क्यों ईरान की नीतियों पर कभी अमेरिका का 'गुलाम' नहीं बनेगा भारत, जानें वजहें
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को साफ-साफ कहा है कि भारत, ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध को नहीं मानता है बल्कि वह यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को मानता है।
नई दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को साफ-साफ कहा है कि भारत, ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध को नहीं मानता है बल्कि वह यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को मानता है। सुषमा ने यह बात उस समय कही जब उनसे ईरान और वेनेजुएला पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत के तेल आयात पर होने वाले असर से जुड़ा एक सवाल पूछा गया था। हाल ही में अमेरिका ने ईरान के साथ साल 2015 में हुए परमाणु समझौते से खुद को बाहर कर लिया है। इस समझौते के तहत ईरान ने सभी तरह की परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी सभी संवेदनशील गतिविधियों को बंद करने का वादा किया था।

तेल का खेल
सुषमा की ओर से यह बयान आने के बाद उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जारीफ से मुलाकात की। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भारत की यह प्रतिक्रिया बड़ा झटका हो सकती है क्योंकि भारत, अमेरिका के लिए एक खास साझीदार है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और यूएन ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए तो भारत ने ईरान से कच्चे तेल का आयात करीब आधा कर दिया था। लेकिन आज भी भारत, ईरान के लिए तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की 80 प्रतिशत जरूरतें तेल से पूरी होती हैं। मार्च 2017 तक भारत ने ईरान ने 27.2 मिलियन टन तेल खरीदा था और इसके साथ ही तेल की खरीद में साल 2016 की तुलना में पूरे 114 प्रतिशत का इजाफा हुआ था।

चाबहार पोर्ट दोनों के बीच सबसे अहम
फरवरी में जब ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी भारत आए और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की तो ऊर्जा की जरूरतों के अलावा चाबहार पर भी बात हुई थी। चाबहार पोर्ट भारत-ईरान की मजबूत आर्थिक साझेदारी का उदाहरण है। चाबहार पोर्ट के जरिए भारत ने अफगानिस्तान तक अपनी आसान पहुंच बनाई है। चाबहार के जरिए भारत ईरान से प्राकृतिक गैस का आयात भी करेगा। चाबहार को पाकिस्तान में चीन के पोर्ट ग्वादर का जवाब माना जा रहा है और कई रणनीतिकार इसे भारत के लिए काफी अहम मानते हैं। वह मानते हैं कि भारत को अगर पश्चिम एशिया में अपने हितों की रक्षा करनी है तो फिर इस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करानी होगी और ईरान उसका एकमात्र रास्ता है। हालांकि अमेरिका को चाबहार पोर्ट पर काफी एतराज है। मई 2016 में तो अमेरिकी सीनेटर्स ने कहा था कि यह डील एक खतरा साबित हो सकती है। अमेरिकी विदेश विभाग में साउथ और सेंट्रल एशिया मामलों की विदेश उप मंत्री देसाई विश्वाल ने उस समय बताया कि अमेरिकी प्रशासन भारत को ईरान पर लगे प्रतिबंधों की जानकारी देता रहा है।

एक जैसे ईरान और भारत
रूहानी अपने दौरे पर जब यहां पर उन्होंने भारत को वर्तमान समय का एक ऐसा उदाहरण करार दिया जो शांतिपूर्ण है और जहां पर हर धर्म और संप्रदाय के लोग रह रहे हैं।रूहानी ने इस दौरान ध्यान दिलाया कि भारत और ईरान के बीच कई तरह के सांस्कृतिक और एतिहासिक रिश्ते हैं जो राजनीति और आर्थिक संबंधों से बहुत आगे हैं। इन दो महान देशों के लोग एक जैसा इतिहास साझा करते हैं। रूहानी ने कहा कि ईरान को भारत के साथ और करीबी रिश्ते चाहिए जहां पर सभी क्षेत्रों में आपसी भरोसा कायम रहे। भारत शायद इसी भरोसे और पिछले कई वर्षों से जारी इन्हीं सांस्कृतिक और एतिहासिक संबंधों को नहीं तोड़ना चाहता है।

