अब सताने लगा है अमेरिका को सद्दाम हुसैन और गद्दाफी का भूत!
वाशिंगटन। इराक के पूर्व शासक सद्दाम हुसैन और लीबिया के तानाशाह मुआम्मार गद्दाफी, दोनों की जिंदगी जितनी शानदार थी मौत उतनी ही दर्दनाक। जहां सद्दाम हुसैन को अमेरिका ने पकड़ कर फांसी पर लटका दिया तो वहीं गद्दाफी की मौत भी कम दर्दनाक नहीं थी। अब इनका भूत अमेरिका को सताने लगा है।
आज बदली बदली नजर आती सूरत
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में मजबूत उम्मीदवार बनकर उभरे डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि आज अगर सद्दाम और गद्दाफी जिंदा होते तो शायद दुनिया ज्यादा सुरक्षित रहती।
ट्रंप ने यह भी कहा है कि मीडिल ईस्ट में अमेरिका के सारे अभियान उसके लिए एक बड़ी असफलता साबित हुए हैं। ट्रंप के मुताबिक यह संकट मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन के समय में और बढ़ गया।
सीएनएन के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा इराक और लीबिया पर नजर डाली जाए तो यह कहा जा सकता है कि आज दुनिया की हालत इतनी बदतर नहीं हुई होती।
जब इराक में नहीं था एक भी आतंकी
ट्रंप के मुताबिक इराक में कभी एक भी आतंकी नहीं हुआ करता था क्योंकि सद्दाम हुसैन तुरंत ही आतंकी को मार डालते थे। उन्होंने कहा कि वह सद्दाम को एक अच्छा व्यक्ति नहीं बता रहे हैं लेकिन कुछ बातों में उनकी नीतियां दुनिया की भलाई कि लिए थी।
आज सद्दाम की गैर-मौजूदगी में इराक आतंकियों की ट्रेनिंग की जगह बन गया है। 2003 में अमेरिकी ने इराक पर हमला किया था और उस समय के शासक सद्दाम हुसैन को पद से हटा दिया था।
खत्म हुआ इराक और लीबिया को नामोनिशां
ट्रंप के मुताबिक यही हाल लीबिया का है। आज कोई जानता ही नहीं है कि लीबिया जैसी कोई जगह भी दुनिया में है। ट्रंप ने साफ कहा कि आज दुनिया के नक्शे पर न तो इराक बचा है और न ही लीबिया।
दोनों ही देश खत्म हो चुके हैं और कोई नहीं जानता है कि दोनों देशों में आज क्या हो रहा है। 20 अक्टूबर 2011 को लीबिया के शहर सिर्ते में एक सुरंग के नीचे गद्दाफी को छिपा देखकर लोगों ने उसकी जान ले ली थी। ट्रंप के मुताबिक उनकी नीति अमेरिकी सेना को मजबूत करने की है।













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