Exoplanet Hunting Satellite: एक्सोप्लैनेट हंटिंग सैटेलाइट 'सेफ मोड से 'बाहर ! NASA ने शुरू किया ऑपरेशन
स्पेस एजेंसी नासा के एक सैटेलाइट के कंप्यूटर में खराबी आने के बाद नासा ने ऑपरेशन भी शुरू कर दिया है। एजेंसी ने ये कदम तब उठाया है जब एक्सोप्लानेट सैटेलाइट के सेफ मोड से यानी खतरे की स्थिति में जाने की बात कही जा रही है।
NASA Exoplanet Hunting Satellite: स्पेस एजेंसी नासा के एक सैटेलाइट के कंप्यूटर में खराबी आने के बाद उसे ठीक करने के लिए कदम उठाए जा रहा हैं। इसके लिए नासा ने ऑपरेशन भी शुरू कर दिया है। एजेंसी ने ये कदम तब उठाया है जब एक्सोप्लानेट सैटेलाइट के सेफ मोड से बाहर निकलने यानी खतरे की स्थिति में जाने की बात कही जा रही है।

खराबी के कारणों की स्टडी कर रही टीम
ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट यानी TESS (Transiting Exoplanet Survey Satellite) के प्रभारी ने कंप्यूटर में आई खराबी के कारणों का पता लगाने लिए ऑपरेशन शुरू किया है। फिलहाल अंतरिक्ष यान सही स्थित में है। नासा ने कहा है कि हाल ही में एकत्र किए गए डेटा को डाउनलोड करने के बाद उपग्रह का संचालन फिर से शुरू किया जा सकेगा।

12 अक्टूबर को सैटेलाइट कंप्यूटर में खराबी
पिछले हफ्ते अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा को ये पता चला कि उसके सैटेलाइट के कंप्यूटर में खराबी आ चुकी है। इस खास कंप्यूटर को एक्सोप्लैनेट हंटिंग सैटेलाइट में लगाया गया है। इसका पता चलते ही समस्या को सुलझा लिया गया था। लेकिन खराबी की आशंका अब भी बनी है।

वैज्ञानिकों की टीम संतुष्ट नहीं
एजेंसी नासा के एक सैटेलाइट के कंप्यूटर में खराबी आने के बाद उसे काफी हद तक ठीक किया जा चुका है। लेकिन सेटेलाइट को ऑपरेट करने वाले साइंटिस्ट्स का दल अभी भी अनिश्चितता की स्थिति है। जब तक उपग्रह के कंप्यूटर को रिबूट होने का कारण पता नहीं चल जाता, नासा अपने ऑपरेशन को जारी रखेगा। नासा के अनुसार, टीम इस मुद्दे को देखती रहेगी कि इसके कारण क्या हुआ।

2018 में NASA ने लांच किया था TESS
नासा का ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे (TESS) 2018 में लॉन्च किया गया था और यह पृथ्वी के चारों ओर एक अण्डाकार कक्षा में स्थापित है। ये उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्द्धों के स्पेस का निरीक्षण कर सकता है। नासा का ये मिशन एक्सोप्लैनेट खोजने के लिए है। एक्सोप्लैनेट के आमतौर पर उनके छोटे आकार और बड़ी दूरी के कारण सीधी फोटो नहीं खींची जा सकती। इसलिए एक्सोप्लानेट की मौजूदगी का पता सितारों के जरिए चलता है। TESS टेलीस्कोप नए एक्सोप्लैनेट ढूंढने में सक्षम है।

5000 से अधिक एक्सोप्लानेट पता लगा
TESS ने अब तक कई एक्सोप्लैनेट खोजे हैं। एक्सोप्लैनेट हंटिंग सैटेलाइट के जरिए ये संभव हो पाया है। पिछले चार वर्षों में TESS को 5,000 से अधिक संभावित एक्सोप्लैनेट का पता चला है। TESS ने ऐसे उपग्रहों का पता लगाया है जो बेहद अजीब हैं।












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