Donald Trump Iran War: टूट के कगार पर NATO? ट्रंप ने सरेआम यूरोप को कहा 'धोखेबाज', आधी रात को लिया बड़ा फैसला
Donald Trump Iran War: ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के संकट ने दुनिया को हिला कर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों, खास तौर पर नाटो (NATO) और यूरोपीय राष्ट्रों पर अपना गुस्सा जाहिर किया है।
ट्रंप का आरोप है कि जब होर्मुज के रास्ते को सुरक्षित करने के लिए जहाजों की जरूरत थी, तो जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे देशों ने हाथ पीछे खींच लिए। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि भविष्य में पश्चिमी देशों का गठबंधन बुरी तरह दरक सकता है।

Iran Vs America War: नाटो का भविष्य खतरे में
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सहयोगी देश जरूरत के समय साथ नहीं खड़े होते, तो नाटो (NATO) का भविष्य 'बहुत बुरा' होगा। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका दशकों से इन देशों की रक्षा करता आया है, लेकिन जब ईरान के खिलाफ सैन्य मदद और जहाजों की बारी आई, तो उन्होंने कन्नी काट ली। ट्रंप के कड़े तेवर संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका अब इस गठबंधन से अपना मोह भंग कर सकता है, जिससे यूरोप की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
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Strait of Hormuz conflict: यूरोपीय देशों का 'धोखा'
जर्मनी, स्पेन और इटली जैसे बड़े यूरोपीय देशों ने ट्रंप की वॉरशिप भेजने की अपील को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप इसे एक बड़े धोखे की तरह देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो सिर्फ यह देखना चाहते थे कि मुश्किल वक्त में ये देश कैसे रिएक्ट करते हैं। ट्रंप के अनुसार, यूरोपीय देशों का यह रवैया दिखाता है कि वे सिर्फ अमेरिकी सुरक्षा का फायदा उठाना जानते हैं, लेकिन जिम्मेदारी निभाने के वक्त पीछे हट जाते हैं।
ब्रिटेन के रवैये पर हैरानी
ट्रंप ने ब्रिटेन की भूमिका पर भी गहरा दुख और आश्चर्य जताया है। शुरुआत में ब्रिटेन ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने से मना कर दिया था। लेकिन जब युद्ध की स्थिति बदलने लगी, तब उन्होंने मदद की पेशकश की। ट्रंप ने इस 'देर से आए ऑफर' को ठुकराते हुए कहा कि जंग खत्म होने के बाद उन्हें किसी के जहाजों की जरूरत नहीं है। ब्रिटेन जैसे पुराने दोस्त का यह व्यवहार ट्रंप को काफी चुभा है।
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होर्मुज में तेल का संकट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की रगों में दौड़ने वाले तेल का मुख्य रास्ता है, जहां से 20% ग्लोबल ऑयल गुजरता है। ईरान के नए लीडर मुज्तबा खामेनेई ने इसे बंद रखने की कसम खाई है, जिससे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का खतरा है। ईरान ने 15 से ज्यादा जहाजों पर हमले किए हैं। ट्रंप ने अब ठान लिया है कि अमेरिकी नेवी अकेले ही इन जहाजों को रास्ता दिलाएगी और उन्हें किसी के सहारे की जरूरत नहीं है।
ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' और जंग
यह पूरा संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान पर हमला किया। इस हमले में आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में आग लग गई। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने युद्ध को बेहद खतरनाक मोड़ पर ला दिया है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनकी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर मिलिट्री है और वे बिना किसी सहयोगी के इस जंग को अंजाम तक पहुंचाएंगे।
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