गैस प्रोजेक्ट दोनों के लिए जरूरी
भारत के लिए इस समय ईरान-पाकिस्तान-इंडिया गैस पाइपलाइन यानी आईपीआई प्रोजेक्ट काफी अहम है। इस गैस प्रोजेक्ट से अअलग तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत यानी टीएपीआई या तापी प्रोजेक्ट भी भारत के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत की 90 मिलिसन मिट्रिक क्यूबिक मीटर गैस की जरूरत पूरी हो सकेगी और दोनों ही प्रोजेक्ट्स में ईरान एक बड़ा रोल अदा करता है। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अपनी किताब में लिखा था कि मई 2012 में उनके भारत दौरे का एक ही मकसद था कि भारत को इस बात के लिए राजी किया जाए कि वह ईरान पर अपनी तेल-निर्भरता को किसी तरह कम करे।

जाधव मामले में ईरान का रोल अहम
पाकिस्तान के साथ इस्लामिक गठबंधन के होने के साथ-साथ ईरान ने भारत के साथ भी मजबूत रिश्ते कायम रखे हैं। ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की वजह से लगे वैश्विक प्रतिबंधों के समय में भी कुछ एक अपवाद को छोड़कर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध अच्छे रहे। ईरान की भूमिका कुलभूषण जाधव मामले में भी काफी अहम है। साल 2016 में जब जाधव को पाकिस्तान ने पकड़ा था तो ईरान ने पाक से दो टूक कह दिया है कि उसे इस मामले से जोड़ना बंद करें। इसके अलावा राष्ट्रपति रूहानी साल 2016 में पाकिस्तान ने सेना के प्रमुख जनरल राहील शरीफ ने उनसे मुलाकात की थी और उनके साथ जाधव को मामला उठाया था। रूहानी ने जाधव को जासूस बताने पर पाकिस्तान के दावे को सिर्फ एक अफवाह करार दिया था।

अफगानिस्तान के लिए साथ रहना जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2016 में पहली बार ईरान की यात्रा पर गए थे और ईरान के साथ भारत ने 12 समझौतों पर साइन हुए हैं।इन समझौतों में से एक था भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच एक हाइवे का निर्माण। भारत और ईरान के बीच ट्राइलिटरल ट्रांसपोर्ट एंड ट्रांजिट एग्रीमेंट साइन किया गया है। इसी एग्रीमेंट के जरिए ही एक हाइवे इन तीनों देशों को आपस में जोड़ेगा। हाइवे को पाकिस्तान और चीन को भारत, ईरान और अफगानिस्तान के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
-
Laura Loomer India Visit: Trump की खास दोस्त, भारत को गाली देने वाली लौरा लूमर कौन, क्यों आईं दिल्ली? -
LPG Booking: फोन कॉल से बुक नहीं हो रहा सिलेंडर? घबराएं नहीं, इन स्मार्ट तरीकों से मिनटों में करें रिफिल बुक -
बिहार में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस का पर्याप्त भंडार, आपूर्ति सामान्य -
Dubai Gold Rate Today: दुबई से सोना लाना हुआ सस्ता! जानें 13 मार्च का ताजा भाव, कितनी होगी बचत? -
Israel Iran War: क्या संकट के बीच भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel? क्या है समुद्र पर तैरता हुआ ऑयल मार्केट? -
Dubai Gold Rate Today: दुबई vs भारत, 15 मार्च 2026 को कहां मिल रहा है सबसे सस्ता सोना? -
LPG shortage: 'नहीं होगी घरेलू सप्लाई में कमी', गैस सिलेंडर को लेकर मचे हाहकार के बीच सरकार का बड़ा बयान -
Mumbai LPG Crisis Ground Report: '15 दिनों की वेटिंग-बच्चे भूखे...धूप में भटक रहे हैं', कतारों में मुंबईवासी -
Saayoni Ghosh: 'तू लाख बेवफा है ', कौन हैं सयानी घोष जिनकी स्पीच ने इंटरनेट पर काटा गदर? -
LPG Price Today: एलपीजी को लेकर 3 दिन में सरकार ने लिए 7 बड़े फैसले, कहां पहुंचा गैस सिलेंडर का दाम? -
'मुसलमानों से ज्यादा तो हिंदू मर्द ही', बॉलीवुड की फेमस मुस्लिम एक्ट्रेस का बड़ा बयान, धर्म पर ये क्या कहा? -
VIDEO: Hardik Pandya की गर्लफ्रेंड से भिड़े ICC अधिकारी, मैदान से बाहर जाने को कहा? फिर मचा भयंकर बवाल












Click it and Unblock the Notifications