क्या है धारा 92 जिसके तहत जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति की जगह लगता है राज्यपाल शासन?
मंगलवार को जम्मू कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन टूटने के बाद से अब राज्य में राजनीतिक संकट की स्थिति है। यहां पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से राज्यपाल शासन के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।
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श्रीनगर। मंगलवार को जम्मू कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन टूटने के बाद से अब राज्य में राजनीतिक संकट की स्थिति है। यहां पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से राज्यपाल शासन के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। जहां देश के बाकी राज्यों में सरकार की असफलता पर राष्ट्रपति शासन लगता है तो जम्मू कश्मीर में राज्यपाल का शासन होता है अगर किसी कारणवश सरकार गिर जाती है। जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही राज्यपाल शासन लागू होता है और ऐसा यहां के संविधान में मौजूद धारा 92 के तहत होता है। हिंदी में यह भी पढ़ें-घाटी में आतंकवाद को नियंत्रित नहीं कर सकता है मुफ्ती खानदान

देश के बाकी राज्यों से क्यों अलग है जम्मू कश्मीर
जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन छह माह के लिए लगाया जाता है। देश के संविधान के तहत जम्मू कश्मीर को स्पेशल राज्य का दर्जा दिया गया है। यह देश का अकेला ऐसा राज्य है जिसका एक अलग संविधान है और अलग नियम हैं। इनकी वजह से राज्य देश के बाकी राज्यों से अलग है। देश के अलग-अलग हिस्सों में संविधान की धारा 356 के तहत राष्ट्रपति का शासन लागू होता है।

पहली बार साल 1977 में लगा राज्यपाल शासन
वहीं राज्यपाल के शासन के तहत राज्य की विधानसभा को सस्पेंड कर दिया जाता है या फिर इसे खत्म कर दिया जाता है। अगर छह माह से पहले सरकार नहीं बन सकती तो फिर इसे शासन को आगे बढ़ाया जा सकता है। पहली बार मार्च 1977 में जम्मू कश्मीर में राज्यपाल कर शासन लागू हुआ था। उस समय कांग्रेस की सरकार ने राज्य में नेशनल कांफ्रेंस की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था जिसे फारूख अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला लीड कर रहे थे।

जब जम्मू कश्मीर का होता था अपना पीएम
जम्मू कश्मीर में धारा 370 लागू है और संविधान की इस धारा के तहत केंद्र सरकार और संसद के पास राज्य से जुड़ी सिर्फ कुछ ही मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार होता है। बाकी मुद्दे प्रांतीय सरकार के पास होते हैं और विधानसभा की ओर से सरकार के कार्यों को समर्थन दिया जाता है। जहां देश के बाकी हिस्सों में राज्यपाल होता था साल 1965 तक जम्मू कश्मीर के उस पद को सदर-ए-रियासत कहा जाता था। सरकार के मुखिया को मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रधानमंत्री कहते थे।

राज्य में घोषित हो सकता है आपातकाल
अगर भारत सरकार चाहे तो जम्मू कश्मीर में आपातकाल की स्थिति घोषित कर सकती है और राज्य में राज्यपाल के शासन को लागू कर सकती है। वहीं राज्य में रक्षा, विदेशी मामलों, संचार और वित्त से जुड़े मसले केंद्र सरकार और देश के संविधान के तहत आते हैं।
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