मुलायम सिंह यादव की भतीजी संध्या यादव ने दाखिल किया नामांकन, बीजेपी के टिकट पर लड़ रही है चुनाव

मुलायम सिंह यादव की भतीजी संध्या यादव ने दाखिल किया नामांकन, बीजेपी के टिकट पर लड़ रही है चुनाव

मैनपुरी। समाजवादी पार्टी के संरक्षक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की भतीजी संध्या यादव ने जिला पंचायत सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। संध्या यादव बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही है। दरअसल, बीजेपी ने मंगलवार देर शाम जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशियों की सूची जारी की थी, जिसमें संध्या यादव को वार्ड नंबर 18 घिरोर तृतीय से प्रत्याशी बनाया था। बता दें कि संध्या यादव बीजेपी जिलाध्यक्ष के साथ बुधवार (07 मार्च) को कलक्ट्रेट स्थित अपर जिलाधिकारी कोर्ट में पहुंचीं और अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

Sandhya Yadav, niece of Mulayam Singh Yadav, filed her nomination for the upcoming panchayat elections

खबरों के मुताबिक, संध्या यादव अपने पति अनुजेश प्रताप यादव और बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान के साथ दोपहर बाद नामांकन स्थल पहुंचीं। संध्या यादव ने एआरओ को अपना नामांकन पत्र सौंपा। इसके बाद वह वापस लौट गईं। बता दें कि मैनपुरी में 30 सीटों पर जिला पंचायत वार्डों के लिए सदस्य पद का चुनाव किया जाना है। 30 सीटों के लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने मंगलवार (06 मार्च) शाम प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी थी। तो वहीं, वार्ड नंबर 18 घिरोर तृतीय से बीजेपी ने मुलायम सिंह यादव की भतीजी व पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की सगी बहन संध्या यादव को टिकट दिया है।

वहीं, संध्या यादव के बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने से सपाई खेमा सकते में है। दरअसल, संध्या यादव मैनपुरी की निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष हैं और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की भतीजी। वो बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की बड़ी बहन हैं। बता दें कि संध्या यादव को 2015 में सपा ने टिकट देकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया था, लेकिन चाचा भतीजे के झगड़े में वह राजनीति का शिकार हुईं और जिला पंचायत अध्यक्ष का पद डगमगाते देख भाजपा का सहारा लिया और भाजपा ने संध्या को टिकट देकर एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

2017 में आया था अविश्वास प्रस्ताव
जिला पंचायत अध्यक्ष संध्या यादव अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी कुर्सी बचाने में सफल रही थीं। दरअसल, जनवरी 2015 में समाजवादी पार्टी के समर्थन से पद संभालने के बाद जुलाई 2017 में सपा ने ही उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। अविश्वास प्रस्ताव पर कुल 32 जिला पंचायत सदस्यों में से 23 के हस्ताक्षर थे। बाद में वह भाजपा के साथ जोड़ तोड़कर जिला पंचायत अध्यक्ष अपनी कुर्सी बचा ले गईं।

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