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राहुल गांधी को कांशीराम की अचानक आई याद, 'भारत रत्न' की कर दी मांग, आगबबूला हुईं मायावती क्‍या बोलींं?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अचानक से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम की अचानक याद आ गई है। राहुल गांधी ने 15 मार्च को अब कांशीराम को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने की वकालत की है। उन्होंने इस मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। जिसे उन्‍होंने सोशल मी‍डिया पर शेयर किया है।

अपने पत्र में, राहुल गांधी ने कांशीराम के सामाजिक न्याय और समानता के लिए आजीवन संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कांशीराम ने दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) और अल्पसंख्यकों को राजनीतिक मुख्यधारा में जोड़ने के लिए अथक प्रयास किए। उनका लक्ष्य इन वंचित तबकों को सशक्त बनाना और उन्हें समाज में उनका उचित स्थान दिलाना था। कांशीराम जी ने देश के बड़े वंचित समाज को जोड़ने का ऐतिहासिक काम किया। उनके योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न मिलना ही चाहिए।

rahul gandhi

"नेहरू होते तो कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते"

वहीं एक दिन पहले कांग्रेस पार्टी ने लखनऊ में कांशीराम की जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें राहुल गांधी ने कांग्रेस के दलित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, " अगर जवाहरलाल नेहरू होते तो कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते।"

आगबबूला हुईं बसपा सुप्रीमों मायावती, दिखाया आईना

राहुल गांधी के बयानों पर बसपा प्रमुख मायावती ने तत्काल पलटवार किया। लखनऊ में राहुल द्वारा कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग पर, मायावती ने कांग्रेस को 'आईना दिखाते हुए' एक लंबा पोस्ट लिखी। जिसमें मायावती ने अपने पोस्ट में तीखा सवाल उठाया।

मायावती ने लिखा, "जिन्होंने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न लायक नहीं समझा और मान्यवर कांशीराम के निधन पर कांग्रेस सरकार रहते एक दिन का शोक तक नहीं मनाया, ऐसे में राहुल गांधी किस मुंह से कांशीराम जी के लिए ऐसी बातें कह रहे हैं।"

अचानक राहुल गांधी को क्‍यों याद आए कांशीराम?

कांग्रेस सांसाद राहुल गांधी को ही नहीं कांशीराम राजनीतिक रूप से सभी दलों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए। दलित वोट सपा और कांग्रेस दोनों के राजनीतिक अस्तित्व से जुड़ गए हैं। यदि दलितों ने 2024 की तरह इन दलों का समर्थन किया, तो वे सत्ता में आ सकते हैं लेकिन अगर दलित, खासकर जाटव मतदाता, 2027 में बसपा के साथ बने रहे, तो अन्य दलों के लिए सरकार बनाना मुश्किल होगा। याद रहे उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोटर कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

सपा को चुनाव से पहले याद आए कांशीराम

इसलिए कांग्रेस ही नहीं, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव भी लगातार कांशीराम को अपना बनाने में लगे हैं। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और कांशीराम को एक साथ लेकर चल रहे हैं, और कई सालों से उनकी जयंती पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद कर रहे हैं।

भाजपा भी चुनाव से पहले चल सकती है बड़ा दांव

वहीं उत्‍तर प्रदेश की सत्‍ता पर काबिज भाजपा भी इस दौड़ में शामिल है। भाजपा में भी कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग उठ रही है। एक धड़े का मानना है कि मोदी सरकार द्वारा यह सम्मान मिलने से दलितों का एक बड़ा तबका भाजपा से जुड़ सकता है। इसलिए भाजपा में यह मंथन चल रहा है कांशीराम को भारत रत्न देकर श्रेय लेकर दलितों का दिल जीत लिया जाए।

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