Rahul Gandhi: संसद में मचे घमासान के बीच राहुल गांधी का तीखा हमला, अध्यक्ष की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
Rahul Gandhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने संसद में बोलते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सदन की कार्यवाही को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद पूरे देश की आवाज का प्रतिनिधित्व करती है, न कि किसी एक पार्टी का।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष अपनी बात रखने के लिए खड़ा होता है तो उसे बोलने से रोका जाता है। उन्होंने कहा कि पिछली बार जब उन्हें बोलने का मौका मिला था, तब उन्होंने प्रधानमंत्री के फैसलों और कुछ समझौतों से जुड़े एक बुनियादी सवाल को उठाया था।

क्या है विवाद की मुख्य वजह?
सदन में जारी गतिरोध की मुख्य वजह विपक्षी सांसदों का यह आरोप है कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी वे सदन में कोई बुनियादी सवाल उठाते हैं, तो उन्हें बोलने से रोकने का प्रयास किया जाता है। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष को तटस्थ होकर सदन चलाना चाहिए, लेकिन वे सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं।
सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि उन्हें और विपक्षी सांसदों को सदन में अपनी बात रखने से बार-बार रोका जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश की आवाज है, जहां हर पक्ष को बोलने का पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए। राहुल गांधी ने इस दौरान प्रधानमंत्री पर 'कॉम्प्रोमाइज्ड' होने का गंभीर आरोप भी मढ़ा, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
इस तीखी बहस की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने की। उन्होंने स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे किसी नेता के अहंकार की संतुष्टि का साधन करार दिया। प्रसाद ने राहुल गांधी के आचरण और उनके बयानों पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक पदों से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करते समय विपक्षी नेताओं को मर्यादा और गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने आपातकाल के समय का जिक्र करते हुए विपक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की।
रविशंकर प्रसाद की तीखी टिप्पणियों के बाद सदन में विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया और वे आसन के सामने (वेल में) आ गए। कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे दिलीप सैकिया ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। हंगामे के बीच जब राहुल गांधी को अपनी बात रखने का मौका मिला, तो उन्होंने दोहराया कि यह चर्चा केवल स्पीकर की भूमिका के बारे में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी जब उन्होंने प्रधानमंत्री से बुनियादी सवाल किए थे, तब भी उन्हें बोलने से रोका गया था। इस मामले को लेकर सदन में जबरदस्त राजनीतिक खींचतान जारी है।
With AI Inputs
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