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अलविदा 2017: आईएसआईएस के सफाए के लिए याद किया जाएगा साल, ये रहीं आतंकी गुट के खात्में की वजहें

नई दिल्ली। 2017 में दुनिया कई बड़ी घटनाओं की गवाह बनी। पूरे साल विश्वभर में जहां कई आंतकी घटनाओं ने इंसानियत को दहलाया तो आंतक के खिलाफ एक बड़े जंग में जीत की राहतभरी खबर भी इस साल दुनिया को मिली। 9 दिसंबर को इराकी सेना ने एक स्टेटमेंट जारी कर इराक से आतंकी संगठन आईएसआईएस के खात्में का एलान कर दिया। इराक के पीएम हैदर अल-अबादी ने भी एक कॉन्फ्रेंस में आईएस के खिलाफ लड़ाई के अंत की घोषणा कर दी। इराक के प्रधानमंत्री ने इस खुशी के अवसर पर रविवार 10 दिसंबर को आधिकारिक छुट्टी की घोषणा भी की। दहशत के पर्याय आईएसआईएस के खात्में में अहम बातें ये रहीं।

तीन साल से ज्यादा लंबी चली जंग

तीन साल से ज्यादा लंबी चली जंग

सुरक्षा बलों और आईएसआईएस के लड़ाकों के बीच लड़ाई तीन साल से ज्यादा चली। 10 जून 2014 को आईएसआईएस ने इराक के मोसिल शहर पर कब्जा कर लिया था। इस गुट के इराक के दूसरे शहरों पर कब्जे के लिए बढ़ने के बाद सुरक्षाबलों की इनसे झड़पे शुरू हुईं। तीन साल से लगातार ये लड़ाई चल रही थी।

शिया धर्मगुरु का फतवा

शिया धर्मगुरु का फतवा

इराक के पीएम हैदर अल-अबादी ने आईएसआईएस के खात्में के साथ शिया धर्मगुरू आयतुल्लाह सैयद अली सीस्तानी के उस एतिहासिक फतवे की प्रशंसा की, जो आईएसआईएस के अंत की अहम वजह बना। हैदर अल-अबादी ने कहा कि इतिहास इस बात को याद रखेगा कि सबसे कठिन समय में धर्म के वरिष्ठ नेतृत्व ने इराक की रक्षा की। आयतुल्लाह सैयद अली सीस्तानी ने आईएसआईएस के खिलाफ फतवा जारी किया था और गुट को मानवता के लिए खतरा बताया था। सैयद अली सीस्तानी ने फतवा जारी कर दाएश (आईएसआईएस) से मुकाबले को जिहाद कहते हुए इराक के लोगों से इनका मुकाबला करने को कहा।

 स्वयंसेवी संगठन हश्दुश्शाबी की भूमिका

स्वयंसेवी संगठन हश्दुश्शाबी की भूमिका

सुरक्षाबलों के लगातार संघर्ष के बावजूद आईएसआईएस को कमजोर ना पड़ता देख इराक के आम लोगों ने भी एक लंबी लड़ाई आतंकी गुट के खिलाफ लड़ी। आयतुल्लाह सैयद अली सीस्तानी के फतवे के बाद इराक के हजारों लोगों ने अपना संगठन हश्दुश्शाबी बनाया और इसके नीचे, सेना के साथ मिलकर आईएसआईएस का मुकाबला किया और इराक से इस गुट का सफाया करने में अहम भूमिका निभाई।

बगदादी की मौत से बढ़ा हौंसला

बगदादी की मौत से बढ़ा हौंसला

आईएसआईएस का मुखिया बकर अल बगदादी इस लड़ाई में सुरक्षाबलों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल माना जा रहा था। इस साल जून को सीरिया के रक्का में बमबारी में बगदादी के मारे जाने के दावा सुरक्षाबलों ने किया। इस दावे ने जहां सुरक्षाबलों और ईराक के लोगों में एक उत्साह भर दिया तो वहीं आईएसआईएस के आतंकियों में एक निराशा भर गई। इराकी लोकल मीडिया में जून में ये खबर आई कि रक्का शहर के जिस इलाके को निशाना बनाया गया वहां आईएसआईएस के हथियारों का जखीरा और अबू बकर अल बगदादी मौजूद था। हमले में घायल होने के बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद बगदादी का एक-एक किला लगातार ढहता गया। फलूजा, रमादी, समारा, तिकरीत, बैजी, सादिया, अनाह और कई दूसरे शहर इराकी फौज जीतती चली गई और आखिरकार इराक पूरी तरह आईएसआईएस से आजाद हो गया।

विदेशी मदद भी इराक के लिए रही अहम

विदेशी मदद भी इराक के लिए रही अहम

इराकी सेना को आईएसआईएस के खिलाफ जंग में विदेशी सेनाओं की मदद भी अहम रही। 2 साल पहले इराक ने अमेरिकी कोलिशन के साथ आईएस के खिलाफ ऑपरेशन शुरु किए थे। जुलाई 2017 में सेना ने मोसुल को आतंकियों से आजाद कराया था। वहीं रक्का शहर में जून में बगदादी सीरिया और रूसी सेना की सफेद फॉसफोरस बॉम्बिंग में घायल हुआ था और बाद में उसकी मौत हो गई थी।

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