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कोरोना वायरस के चलते कश्मीर में क्या है हाल

कोरोना वायरस
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस का संक्रमण दुनिया के 168 देशों में पहुंच चुका है. भारत इन 168 देशों में से एक है. भारत में इस संक्रमण की वजह से अब तक चार मौतों की पुष्टि हो चुकी है और 250 से ज़्यादा लोग संक्रमित पाये गए हैं.

भारत में कोविड 19 के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र, केरल और उत्तर प्रदेश में पाये गए हैं लेकिन देश का हर राज्य अलर्ट पर है.

बीते कई महीनों से लॉकडाउन की स्थिति में रहे कश्मीर में भी कोरोना वायरस को लेकर एहतियात बरती जा रही है. कश्मीर में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला 18 मार्च को सामने आया था. श्रीनगर के खान्यार की एक 67 साल की महिला पॉज़ीटिव पायी गई थी. यह महिला कुछ वक़्त पहले ही सउदी अरब से लौटी थी.

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न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से ख़बर दी है कि इस महिला के घर के चारों ओर तीन सौ मीटर के दायरे को सील कर दिया गया है और स्वास्थ्य अधिकारी इस महिला के घर के आस-पास के एक-एक घर में जाकर स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं.

श्रीनगर में इस मामले के सामने आने के बाद स्थिति सामान्य नहीं रह गई है. लोगों में डर है और ये अपने आपमें बेहद चौंकाने वाली बात है कि जिस कश्मीर में लोग अक्सर पाबंदियों को लेकर प्रदर्शन करते नज़र आते हैं, आज वहीं कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से कश्मीर में पाबंदी लगाने को कह रहे हैं. कई लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकारियों से कहा है कि वे कश्मीर में पाबंदियां लागू कर दें.

19 मार्च की सुबह, श्रीनगर के डाउनटाउन इलाक़े में पूरी तरह बंदी रही.

श्रीनगर के ज़िला अधिकारी शाहिद चौधरी ने ट्वीट किया, "कोरोना वायरस के संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए श्रीनगर शहर में बंदी लागू की गई है. शहर के अलग-अलग हिस्से में मेडिकल टीम तैनात की गई है. हो सकता है कि इसकी वजह से आपको एक दिन या फिर अगले कुछ दिन तक परेशानी हो. लेकिन प्रशासन की ओर से सभी ज़रूरी इंतज़ाम किए गए हैं. कृपया घर पर ही बनें रहें."

श्रीनगर की सड़कों पर पुलिस और पैरा-मिलिट्री के जवानों की तैनाती की गई है. जगह-जगह बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है ताकि ट्रैफ़िक और लोगों के आवागमन पर नज़र रखी जा सके.

जम्मू और कश्मीर में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण के चार मामले सामने आ चुके हैं. जिनमें से तीन मामले जम्मू के हैं और एक कश्मीर का.

19 मार्च को अपनी ब्रीफ़िंग में नेशनल हेल्थ मिशन के डायरेक्टर ने बताया था कि जम्मू और कश्मीर में फिलहाल 34 लोगों को अस्पताल में क्वेरेंटाइन किया गया है और 419 लोग होम-सर्विलांस (घर में हैं और उन पर नज़र रखी जा रही है)पर हैं. इसके अलावा 156 सैंपल्स को टेस्ट के लिए भेजा गया था जिनमें से 144 की रिपोर्ट निगेटिव आयी है और चार पॉज़िटिव केस सामने आए हैं.

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श्रीनगर में पहला मामला सामने आने के बाद से ही आवागमन पर पाबंदी लगा दी गई है, परिवहन सेवा बंद है. एक बार फिर से जगह-जगह कंटीले तार बिछा दिये गए हैं. लाउड-स्पीकर पर घोषणाएं एक बार फिर वादी में सुनायी देने लगी है.

सिर्फ़ सरकारी कर्मचारियों, मीडिया के लोगों को ही कहीं आने जाने की अनुमति है. इसके लिए भी उनके पास वैध पहचान पत्र का होना ज़रूरी है. इसके अलावा अगर कोई आपातकालीन स्थिति है, तो ही नागरिकों को बाहर निकलने को कहा गया है.

पुलिस की ओर से नियमित तौर पर घोषणाएं की जा रही हैं और लोगों से अपील की जा रही है कि वो अपने-अपने घरों में ही रहें और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करें.

