अफगान शरणार्थियों के लिए इटली ने बनाया मानवीय गलियारा

रोम, 26 जुलाई। इटली के विदेश मंत्रालय के मुताबिक मानवीय गलियारे का उद्देश्य ''देश में अतिरिक्त शरणार्थियों को शरण देना और अफगानिस्तान में प्रताड़ित किए गए लोगों को सम्मानजनक जीवन देना है.''
पिछले साल अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद से तालिबान का देश पर राज है. इटली के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अफगानिस्तान छोड़ कर आ रहे अफगानों को सम्मान और सुरक्षा में भविष्य की संभावना देना है.
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद हजारों अफगान नागरिकों को निकाला गया, लेकिन तालिबान प्रतिशोध का जोखिम उठाने वाले कई लोग पीछे छूट गए.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि गलियारा ईरान, पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों से 1,200 अफगान शरणार्थी को ट्रांसफर करने में मदद करेगा. विदेश मंत्रालय ने कहा कि महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी.
सोमवार को पहले नौ अफगान शरणार्थी तेहरान से उड़ान भरकर इटली पहुंचे. अन्य 200 बुधवार को इस्लामाबाद से उड़ान भर रहे हैं और तीसरा समूह गुरुवार को तेहरान से आ रहा है.
तालिबान के शासन को अभी भी अवैध मानती हैं अफगान महिलाएं
वहीं तस्करी के रास्ते यूरोप पहुंचने वाले अफगान शरणार्थियों की संख्या बढ़ रही हैं. अब तक लगभग 3,280 समुद्र के रास्ते इटली पहुंचे हैं. इस बीच प्रवासन के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने कहा कि अफगान शीर्ष राष्ट्रीयता है जो यूरोपीय तटों के लिए खतरनाक मध्य भूमध्य सागर मार्ग अपनाने की हिम्मत कर रहे हैं, पिछले शुक्रवार तक इनकी संख्या 8,121 थी.
इटली ने कई वर्षों से मानवीय गलियारों की व्यवस्था करने की कोशिश की है ताकि संघर्ष, उत्पीड़न या अन्य गंभीर परिस्थितियों से भाग रहे लोगों के पास मानव तस्करों से बचना का विकल्प हो. लेकिन इन गलियारों के जरिए दूसरे देशों तक पहुंचने वालों की संख्या यूरोप पहुंचने के लिए तस्करों का सहारा लेने वाले हजारों लोगों की तुलना में कम है.
दूसरी ओर अफगानिस्तान इस समय लगभग पूरी तरह से विदेशी मदद पर निर्भर है. तालिबान करीब 50 करोड़ डॉलर के वित्तीय घाटे का सामना कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच में एसोसिएट विमेंस राइट्स डायरेक्टर हीथर बार ने कहा कि इन संस्थानों के बंद होने की वजह से अफगानिस्तान के हालात बिगड़ रहे हैं.
काबुल के गुरुद्वारे पर हमले के बाद भारत ने दिए 111 वीजा
महिलाओं को माध्यमिक शिक्षा से दूर कर दिया गया है, अकेले सफर करने नहीं दिया जाता और घर के बाहर खुद को पूरी तरह से ढक कर रखने के लिए कह दिया गया है. पुरुषों और महिलाओं के साथ खाना खाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है. कई लोग तालिबान के अत्याचार से बचने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और विदेश में जाने के लिए हाथ पैर मार रहे हैं.
एए/सीके (एपी, एएफपी)
Source: DW
-
संजू सैमसन पर हुई नोटों की बारिश! प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने पर मिली इतनी प्राइज मनी? -
जश्न या अश्लीलता? हार्दिक पांड्या की इस हरकत पर फूटा फैंस का गुस्सा, सोशल मीडिया पर लगा 'छपरी' का टैग -
T20 World Cup 2026: धोनी के 'कोच साहब' कहने पर गंभीर ने दिया ऐसा जवाब, लोग रह गए हैरान, जानें क्या कहा? -
कौन थीं Ishan Kishan की बहन वैष्णवी सिंह? खुद के दम पर बनाई थी अपनी पहचान, करती थी ये काम -
Mojtaba Khamenei Wife: ईरानी नए नेता की बीवी कौन? 10वीं के बाद बनीं दुल्हन-निकाह में दी ये चीजें, कितने बच्चे? -
'आपके पापा से शादी करूं, चाहे कितने भी मर्दों के साथ', मुसलमानों पर कमेंट करते ही एक्ट्रेस का कर दिया ऐसा हाल -
Trump Netanyahu Clash: Iran से जंग के बीच आपस में भिड़े ट्रंप-नेतन्याहू! Khamenei की मौत के बाद पड़ी फूट? -
T20 World Cup जीतने के बाद अब सूर्यकुमार यादव लेंगे संन्यास? प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया फ्यूचर प्लान -
रमजान के महीने में मुस्लिम पत्नी की दुआ हुई कबूल, हिंदू क्रिकेटर बना चैम्पियन, आखिर कौन है यह महिला -
Om Birla: अप्सराओं जैसी हैं ओम बिरला की दोनों बेटियां, बड़े बिजनेस घराने की है बहुएं, जानें क्या करती हैं? -
T20 World cup 2026: 'कुछ न लिखूं तो ही अच्छा ', भारत के विश्वविजेता बनने के बाद धोनी ने किसे कहा 'साहब'? -
IND vs NZ: पटना की बहू बनेंगी अदिति हुंडिया? गर्लफ्रेंड के साथ ईशान किशन ने मनाया जीत का जश्न, कब होगी शादी!












Click it and Unblock the Notifications