बिहार में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस का पर्याप्त भंडार, आपूर्ति सामान्य

बिहार सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के पर्याप्त स्टॉक की घोषणा की है, जिसमें घरेलू गैस आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है। एहतियात के तौर पर वाणिज्यिक गैस प्रतिबंधित है, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को निरंतर आपूर्ति का आश्वासन दिया गया है। अधिकारियों ने जनता से अफवाहों को नजरअंदाज करने और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सटीक जानकारी साझा करने का आग्रह किया है।

बिहार में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में इन आवश्यक ईंधनों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।

Bihar affirms ample gas and fuel supply

इस संबंध में 12 मार्च 2026 को विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख तेल एवं गैस कंपनियों के प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे, जबकि राज्य के सभी कमिश्नर, डीआईजी, आईजी, जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक को विकास आयुक्त, डीजीपी और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव ने संबोधित किया।

बैठक में तेल और गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि राज्य में गैस आपूर्ति से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। उनके पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और पाइप गैस लाइन की आपूर्ति भी सामान्य है। पेट्रोल औरडीजल की उपलब्धता भी निर्बाध रूप से जारी है और आने वाले दिनों में भी किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में कुल गैस आपूर्ति का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का है, जबकि 2 प्रतिशत से भी कम गैस व्यावसायिक उपयोग के लिए दी जाती है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार बिहार सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि घरेलू एलपीजी की आपूर्ति लगातार सुचारू रूप से जारी रहे।

हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए एहतियातन कमर्शियल गैस आपूर्ति को सीमित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों में गैस आपूर्ति पर कोई रोक नहीं होगी और उन्हें पूरी आपूर्ति मिलती रहेगी।

बैठक में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने बताया कि सर्वर पर अधिक लोड होने के कारण उपभोक्ताओं को ओटीपी मिलने में परेशानी हो रही थी। इस समस्या को दूर करने के लिए कंपनी ने गैस डिलीवरी के लिए ओटीपी की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय लिया है।

विकास आयुक्त और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि गैस की जमाखोरी या कालाबाजारी की सूचना मिलने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए गैस वितरकों को हर चार से पांच दिनों में एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी।

सरकार ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें। जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने जिलों के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से सही और तथ्यात्मक जानकारी साझा करें, ताकि लोगों तक सटीक सूचना पहुंचती रहे।

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