Israel Iran War: Hormuz नहीं, अब इस रास्ते से होगी गैस-तेल की सप्लाई, UAE ने निकाला तोड़, भारत को कितना फायदा?
Israel Iran War: आपदा में अवसर, ये वाक्य पूरी दुनिया कोरोना के बाद बड़े अच्छे से समझने लगी है। यही कारण है कि जब कोई आपदा आती है तो उसमें लोग अवसर तलाशने लगते हैं और अपनी लकीर दूसरों से बड़ी खींचने की कोशिश की जाती है। ऐसा ही कुछ कोशिशें अब UAE कर रहा है और मिडिल ईस्ट में अपना दबदबा बढ़ाने तैयारी में है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियो-पॉलिटकल संकट और Strait of Hormuz में सप्लाई रुकने के खतरे के बीच United Arab Emirates (UAE) एक रणनीतिक रूप से तैयार एनर्जी प्रोड्यूसर के रूप में सामने आया है। UAE की यह दूरदर्शी रणनीति अब ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है, तब दुनिया को भरोसेमंद तेल और गैस जैसे संसाधनों की सप्लाई देने में UAE की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

सालों से था इस पल का इंतजार
UAE ने पिछले कई सालों से तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने, इम्पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और रिन्युएबल एनर्जी में निवेश करने पर लगातार काम किया है। इन रणनीतिक कदमों की वजह से UAE पूरी दुनिया तेल बाजारों में स्थिरता बनाए रखने में सक्षम रहा है, जबकि कई अन्य ऐसे देश जो ऑयल का प्रोडक्शन करते हैं, इस समय अनिश्चितता और जोखिम का सामना कर रहे हैं।
क्या है ADNOC? जो बना ताकत
UAE की इस एनर्जी स्ट्रेटजी के केंद्र में Abu Dhabi National Oil Company यानी ADNOC है। इस कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर लगभग 5 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंचा दी है। कई अन्य तेल उत्पादक देशों के मुकाबले UAE के पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद है। यही अतिरिक्त क्षमता संकट के समय सप्लाई बढ़ाने और तेल की कीमतों में अचानक होने वाली तेज बढ़ोतरी को रोकने में मदद करती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज क्यों है इतना अहम?
आज के समय में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव यह दिखा रहा है कि Strait of Hormuz कितना महत्वपूर्ण है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसलिए इसे दुनिया के सबसे संवेदनशील शिपिंग मार्गों में से एक माना जाता है। अगर इस Strait of Hormuz पर कोई खतरा पैदा होता है तो शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम और कच्चे तेल की कीमतें तुरंत बढ़ सकती हैं।
UAE ने पहले ही बना लिए वैकल्पिक रास्ते
इस जोखिम को कम करने के लिए UAE ने संकट आने से काफी पहले ही वैकल्पिक इम्पोर्ट के लिए रास्ते तैयार कर लिए थे। इसी रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है Habshan-Fujairah Pipeline। यह पाइपलाइन UAE के अंदर मौजूद तेल क्षेत्रों को सीधे ओमान की खाड़ी में स्थित फुजैरा बंदरगाह से जोड़ती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज की जरूरत ही नहीं
यह पाइपलाइन रोजाना लगभग 1.5 से 1.8 मिलियन बैरल कच्चा तेल ले जाने की क्षमता रखती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि UAE बिना Strait of Hormuz से गुजरे भी बड़ी मात्रा में तेल का इम्पोर्ट कर सकता है। इससे वैश्विक बाजारों को लगातार सप्लाई मिलती रहती है।
फुजैरा बना वैश्विक ऊर्जा हब
यह पाइपलाइन Fujairah में बने बड़े एनर्जी सेटंर को भी सपोर्ट करती है। फुजैरा अब दुनिया के प्रमुख तेल स्टॉक, बंकरिंग और रिफाइनिंग हब में से एक बन चुका है। जब क्षेत्र में तनाव या जंग होती है, तब भी तेल टैंकर फारस की खाड़ी में जाए बिना ही यहां से तेल लोड कर सकते हैं। इससे जोखिम के बावजूद तेल इम्पोर्ट जारी रह सकता है।
UAE की रणनीति सिर्फ तेल तक सीमित नहीं
UAE की ऊर्जा रणनीति केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं है। अबू धाबी ने एनर्जी ट्रांजिशन में भी बड़े इन्वेस्टमेंट्स किए हैं। इसमें दुनिया भर में सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी और हाइड्रोजन से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा पुख्ता हाइड्रोकार्बन सप्लाई को रिन्युएबल एनर्जी इन्वेस्टमेंट्स के साथ जोड़कर UAE भविष्य के ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत बना रहा है।
कनाडा जैसे देश भी उठा रहे हैं फायदा
इसी दौरान Canada जैसे तेल उत्पादक देश मौजूदा संकट के कारण बढ़ती तेल कीमतों का फायदा उठा रहे हैं। कनाडा में WTI crude oil से जुड़ी कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें अनुमानित बजट घाटे को सरप्लस में बदल सकती हैं। एक्सपर्ट की मानें तो Cenovus Energy और Canadian Natural Resources जैसी कंपनियों को इस तेजी का सीधा फायदा मिलेगा। इनकी कमाई और रॉयल्टी में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारत में नहीं होगा तेल संकट?
इन सभी घटनाओं से साफ है कि जियो पॉलिटकल अस्थिरता दुनिया के ऊर्जा बाजार को तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में जिन देशों के पास जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता, इम्पोर्ट करने के मल्टीपल रास्ते और अलग-अलग एनर्जी सेक्टर्स में निवेश हैं, वे ज्यादा मजबूत स्थिति में हैं। ऐसे में आप यह भी कह सकते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मूज अगर बंद भी पड़ता है तो भी भारत पर बहुत ज्यादा असर नहीं होगा। क्योंकि भारत समुद्र के रास्ते से इन UAE के काफी करीब है और सप्लाई भी आसानी से मिल सकती है।
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