कांग्रेस की रणनीतिक भिन्नता हुई बेनकाब, असंतुष्ट नेता नीतिगत मुद्दों पर रखेंगे अपनी राय!
नई दिल्ली। कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले कांग्रेस के असंतुष्ट वरिष्ठ नेताओं द्वारा जल्द पार्टी के आधिकारिक मंच से स्वतंत्र राष्ट्रीय मुद्दों पर नियमित बयान जारी करने की संभावना है, यह कदम मोदी सरकार की आलोचना में पार्टी की कमियों को दिखाने के लिए उठाया जा सकता है। असंतुष्ट नेताओं का समूह राहुल गांधी के प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ व्यक्ति टिप्पणियों से नाखुश हैं।

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गौरतलब है कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं के समूह ने सोनिया गांधी को संगठनात्मक ओवरहालिंग और सक्षम और दृश्य नेतृत्व के लिए पत्र लिखा था, उन्होंने तय किया है कि केंद्र पर केंद्रित नीतिगत बयानों को पार्टी के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भाजपा को भी संदेश देना जरूरी है। पत्र लेखकों के समूह में एक सदस्य ने कहना है कि ऐसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर पार्टी चुप है।

एक अन्य सदस्य ने कहा कि यह देखा जा सकता है कि राहुल गांधी फॉर्म के मुद्दे पर दिखाई देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार होती तो चीन को लद्दाख से 15 मिनट में बेदखल करने की टिप्पणी और पीएम मोदी के बारे में उनकी व्यक्तिगत टिप्पणियां उनमें चालाकी की कमी को फिर दर्शाती है।
गत मंगलवार को जी -23 के अंदर भी झड़पों के बारे में एक बड़ी चर्चा थी। हालांकि यह दावा किया गया था कि दो पत्र लेखकों में मतभेद था। हालांकि एक अन्य स्रोत ने बताया कि इसमें एक एआईसीसी सदस्य शामिल था। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है।

ऐसा लगता है कि जी-23 उन चुनिंदा पदाधिकारियों के एक कोर समूह को विकसित कर रहा है, जो भविष्य के कदमों के बीच आपस में निपटेंगे, जबकि प्रमुख पदाधिकारी अलग-अलग कारणों से पीछे हो गए है। यह प्रतीत होता है कि कुछ सदस्य पत्र में निर्धारित उद्देश्य या सक्रिय भागीदारी पर दूसरों पर सवाल करते हैं, जबकि उनमें से एक धड़ा नेतृत्व को चुनौती देने या विद्रोही के रूप में खुद को नहीं दिखाना चाहता है।












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