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क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने कश्मीर के भीतर सभी तरह के पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर बैन लगा दिया है. इसके साथ ही बाहर से आने वाले सार्वजनिक परिवहन वाहनों के आने पर भी प्रतिबंध लगाया जा रहा है.

लेकिन इस बार स्थानीय कश्मीरियों को इससे कोई शिकायत नहीं है और इसकी एकमात्र वजह ये है कि लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर काफ़ी डर है.

इस डर का अंदाज़ा राशन और रोज़ाना की चीज़ों की ख़रीदारी के लिए लगी लंबी-लंबी कतारों और पेट्रोल पंप के आगे खड़ी भीड़ को देखकर लगाया जा सकता है.

श्रीनगर में पहला केस सामने आने के बाद से ज़िला प्रशासन ने 21 मेडिकल टीमें तैनात की हैं ताकि ख़ान्यार इलाक़े में घर-घर जाकर जांच की जा सके.

श्रीनगर के मेयर जुनैद मट्टू कहते हैं, "श्रीनगर के ख़ान्यार इलाक़े में पहला मामला सामने आने के बाद पॉज़ीटिव पायी गई महिला के घर के 350 मीटर के दायरे को स्टरलाइज़्ड किया गया है."

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आलोचनाएं और प्रतिक्रिया

पिछले कुछ दिनों से कश्मीर के ज्यादातर ज़िलों में धारा 144 लगा दी गई है. राज्यों और ज़िले के भीतर भी परिवहन को निलंबित कर दिया गया है. बनिहाल और बारामूला के बीच चलने वाली एकमात्र रेल सेवा को भी 31 मार्च तक के लिए रोक दिया गया है.

अधिकारियों ने विदेशी पर्यटकों के आगमन पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत प्रावधान लागू किये हैं. जिसके तहत, सभी शैक्षणिक संस्थाओं, सार्वजनिक स्थलों जैसे रेस्त्रां, पार्क, जिम, सलून आदि को अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है.

इन प्रतिबंधों के बीच जम्मू-कश्मीर में हाई-स्पीड इंटरनेट पर प्रतिबंध को लेकर सरकार की काफ़ी आलोचना भी हो रही है.

बीते साल पांच अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था और उस वक़्त से ही यहां इंटरनेट सेवा बाधित थी.

कई शर्तों के साथ इसी साल 25 जनवरी को जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट सेवा शुरू की गई है लेकिन स्पीड 2G ही रखी गई.

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लेकिन अब जबकि घाटी को कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से बंद किया गया है तो लोगों की मांग है कि यहां 4G सेवा शुरू की जाए. हालांकि यह मांग काफी समय से की जा रही है लेकिन बीते दिनों में यह मांग और बढ़ गई है.

बांदीपोरा में शैक्षणिक संस्थान माइंडवायर अकेडमी के एडमिनिस्ट्रेशन प्रमुख डॉ. अशरफ़ वानी का कहना है "हमारे बच्चे साल 2019 से उस दौर से ही स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, इस साल जब चीज़ें थोड़ी सामान्य होना शुरू हुई तो यह वायरस का हमला."

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वो आगे कहते हैं, "भले ही हमने वीडियो के माध्यम से लेक्चर शुरू कर दिया है लेकिन इसके लिए हाई स्पीड इंटरनेट होना ज़रूरी है. स्पीड की समस्या की वजह से छात्रों को हर दूसरे दिन यहां आकर वीडियो लेना पड़ता है."

शुक्रवार की नमाज़

समाचार एज़ेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के नौहट्टा इलाक़े में जामिया मस्जिद समेत कई दूसरी मस्जिदों में शुक्रवार को सामूहिक नमाज़ अदा की गई. वहीं कुछ जगहों पर किसी भी तरह के सामूहिक आयोजन से मना कर दिया गया.

हालांकि जिन मस्जिदों में नमाज़ अदा भी की गई वहां नमाज़ का वक़्त कम कर दिया गया था. साथ ही लोग भी बहुत अधिक संख्या में नहीं थे. कश्मीर के सबसे बड़े मौलवी नासिर-उल-इस्लाम ने कहा "घाटी के लोगों को उलेमाओं के सामूहिक फ़ैसले का इंतज़ार करना चाहिए. यह बैठक शनिवार को होनी है."

उन्होंने कहा कि जो लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं, उन्हें ही मस्जिद में नमाज़ अदा करनी चाहिए.

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