Mumbai LPG Crisis Ground Report: '15 दिनों की वेटिंग-बच्चे भूखे...धूप में भटक रहे हैं', कतारों में मुंबईवासी

Mumbai LPG Crisis Ground Report: पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज पर तनाव के बाद मुंबई में LPG सिलेंडर की किल्लत ने आम लोगों की रसोई ठंडी कर दी है। धारावी (Dharavi) और कांदिवली जैसे इलाकों में सुबह से शाम तक लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। लोग नौकरी छोड़कर, बच्चों को भूखा छोड़कर धूप में खड़े हैं। ब्लैक मार्केट में सिलेंडर 1,800 रुपये तक बिक रहा है। आधिकारिक दाम से दोगुना।

Oneindia Hindi की टीम मुंबई में ग्राउंड पर उतरी। लोगों का दर्द सुनकर यकीन नहीं होता कि 15 दिन हो गए बुकिंग के, फिर भी सिलेंडर नहीं मिला। सिलेंडर की लंबी लाइन में लगने के लिए किसी ने नौकरी से छुट्टी ली है। कहीं काम धंधा ठप करके अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। आइए करीब से जानते हैं स्थिति...

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LPG Gas Cylinder Crisis Mumbai Families Struggle: लोगों का दर्द...'बच्चे भूखे, हम धूप में खड़े'

धारावी और कांदिवली के गैस एजेंसियों के बाहर हालात देखिए:-

  • अब्दुल रफीक (रोजेदार): 'आधे घंटे से कड़कती धूप में खड़ा हूं। अधिकारी बोलते हैं 10 मिनट में आएगा, लेकिन आता ही नहीं। 15 दिन हो गए बुकिंग को, लेकिन सिलेंडर हाथ नहीं लगा।'
  • यासमीन शेख: 'सुबह 9 बजे से बुलाया था, लेकिन जुम्मे के चलते नहीं आ सके। 15 दिनों से बुकिंग की है, कॉल करने पर कहते हैं 1-2 दिन में आ जाएगा। अब सड़क पर खड़े हैं, पता नहीं कब नंबर आएगा।'
  • स्थानीय निवासी अनीता बताती हैं- 'कल से घर में सिलेंडर नहीं है। बच्चे भूखे बैठे हैं। सुबह 9 बजे से भारत गैस एजेंसी के बाहर खड़ी हूं। काम-धंधा छोड़कर सब खड़े हैं। सरकार और एजेंसी हमारा नुकसान भरपाई करेगी क्या?
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  • एक अन्य महिला ने गुस्से में कहा कि 1 महीना हो गया बुकिंग को। 3-4 घंटे धूप में खड़ी हूं, फिर भी नहीं मिला। ब्लैक में डबल पैसा मांगते हैं। सरकार क्या कर रही है?
  • सुरेश सावंत कहते हैं कि हम बड़े लोग वड़ा-पाव से काम चला लेंगे, लेकिन बच्चे नहीं खा सकते।

LPG Crisis Black Marketing: ब्लैक मार्केट और अफरा-तफरी

धारावी निवासी बताते हैं कि 1,800 रुपये दिए एक सिलेंडर के लिए। बुकिंग में मुश्किल, डिलीवरी दिखाते हैं लेकिन आता नहीं। डीलर इस अफरा-तफरी का फायदा उठा रहे हैं।

बेकरों पर सबसे बड़ा खतरा: 3-4 दिन में पाव-ब्रेड की कमी!

मुंबई की 800 बेकरियों में से 350 प्रमुख बेकरियां गैस ओवन पर चलती हैं। ये शहर की 70% पाव-ब्रेड सप्लाई करती हैं। इंडिया बेकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष खोदादा ईरानी ने चेतावनी है कि 80% बेकरियां व्यावसायिक LPG पर निर्भर। बीएमसी के निर्देश पर हमने गैस ओवन लगाए, हर एक पर 7 लाख खर्च किए। अब गैस नहीं तो पाव-ब्रेड का क्या होगा? बेकर्स का अनुमान है कि 3-4 दिन में शहर में पाव और ब्रेड की भारी कमी हो सकती है।

सरकार क्या कह रही है?

महाराष्ट्र के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल का कहना है कि होटल-रेस्तरां को व्यावसायिक LPG कम की जा सकती है। केंद्र ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने को कहा है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि जमाखोरी या ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई होगी। सरकार का दावा है कि घरेलू LPG की आपूर्ति सुनिश्चित है, लेकिन हकीकत में कतारें और वेटिंग 15 दिन तक पहुंच गई है।

क्यों हुआ संकट?

ईरान-इजरायल युद्ध के बाद होर्मुज बाधित। भारत का 85-90% LPG इसी रूट से आता है। घबराहट की खरीदारी और व्यावसायिक डिमांड ने स्थिति बिगाड़ दी। मुंबई की रसोई और सड़क के खाने दोनों पर असर साफ नजर आ रहा है। सरकार घरेलू प्राथमिकता दे रही है, लेकिन आम आदमी और छोटे कारोबार पर बोझ बढ़ गया।

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