पृथ्वी के 'महाविनाश' पर नई रिसर्च में क्या है ? तब महासागरों में खत्म हो गई थी ऑक्सीजन, विलुप्त हो गया था जीवन
नई दिल्ली, 15 सितंबर: अगर हमारे आसपास से ऑक्सीजन अचानक विलुप्त हो जाए तो क्या होगा? पृथ्वी पर ऐसा हो चुका है। सारे के सारे महासागर ऑक्सीजन विहीन हो चुके थे और परिणाम स्वरूप सारी समुद्री जीव कभी पूरी तरह से खत्म हो गए थे। यह जानकारी एक नई रिसर्च में मिली है, जिससे यह अंदाजा लग रहा है कि यह प्रक्रिया हमेशा के लिए खत्म नहीं हुई है। यानी भविष्य में ऐसी आशंकाओं को टाला नहीं जा सकता। खासकर वैज्ञानिक तो यह कह रहे हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से यह स्थिति तो पहले से बननी शुरू भी हो चुकी है। क्योंकि, इसके चलते समुद्र में पानी के बहाव में रुकावट आने लगी है, जिसके चलते ऑक्सीजन सर्कुलेशन प्रभावित हो रहा है।

महासागरों से पूरी तरह विल्पुत हो गई थी ऑक्सीजन-रिसर्च
पृथ्वी पर हम महासागरों के बारे में जितना अबतक समझ पाए हैं, उससे ज्यादा वैज्ञानिक चंद्रमा की गुत्थी सुलझा चुके हैं। समुद्र और महासागर जितने ही गहरे हैं, उससे भी ज्यादा उनके रहस्य अनसुलझे रहे हैं। इसलिए, जब भी महासागरों पर कोई नई रिसर्च सामने आती है तो काफी चौंकाने वाली जानकारियां मिलती हैं। एक नए शोध में ऐसा ही एक नया खुलासा हुआ है कि कैसे ऑक्सीजन की वजह से सागर में जीवन का संचार हुआ और फिर अचानक सबकुछ विलुप्त हो गया।

समुद्री जीवन के अचानक विल्पुत होने का खतरा
अपनी रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने समुद्र में जीवनदायनी ऑक्सीजन के सर्कुलेशन पर काम किया है, जिसके बिना जीवन असंभव है और इसी की कमी के चलते महासागरों की गहराइयों में पाए जाने वाले जीवों की मौत हो जाती है। रिसर्च में यह पाया गया है कि महासागरों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का सर्कुलेशन अचानक रुक सकता है। जाहिर है कि ऐसा होने पर समुद्री जीवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है। इस स्टडी के को-ऑथर और यूसी रिवरसाइड जीयोलॉजिस्ट एंडी रिजवेल ने एक बयान में कहा, 'महाद्वीपीय बहाव बहुत धीमा प्रतीत होता है, जैसे इसमें कुछ बहुत बड़ा बदलाव नहीं हो सकता है, लेकिन जब समुद्र साफ है, तो एक छोटी सी घटना भी समुद्री जीवन की व्यापक मृत्यु का कारण बन सकती है।'

कैसे समुद्री जीवन को जीवंत बनाती है ऑक्सीजन ?
वैसे जीवन पूरे महासागर में पनपता है। ध्रुवीय क्षेत्रों में यह तब शुरू होता है, जब पृथ्वी के वायुमंडल से यह ऑक्सीजन खींचता है, जो समुद्र के तल तक पहुंचती है। जब धुर्वों पर पानी ठंडा और सघन होता है तो ऑक्सीजन इसमें डूबकर नीचे तक पहुंचती है। फिर वापसी प्रवाह में यह कार्बनिक पदार्थों को समुद्र की सतह पर लाती है, जिससे प्लवक (अति सूक्ष्म जीव जो पानी में तैरते मिलते हैं ) का विकास होता है।

ओशन अनॉक्सिया क्या है ?
समुद्र में ऑक्सीजन का प्रवाह कैसे होता है, यह जानने के लिए शोधकर्ताओं ने एक जटिल कंप्यूटर मॉडल विकसित किया। इसके जरिए उन्होंने पाया कि वैश्विक महासागरीय परिसंचरण समय-समय पर बंद हो जाता है। इसे उन्होंने ओशन अनॉक्सिया कहा है, यानी ऐसी स्थिति जब महासागरों से ऑक्सीजन गायब हो जाती है। रिजवेल के मुताबिक, 'कई लाख वर्ष पहले, जब महासागरों में जीवों का जीवन शुरू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ था, लगता है कि पूरी दुनिया में ओशन सर्कुलेशन पूरी तरह से बंद हो गया था। हम यह पता लगाने की नहीं सोच रहे थे कि महाद्वीपों की गति से सतह का पानी और ऑक्सीजन डूबने से रुक सकता है और संभवत: धरती पर जीवन के विकास को नाटकीय अंदाज में प्रभावित कर सकता है।'

समुद्र में ऑक्सीजन के स्तर में बड़ा अंतर आने की आशंका
शोध से यह खुलासा हुआ है कि ग्लोबल वाटर सर्कुलेशन रुकने से समुद्र की ऊपरी और निचली सतह में ऑक्सीजन के स्तर में बहुत बड़ा अंतर आ सकता है। यह समुद्र के पूरी सतह के साथ हो सकता है, सिर्फ उन क्षेत्रों को छोड़कर जो समुद्री किनारों से सटे हैं। यह स्थिति 440 मिलियन साल तक बनी रही थी। यानी समुद्र में ऑक्सीजन नहीं तो, जीवन की कल्पना भी नहीं।

क्या जो पहले हो चुका है, फिर हो सकता है ?
शोधकर्ता अब इसपर अपनी रिसर्च को फोकस कर रहे हैं कि क्या यह स्थिति फिर से आ सकती है और अगर हां तो यह कब तक हो सकता है। हालांकि, उनका अबतक यही कहना है कि यह पता लगाना मुश्किल है कि इस तरह से समुद्र से ऑक्सीन गायब होने की घटना कब हो सकती है। इसमें कहा गया है, 'मौजूदा क्लाइमेट मॉडल इसकी पुष्टि करता है कि ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ने से ओशन सर्कुलेशन कमजोर होती जाएगी।'

पृथ्वी के 'महाविनाश' पर नई रिसर्च में क्या है ?
रिजवेल के मुताबिक, 'हमें ज्यादा रिजॉल्यूशन क्लाइमेट मॉडल की आवश्यकता है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि महाविनाश की घटना कब हो सकती है।...हमें उत्तरी अटलांटिक में आज के वाटर सर्कुलेशन को लेकर पहले से ही चिंता है और इसके साक्ष्य मौजूद हैं कि गहराइयों में पानी का बहाव घट रहा है।'उनके मुताबिक गर्मी में असामान्य गरम मौसम या कटाव से यह संकट बढ़ सकता है, जिससे जीवन पर संकट बढ़ सकता है।
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