दिल की बीमारियों की वजह बन सकते हैं स्वीटनर

नई दिल्ली, 09 सितंबर। चीनी की जगह तेजी से ले रहे आर्टिफिशियल स्वीटनर रोजाना करोड़ों लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं. डायट सोडा से लेकर चाय-कॉफी तक में लोग इनका प्रयोग करते हैं. शुगर-फ्री होने के कारण इन्हें चीनी का बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि कई वैज्ञानिक शोध यह कह चुके हैं कि चीनी सेहत के लिए बेहद खतरनाक है. लेकिन इस कृत्रिम मीठे के सेहतमंद होने को लेकर भी खासा विवाद है.
फ्रांस के इनसर्म (INSERM) इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की है कि ये स्वीटनर दिल के रोगों से किस तरह जुड़े हैं. उन्होंने फ्रांस में रहने वाले एक लाख से ज्यादा लोगों द्वारा अपने खान-पान के बारे में दी गई जानकारी का विश्लेषण किया है. यहां यह बात उल्लेखनीय है कि यह जानकारी लोगों ने अपने आप दी थी. 2009 से 2021 के बीच इन लोगों अपने खान-पान, लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य की जानकारी वैज्ञानिकों के साथ साझा की.
विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने पाया कि 37 प्रतिशत लोग आर्टिफिशियल स्वीटनर का प्रयोग कर रहे थे. वे औसतन 42 मिलीग्राम स्वीटनर ले रहे थे जो इसका एक पैकेट या फिर एक डायट सोडा की एक तिहाई कैन के बराबर है. वैज्ञानिकों ने नौ साल तक तक इन लोगों के खान-पान की निगरानी की. उसके बाद पता चला कि 1,502 लोगों को हृदय संबंधी समस्याएं हो गई थीं जिनमें दिल का दौरा पड़ने से लेकर स्ट्रोक तक शामिल हैं.
क्या कहता है शोध?
बीएमजे पत्रिका में छपे शोध में यह संकेत दिया गया है कि एक लाख में से उन 346 लोगों को हृदय रोग हुआ जो भारी मात्रा में कृत्रिम मीठे का इस्तेमाल कर रहे थे. ये स्वीटनर ना खाने वालों में हृदय रोग की संख्या 314 रही.
इनसर्म की मैटील्डे टूविएर कहती हैं कि ये नतीजे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पिछले साल प्रकाशित एक रिपोर्ट को पुष्ट करते हैं. डबल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि संगठन स्वीटनर को शुगर का सुरक्षित विकल्प नहीं मानता.
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अप्रैल में आई एक रिपोर्ट में डबल्यूएचओ ने कहा था कि "इस बात पर स्पष्ट सहमति नहीं है कि शुगरफ्री स्वीटनर लंबे समय में वजन कम करने में लाभदायक हैं या वे अन्य किसी तरह से सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं."
इसी साल न्यूट्री-नेट आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले एक और शोध में कहा गया था कि स्वीटनर में पाए जाने वाले तत्व जैसे कि एसपार्टेम, पोटैशियम और सूकरलोस कैंसर से संबंधित हो सकते हैं. लेकिन ये जितने भी शोध हुए हैं, उन्हें तीखी आलोचना झोलनी पड़ी है क्योंकि वे अपने निष्कर्षों की कोई स्पष्ट वजह नहीं दे पाए हैं.
ग्लासगो यूनिवर्सिटी में मेटाबॉलिक मेडिसिन पढ़ाने वाले नावीद सत्तार कहते हैं कि यह शोध सवालों के जवाब नहीं देता. सत्तार इस अध्ययन में शामिल नहीं थे. उन्होंने बताया, "जो सवाल पूछा गया, उसका जवाब नहीं मिला. ऐसा इसलिए है क्योंकि स्वीटनर का प्रयोग करने वाले और ना करने वाले शोध में शामिल लोग एक-दूसरे से बहुत ज्यादा अलग थे." सत्तार कहते हैं कि सरकारों को एक ज्यादा बड़े पैमाने पर लंबी अवधि का शोध कराना चाहिए ताकि सच्चाई के और करीब पहुंचा जा सके.
क्या चीनी नुकसानदायक है?
शोध संस्थान 'जॉन हॉपकिंस मेडिसिन' के मुताबिक चीनी को अपने खान-पान से पूरी तरह हटाने से जरूरी पोषक तत्व भी हट जाते हैं जो कि फलों, डेयरी उत्पादों और अनाजों में पाए जाते हैं. विशेषज्ञ जेसिका सीजल लिखती हैं, "मूल रूप से तो चीनी बुरी नहीं है बल्कि जरूरी है. हमारा शरीर शुगर पर ही चलता है. हम जो खाना खाते हैं उसमें से हम कार्बोहाइड्रेट लेते हैं और उसे ग्लूकोस (शुगर) में परिवर्तित करते हैं. उस ग्लूकोस को हमारी कोशिकाएं रक्त में से सोखती हैं और ऊर्जा या ईंधन के रूप में प्रयोग करती हैं."
सीजल स्पष्ट करती हैं कि कुदरती और प्रोसेस्ड शुगर में काफी फर्क है और प्रोसेस्ड शुगर में कोई पोषक तत्व नहीं होते बल्कि जरूरत से ज्यादा मात्रा में यह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है. वह कहती हैं कि जूस, शहद और मेपल सिरप जैसी चीजों में कुदरती शुगर होती है जिसके कुछ फायदे हो सकते हैं. वह बताती हैं, "कच्चे शहद और मेपल सिरप में भी एंटीऑक्सिडेंट हो सकते हैं और आयरन, जिंक, कैल्शिय व पोटैशियम जैसे तत्व भी."
क्या होते हैं आर्टिफिशियल स्वीटनर?
ज्यादातर आर्टिफिशियल स्वीटनर, जिन्हें नॉन-न्यूट्रिटिव स्वीटनर भी कहा जाता है, प्रयोगशालाओं में केमिकल्स से तैयार किए जाते हैं. कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें कुदरती जड़ी-बूटियों से बनाया जाता है. ये स्वीटनर आमतौर पर प्रयोग होने वाली चीनी से 200 से 700 गुना ज्यादा मीठे हो सकते हैं.
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जेसिका सीजल कहती हैं कि इस कृत्रिम मिठाई में कोई कैलरी या मीठा तो नहीं होता लेकिन इनमें विटामिन, फाइबर या एंटीऑक्सिडेंट जैसे फायदे भी नहीं होते. वह भी कहती हैं कि इनके सेहतमंद होने को लेकर फिलहाल शोध जारी हैं और किसी एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता.
सीजल कहती हैं कि मीठा खाना ही है तो स्टेविया जैसे कुदरती स्वीटनर का इस्तेमाल करना चाहिए. वह साफ तौर पर कहती हैं कि सोडा, एनर्जी ड्रिंक, स्वीट टी और जूस आदि का प्रयोग करने से बचा जाना ही बेहतर है.
रिपोर्टः विवेक कुमार (एएफपी)
Source: DW
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