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पंजाब में स्टारडम भी नहीं दिला पाए कांग्रेस को जीत, पार्टी के हार की क्या रही सबसे बड़ी वजह ?

पंजाब में आम आदमी पार्टी की ऐसी आंधी चली की दूसरे दलों की सभी चुनावी रणनीति फेल हो गई।

चंडीगढ़, 12 मार्च 2022। पंजाब में आम आदमी पार्टी की ऐसी आंधी चली की दूसरे दलों की सभी चुनावी रणनीति फेल हो गई। पंजाब कांग्रेस ने सिंगर सिद्धू मूसेवाला और मालविका सूद (सोनू सूद की बहन) को टिकट दिया था कि इनके स्टारडम के ज़रिए चुनावी फ़ायदा मिल सकेगा लेकिन कांग्रेस के ये चर्चित चेहरे पार्टी को सियासी फ़ायदा पहुंचाना तो दूर ख़ुद भी अपने हलके में जीत दर्ज नहीं कर सके। आख़िर क्या ऐसी वजब रही कि कांग्रेस का कोई भा दांव चुनाव में कारगर साबित नहीं हो पाया। कई ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से कांग्रेस दोबारा से सत्ता में वापसी नहीं कर पाई।

अपनी सीट भी नहीं बचा पाए मूसेवाला

अपनी सीट भी नहीं बचा पाए मूसेवाला

पंजाब कांग्रेस के उम्मीदवार सिंगर सिद्धू मूसेवाला से कांग्रेस को फ़ायदा क्यों नहीं पहुंचा ? इस मामले में सियास जानकारों का कहना है कि सिंगर सिद्धू मूसेवाला कोई चर्चित चेहरा नहीं था। पंजाब की सियासत के ऐतबार से सिद्धू मूसेवाला की पहचान राज्य स्तरीय भी नहीं थी। सिर्फ़ पंजाब के युवा जो गाना सुनने के शौक़ीन हैं वह ही सिद्धू मूसेवाला को जानते थे। मतदाताओं के ऐतबार से सिद्धू मूसेवाला को कोई पहचान नहीं पा रहा था भले ही वह पंजाब के गायकों में से एक हैं लेकिन वह वोट कन्वर्ट करने में कामयाब नहीं हो पाए। वहीं सियासी जानकारों का कहना है कि इस बात से भी उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वह अपने हलके तक में जीत दर्ज नहीं करवा पाए तो कांग्रेस को पूरे पंजाब में कहां से जिता पाते।

मानसा से टिकट देने पर हुआ था विरोध

मानसा से टिकट देने पर हुआ था विरोध

सिद्धू मूसेवाला को जब मानसा से टिकट दिया गया था तभी वहां के कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज करते हुए कहा था कि सिद्धू मूसेवाला को टिकट नहीं दिया जाए। अगर उन्हें टिकट दिया गया तो मानसा के सभी कार्यकर्ता कांग्रेस से किनारा कर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को वोट देंगे। कांग्रेस आलाकमान ने कार्यकर्ताओं की बात को अनसुना कर दिया और फिर वैसा ही हुआ, कांग्रेस गुटबाज़ी का शिकार हुई। कांग्रेस के पक्के कार्यकर्ताओं ने आप उम्मीदवार को समर्थन दे दिया नतीजा ये हुआ कि सिद्धू मूसेवाला को आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार डॉक्टर विजय सिंगला ने पूरे 63 हजार 323 वोटों से हराया दिया। उन्हें कुल(1 लाख 23 वोट मिले। कांग्रेस उम्मीदवार सिद्धू मूसेवाला को .सिर्फ़ 36 हज़ार 700 वोट ही मिले।

सोनू सूद के नाम पर भी नहीं मिले वोट

सोनू सूद के नाम पर भी नहीं मिले वोट

बॉलिवुड अभिनेता सोनू सूद की बहन मालविका सूद को कांग्रेस ने इसी उम्मीद पर अपना प्रत्याशी घोषित किया था कि सोनू सूद के नाम पर कांग्रेस को सियासी फायदा मिलेगा लेकिन पार्टी को इसका भी फ़ायदा नहीं पहुंच पाया। मालविका सूद को भी आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार डॉक्टर अमनदीप कौर अरोड़ा ने पूरे 20 हजार 915 वोटों से हराया दिया। मोगा विधानसभा सीट अमनदीप कौर अरोड़ा को 58 हज़ार 813 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार मालविका सूद को 38 हज़ार 125 वोट मिले। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि कोरोना काल में सोनू सूद समीहा के तौर अपनी पहचान बनाई है। चुनाव के दौरान वह जिस पार्टी को समर्थन कर देंगे वह चुनाव जीत जाएगी लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया। यहां तक कि उनकी बहन मालविका सूद अपनी सीट पर भी जीत दर्ज नहीं कर सकीं।

अपनी सीट नहीं बचा सके कांग्रेस के दिग्गज

अपनी सीट नहीं बचा सके कांग्रेस के दिग्गज

पंजाब में कांग्रेस की हार पर सियासी जानकारों का कहना है कि, चुनाव में कांग्रेस की हार की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस में गुटबाज़ी, दूसरी वजह पार्टी के नेताओं ने पार्टी के खिलाफ ही बयानबाज़ी कर रहे थे। तीसरी वजह टिकटों का बंटवारा सही नहीं हुआ जिस वजह से कांग्रेस के जो जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया। इसके बाद सीटिंग विधायकों का टिकट काटना कांग्रेस की बड़ी चूक थी। ऐसा करने से कांग्रेस अपने जनाधार को खोते चली गई। यही वजब है कि चुनाव में कांग्रेस की कोई भी रणनीति काम नहीं कर पाई। यहां तक के कांग्रेस के दिग्गज नेता भी अपनी सीट नहीं बचा सके।

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