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'मैं अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट नहीं होने दूंगा, क्योंकि..'

वर्जिनिटी टेस्ट
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नई नवेली दुल्हनों का वर्जिनिटी टेस्ट.

संभव है कि ये बात कुछ लोगों को चौंकाए और कुछ लोग ऐसे भी हों जिन्हें इसमें कुछ भी गलत नज़र न आए.

लेकिन महाराष्ट्र के एक खानाबदोश आदिवासी समुदाय कंजरभाट में वर्जिनिटी यानी कौमार्यता की जांच बंद कराए जाने को लेकर मुहिम शुरू हुई है.

इस मुहिम को 25 साल के एक नौजवान विवेक तमाइचिकर ने शुरू किया है.

वर्जिनिटी टेस्ट से तकलीफ़ें

22 साल की अनीता (बदला हुआ नाम) की शादी तीन साल पहले हुई थी. शादी के बाद हुए वर्जिनिटी टेस्ट को याद करते हुए आज भी उनकी आंखें आंसू से भर जाती हैं.

महाराष्ट्र के कंजरभाट समुदाय की बाकी महिलाओं की ही तरह शादी के बाद अनीता को वर्जिनिटी टेस्ट से गुज़रना था ताकि अपनी शादी की रात ये साबित कर सकें कि वो 'पवित्र' हैं.

इस समुदाय में वर्जिनिटी टेस्ट को शादी के रीति-रिवाज़ों का ही हिस्सा समझा जाता है. इस टेस्ट पर ज़ोर देने वालों में आम लोगों के अलावा स्थानीय पंचायतें भी शामिल रहती हैं.

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कैसे किया जाता है वर्जिनिटी टेस्ट?

शादी करके आए हुए जोड़े को एक सफ़ेद चादर दी जाती है. फिर इस जोड़े को एक होटल के कमरे में ले जाया जाता है.

इस होटल का किराया अगर नवविवाहित जोड़े का परिवार न भी चुका पाए तो मदद के लिए पंचायत आगे आती है और किराया चुकाती है.

कमरे में जोड़ा दाखिल होता है और बाहर परिवार के लोग खड़े नज़र आते हैं. शादी तभी पूरी मानी जाती है, जब ये टेस्ट हो जाए.

कमरे में सेक्स के बाद अगर दुल्हन के खून निकल आए और चादर लाल हो जाए तो वर्जिनिटी टेस्ट में पास, शादी पूरी हुई.

लेकिन अगर खून न निकले तो दुल्हन 'अंजाम भुगतने' के लिए तैयार रहे. टेस्ट में फ़ेल होने के बाद दूल्हों को ये अधिकार मिल जाता है कि वो अपनी पत्नी को छोड़ सकें क्योंकि वो अपनी 'पवित्रता' साबित नहीं कर पाई. दुल्हन की इस कथित 'शर्मनाक' हरकत के लिए उसे बेइज्ज़त किया जाता है और पीटा तक जाता है.

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जानकार क्या कहते हैं?

कई जानकारों ने इस बात को ख़ारिज किया है कि पहली बार सेक्स करने पर महिलाओं के ख़ून निकलता है.

दिल्ली की गाएनोकॉलजिस्ट डॉ. सोनिया नाइक ने बीबीसी को बताया, ''सेक्स के दौरान ख़ून निकले, ये ज़रूरी नहीं है. वर्जिन लोगों के ख़ून निकलेगा, ये ज़रूरी नहीं है. ये बस मिथक है.''

अनीता अपने पति के साथ शादी से पहले शारीरिक संबंध बना चुकी थीं. ऐसे में उन्हें वर्जिनिटी टेस्ट में फ़ेल हो जाने का डर था. वो कहती हैं कि 'आगे जो हुआ, मैं उसके लिए बिलकुल तैयार नहीं थी.'

वो बताती हैं, ''मुझे लगा कि मेरा पति पंचायत में मेरे लिए खड़ा होगा. लेकिन जब उससे पूछा गया कि मैं पवित्र हूं या अपवित्र तो उसने बिना दाग की चादर की तरफ उंगली कर दी.''

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पंचायत ने लगाए इल्ज़ाम

अनीता आगे बताती हैं, ''पति के सही बात पर साथ न देने को लेकर मैं हैरान थी. मैं उसी के कहने पर छह महीने से उसके संग शारीरिक संबंध बना रही थी. पंचायत ने मुझे फ़ेक कहा. पति के छोड़ने के बाद मैं अकेली रह गई. मेरा रोना न जाने कितने ही दिन चला.'

