कनाडा के एक और पूर्व आदिवासी स्कूल में मिलीं सामूहिक कब्रें
ओटावा, 24 जून। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को बताया कि कनाडा के एक पूर्व बोर्डिंग स्कूल में अज्ञात लोगों की कब्रें मिलीं, जिसमें सैकड़ों आदिवासी बच्चों के शवों को दफनाया गया था. ताजा खुलासे से पहले 215 बच्चों के शवों के अवशेष ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के एक पूर्व स्थानीय बोर्डिंग स्कूल में बरामद किए गए थे.

ये किसकी कब्रें हैं?
कनाडा में आदिवासी लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन कोसैक्स फर्स्ट नेशन के सदस्यों और कनाडा के फेडरेशन ऑफ सॉवरेन इंडिजिनस फर्स्ट नेशंस (एफएसआईएन) ने कहा कि कब्रें सास्काचेवान प्रांत के पूर्व मैरीविल इंडियन रेजिडेंशियल स्कूल में खोजी गई थीं.
बयान में कहा गया है, "कनाडा में अज्ञात कब्रों की संख्या देश के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी है."
एफएसआईएन नेता बॉबी कैमरून और कोसैक्स प्रमुख कैडमस डेलोर्मी ने कहा कि वे खोज के बारे में विस्तार से बताने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. पूर्व बोर्डिंग स्कूल 1899 से 1997 तक चला. यह सस्केचेवान की राजधानी रेजिना से लगभग 140 किमी पूर्व में स्थित है, जहां अब कोसैक्स समुदाय के लोग रहते हैं.
1970 में फर्स्ट नेशन ने स्कूल कब्रिस्तान पर नियंत्रण कर लिया था. तब से, वह सभी पूर्व आदिवासी आवासीय विद्यालयों में संभावित सामूहिक कब्रों की खोज कर रहा है.
ये आदिवासी स्कूल क्या थे?
कैम्लूप्स इंडियन रेजिडेंशियल स्कूल की तरह, जहां पिछले महीने सामूहिक कब्रें मिली थीं, मैरीविल स्कूल कैथोलिक चर्च के तत्वावधान में चलाया गया था. ये स्वदेशी स्कूल कनाडा के हिंसक इतिहास का हिस्सा रहे हैं जहां बच्चों को जबरन बोर्डिंग स्कूलों में रखा गया था.
1840 से 1996 तक कनाडा में 200 से अधिक बोर्डिंग स्कूल थे, जो सरकार और धार्मिक संस्थानों द्वारा चलाए जाते थे. पूरे कनाडा में 15 लाख से अधिक बच्चों को शिक्षा के नाम पर उनके माता-पिता से अलग कर दिया गया और बोर्डिंग स्कूलों में दाखिला करा दिया गया था. इसका उद्देश्य स्वदेशी आबादी के बच्चों और वहां बसने वालों के बच्चों के बीच संस्कृति को बढ़ावा देना था.
आदिवासी बच्चों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जाता और उन्हें अपनी मातृभाषा बोलने की अनुमति नहीं दी जाती थी. बच्चों के साथ मारपीट भी होती थी. कहा जाता है कि स्वदेशी समुदाय के 6,000 बच्चों की मृत्यु हुई थी.
कनाडा सरकार ने इस अमानवीय व्यवहार के लिए 2008 में औपचारिक तौर पर माफी मांगी थी. रोमन कैथोलिक चर्च जो अधिकांश स्कूलों को चलाता था, ने अब तक माफी नहीं मांगी है. इस महीने की शुरुआत में पोप फ्रांसिस ने एक बयान में कहा था कब्रों की खोज से उन्हें दर्द हुआ, पीड़ितों के बचे हुए लोगों ने पोप के बयान खारिज कर दिया था.
एए/सीके (एपी, डीपीए, एएफपी)
Source: DW
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