Indian Railways:ट्रेनों में अब ऐसे यात्रियों की खैर नहीं, 31 मार्च से जाना पड़ सकता है जेल
नई दिल्ली: अब से रेलवे की संपत्ति और सहयात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले और उनकी जान जोखिम में डालने वाले रेल यात्रियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है और उन्हें जेल तक जाना पड़ सकता है। भारतीय रेलवे ने स्मोकिंग करने वाले रेल यात्रियों के खिलाफ एक बड़ी मुहिम की शुरुआत की है। यह अभियान ट्रेनों में ज्वलनशील पदार्थ लेकर चलने वाले लोगों के खिलाफ भी शुरू की जा रही है। अब रेलवे, ट्रेनों में या स्टेशन परिसरों में स्मोकिंग करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा और मोटा जुर्माना भी वसूला जाएगा। रेलवे ने हाल में कुछ ट्रेनों में हुई आग लगने की घटनाओं के मद्देनजर यह कदम उठाया है।

ट्रेनों में अब ऐसे यात्रियों की खैर नहीं
कुछ जोन में हाल में ट्रेनों में आग लगने की घटनाओं को भारतीय रेलवे ने बहुत ही गंभीरता से लिया है। इन घटनाओं की वजह से ना सिर्फ रेलवे को करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है, बल्कि लोगों की जान भी जोखिम में पड़ी है। रेलवे के मुताबिक ऐसा लगता है कि ये घटनाएं ट्रेनों में स्मोकिंग करने या ज्वलनशील पदार्थों को लेकर चलने की वजह से हुई हैं। रेल मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है, 'ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय रेलवे ने स्मोकिंग करने और ज्वलनशील पदार्थों को लेकर चलने के लिए बहुत बड़ा अभियान लॉन्च किया है।' यह ड्राइव 22 मार्च, 2021 से ही शुरू किया जा चुका है। लेकिन, 31 मार्च, 2021 से इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ रेल मंत्रालय कानूनी कार्रवाई शुरू करने जा रहा है।
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31 मार्च से जाना पड़ सकता है जेल
रेलवे ने अपने सभी जोन को निर्देश दिया है कि इस अभियान की शुरुआत से पहले वो 7 दिनों के लिए जागरूकता अभियान चलाएं। इस दौरान रेलवे के सभी स्टेहोल्डर्स लोगों को आग से बचाव को लेकर शिक्षित करेंगे, जिसमें कि स्मोकिंग रोकने और ज्वलनशील पदार्थ लेकर चलने की सख्त मनाही होगी और इसके लिए सघन चेकिंग भी की जाएगी। जागरूकता अभियान के तहत रेलवे संचार के सभी माध्यमों से, जिसमें कि सीधी बातचीत, प्रचार माध्यमों, नुक्कड़ सभाओं और स्टेशनों पर एनाउंसमेंट के जरिए लोगों को इसके खिलाफ आगाह करेगा। रेलवे की ओर से सभी जोन को हिदायत दी गई है कि जागरूकता अभियान के बाद वह इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ बड़ी मुहिम की शुरुआत कर दें।

जोखिम में न पड़े किसी की जान
रेलवे के इस अभियान के तहत ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में स्मोकिंग करने वालों के खिलाफ रेलवे ऐक्ट और टोबैको ऐक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट्स ऐक्ट,2003 के मुताबिक इस कार्रवाई के लिए टिकट कलेक्टर या ऑपरेटिंग डिपार्टमेंट के इसी रैंक के अधिकारी या आरपीएफ के कम से कम एएसआई रैंक के अफसर को सक्षम अधिकारी माना गया है। इस अभियान के तहत ज्वलनशील और विस्फोटक पदार्थों की जांच के लिए ट्रेनों में लगातार चेकिंग की जाएगी। ये चेकिंग पैंट्री कारों में भी की जाएगी और कानून का उल्लंघन करने वालों पर रेलवे ऐक्ट के उचित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

दो शताब्दी ट्रेनों में लग चुकी है आग
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही देहरादून और लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस जैसी हाई-प्रोफाइल ट्रेनों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जानकारी के मुताबिक देहरादून शताब्दी में आग लगने की घटना की तहकीकात में पता चला है कि किसी यात्री ने टॉयलेट के डस्टबिन में जलती हुई सिगरेट फेंक दी थी, जिससे कोच में आग लग गई। जबकि, लखनऊ शताब्दी के लगेज वैन में आग लग गई थी, जिसे गाजियाबाद स्टेशन पर रोकना पड़ा था। राहत की बात ये रही कि दोनों ही घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। अभी तक रेलवे ऐक्ट के मुताबिक स्मोकिंग करते पकड़े जाने पर सिर्फ 100 रुपये जुर्माने का प्रावधान है, जिसे बढ़ाने के साथ-साथ दोषियों को जेल भेजने तक की कार्रवाई करने जा रही है। रेलवे के मुताबिक मौजूदा अभियान 30 अप्रैल तक चलने की संभावना है।












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