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Athira Struggle Story: याददाश्त गंवाई-व्हीलचेयर बनी साथी, फिर भी UPSC में गाढ़े झंडे! IAS बनने में कितनी दूरी?

UPSC Success Story: कभी-कभी जिंदगी इंसान के सामने ऐसी चुनौतियां रख देती है, जिनके बारे में सोचकर ही हिम्मत जवाब दे जाए। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हालात के आगे झुकने के बजाय उनसे लड़ना चुनते हैं। केरल की 30 साल की अथिरा भी उन्हीं लोगों में से एक हैं, जिन्होंने अपने नाम की तरह ही, तेज, ऊर्जा और प्रकाश से जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर को पार करके सपनों को सच कर दिखाया।

2016 में एक भीषण सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी उलट-पुलट कर दी-वह व्हीलचेयर पर आ गईं। दो साल तक याददाश्त लगभग खो बैठीं, लेकिन हार नहीं मानी। चौथे प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया (AIR) रैंक 483 हासिल की। यह कहानी हिम्मत, परिवार के सहारे और कभी न रुकने वाले जज्बे की है। आइए आपको रूबरू कराते हैं इस 'अथिरा' की ऊर्जा से...

Athira Sugathan Upsc Success Story

Athira Sugathan Struggle Story: मौत से जंग और याददाश्त का सफर

कोझिकोड की रहने वाली 30 वर्षीय अथिरा, तब बेंगलुरु में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई कर रही थीं। फरवरी 2016 में दोस्तों के साथ एक ट्रिप के दौरान सड़क हादसा हो गया। वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। 21 दिन वेंटिलेटर पर रहीं, शरीर के नीचे के हिस्से में पैरालिसिस हो गया और लगभग दो साल तक अम्नेशिया (याददाश्त की कमी) का सामना करना पड़ा। उन्हें यह तक याद नहीं था कि वे BDS की छात्रा हैं। डॉक्टरों ने कई बार हार मान ली, लेकिन आयुर्वेदिक इलाज और परिवार के समर्थन से धीरे-धीरे याददाश्त लौटी। अथिरा ने हिम्मत नहीं हारी। बेंगलुरु लौटकर अपनी पढ़ाई पूरी की, भले ही पहले तीन साल की पढ़ाई दोबारा समझनी पड़ी।

Who Is Athira Sugathan: दिव्यांगता से प्रेरणा- सिविल सेवा का सपना

2020 में कोझिकोड वापस लौटकर अथिरा ने एक एनजीओ के साथ जुड़कर दिव्यांगजनों के लिए काम शुरू किया। कोविड काल में काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि समाज में ऐसे लोगों की कितनी मुश्किलें हैं। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने बड़े स्तर पर बदलाव लाने का फैसला किया और IAS बनने का लक्ष्य रखा।

तिरुवनंतपुरम की एक IAS कोचिंग अकादमी में दाखिला लिया, जहां दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए स्पेशल सपोर्ट था। मलयालम को ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना और ज्यादातर क्लासेस ऑनलाइन अटेंड कीं। कभी-कभी माता-पिता की मदद से तिरुवनंतपुरम जाकर पढ़ाई की।

बहन अनघा, सबसे मजबूत सहारा

अथिरा की सफलता में उनकी छोटी बहन अनघा का सबसे बड़ा योगदान रहा। अनघा तब BSc साइकोलॉजी कर रही थीं, लेकिन बड़ी बहन की देखभाल के लिए कोर्स बीच में छोड़ दिया और BSc नर्सिंग में एडमिशन ले लिया ताकि बेहतर तरीके से उनकी केयर कर सकें। UPSC इंटरव्यू में जब अथिरा से उनके 'सबसे अच्छे दोस्त' के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बिना हिचक अनघा का नाम लिया।

सफलता का जश्न और आगे का रास्ता

UPSC CSE 2025 में कुल 958 उम्मीदवारों का चयन हुआ, जिसमें अथिरा की रैंक 483 है। यह उनका चौथा प्रयास था। अथिरा का सपना IAS अधिकारी बनना है। उन्होंने कहा, 'यह संकट मेरे अंदर एक साहसी इंसान लेकर आया। व्हीलचेयर मेरे सपनों की राह में रुकावट नहीं बन सकती। अगर इस बार फाइनल सिलेक्शन नहीं हुआ, तो मैं आगे भी कोशिश जारी रखूंगी।'

रैंक 483 पर IAS बनेंगी अथिरा?

अथिरा दिव्यांग (PwBD) कैटेगरी में आती हैं (लोकोमोटर डिसेबिलिटी, PwBD-3)। UPSC में (PwBD - Persons with Benchmark Disabilities) के लिए अलग मेरिट लिस्ट बनती है और कुल 4% आरक्षण (लगभग 42 सीटें सभी सेवाओं में)। IAS में PwBD के लिए आमतौर पर 6-8 सीटें होती हैं।

  • अगर उनकी PwBD मेरिट में अच्छी पोजीशन है, तो IAS मिल सकती है।
  • सामान्य मेरिट में रैंक 483 थोड़ी नीचे है (IAS के लिए टॉप रैंक्स चाहिए), लेकिन PwBD आरक्षण से IAS/IFS/IPS में से कोई न कोई सर्विस मिलने की मजबूत संभावना है।

फाइनल सर्विस अलॉटमेंट रैंक, प्रेफरेंस और वैकेंसी पर निर्भर करता है। UPSC जल्द ही डिटेल जारी करेगा। अथिरा सुगथन की यह कहानी साबित करती है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, अगर इरादा पक्का हो और हौसला बुलंद, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। उनकी जीत लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनेगी!

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