकी कोशिश बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली समुद्री आवाजाही को बाधित करने की है। यही वह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और आगे चलकर स्वेज नहर तक पहुंचता है।

Iran Israel Conflict: मिडिल ईस्ट में व्यापार बंद करने की रणनीति
- स्वेज नहर को यूरोप और मिडिल ईस्ट के बीच व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। यह नहर एशिया और यूरोप के बीच सबसे छोटा समुद्री मार्ग उपलब्ध कराती है।
- अगर इस रूट में बाधा आती है तो दुनिया भर की सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
- रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के 12वें दिन हूती विद्रोहियों ने संकेत दिया है कि वे स्वेज नहर के मार्ग को प्रभावित करने के लिए रॉकेट हमले कर सकते हैं।
- इससे लाल सागर में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और वैश्विक व्यापार में बड़ी रुकावट आ सकती है।
Suez Canal वैश्विक व्यापार का गेटवे
स्वेज नहर वैश्विक व्यापार का एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस नहर के जरिए एशिया से यूरोप तक कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कच्चा तेल और कई अन्य जरूरी वस्तुएं पहुंचाई जाती हैं। इस नहर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह यूरोप और एशिया के बीच समुद्री दूरी को लगभग 7,000 किलोमीटर तक कम कर देती है। अगर जहाजों को इस मार्ग के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी सिरे 'केप ऑफ गुड होप' से होकर जाना पड़े तो यात्रा का समय और लागत दोनों काफी बढ़ जाएंगे।
Iran Israel Conflict: ईरान की रणनीति अमेरिका-इजरायल को चोट पहुंचाना
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट के विकल्प के रूप में स्वेज नहर का उपयोग बढ़ता है, तो यह ईरान के लिए रणनीतिक झटका होगा। इसी कारण ईरान की कोशिश हो सकती है कि इस रूट पर भी दबाव बनाया जाए। इससे न सिर्फ इजरायल और अमेरिका पर दबाव पड़ेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर पड़ने की संभावना है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पहले ही संकेत दे चुकी है कि अगर क्षेत्र में युद्ध लंबा चलता है तो मध्य पूर्व से तेल का निर्यात पूरी तरह प्रभावित किया जा सकता है। उनका कहना है कि युद्ध की स्थिति में वे एक लीटर तेल भी बाहर जाने नहीं देंगे।
Suez Canal Close: स्वेज नहर बंद हुआ तो क्या होगा असर?
अगर स्वेज नहर की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, फ्रांस और इटली जैसे देशों पर पड़ सकता है, जिनका बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर है। पहले ही होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण मध्य पूर्व से होने वाला तेल निर्यात करीब 20 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुका है। ऐसे में अगर स्वेज नहर भी संकट में आती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।












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