अनीता को उनका पति अकेला छोड़ चुका था. लेकिन कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के दखल के बाद वो अनीता के साथ रहने के लिए तैयार हो गया.

अनीता ने बताया कि पति के साथ रहने का फ़ैसला काफ़ी मुश्किलों भरा था. वो कहती हैं, ''वो मुझे रोज़ मारता था, प्रताड़ित करता था. उसमे मेरी ज़िंदगी नरक बना दी थी.''

ऐसे मामलों में हालात बदतर इसलिए भी हो जाते हैं कि साथ रहने वाले फ़ेक जोड़ों पर पंचायत समुदाय के किसी रीति-रिवाज़ में शामिल होने पर रोक लगा देते हैं.

अनीता बताती हैं, ''मेरे गर्भवती होने के बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ. मेरे पति मुझसे हमेशा ये सवाल किया करते कि ये किसका बच्चा है. ये सवाल पूछने वालों में पंचायत के लोग भी शामिल थे.''

बच्चा पैदा होने के दो महीने बाद अनीता को नन्हें से बच्चे के साथ घर से बाहर निकाल दिया गया. अब वो अपने मां-पिता के घर में रह रही हैं और उनकी कुंवारी बहनों की शादी करने में दिक्कतें हो रही हैं.

वर्जिनिटी टेस्ट के ख़िलाफ अभियान कैसे होगा सफल?

इस अभियान को शुरू करने वाले विवेक तमाइचिकर जब 12 साल के थे, तब वो एक ऐसी ही शादी में शामिल हुए थे. जहां वर्जिनिटी टेस्ट में फ़ेल होने वाली दुल्हन को जूतों और चप्पलों से मारा गया.

विवेक बताते हैं, ''ये सब देखकर मैं समझ ही नहीं पाया कि क्या हो रहा है. जब मैं कुछ बड़ा हुआ, तब समझ पाया कि ये सारा माजरा क्या है.''

इस साल के आख़िर में विवेक की शादी होनी है. विवेक ने पंचायत को पहले ही बता दिया है कि वो ऐसे किसी टेस्ट से होकर नहीं गुज़रेंगे. लेकिन वो चाहते हैं कि समुदाय के बाकी लोग भी ऐसे ही कदम उठाएं और इस रिवाज़ को लेकर चुप्पी न बरतें.

वॉट्स ऐप ग्रुप से विरोध

विवेक ने एक वॉट्स ऐप ग्रुप 'स्टॉप द V रिचुअल' शुरू किया है.

इस ग्रुप में 60 सदस्य हैं जिनमें आधी लड़किया हैं. ये लोग मिलकर समुदाय में वर्जिनिटी टेस्ट की परंपरा को ख़त्म करने की कोशिश करते हैं.

विवेक बताते हैं, ''ये जोड़े की निजता के अधिकार का हनन है. जिस तरह ये किया जाता है, वो बहुत क्रूर है. शादी को पूरी करने के लिए कमरे के भीतर भेजने से पहले दूल्हे को 'शिक्षित' बनाने के लिए पॉर्नोग्राफी दिखाने के अलावा शराब भी पिलाई जाती है. अगली सुबह अभद्र तरीके से ये सवाल किया जाता है कि क्या आपकी पत्नी पवित्र है या नहीं.''

ऐसे मामलों में अपनी बात के लिए खड़ा होने वालों को सामाजिक दवाब का सामना करना पड़ता है.

इस ग्रुप के कुछ लोगों पर हाल ही में पुणे की एक शादी में विरोध करने पर मेहमान हमला तक कर देते हैं.

इस ग्रुप के सदस्यों को पंचायत कई बार चेतावनी दे चुका है. इसमें समाजिक बहिष्कार जैसी धमकियां भी शामिल हैं.

ग्रुप पर आरोप लगता है कि ये समुदाय को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन विवेक रुकने वाले नहीं हैं. वो कहते हैं कि मैं इस अभियान को जारी रखूंगा.

पुणे की शादी में हुए हमले के बाद इस मुद्दे पर पूरे मुल्क में बात हो रही है. विवेक को उम्मीद है कि इस मुद्दे पर आने वाले वक्त में लोगों की सोच बदलेगी.

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