US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग से इन मुस्लिम देशों की बल्ले बल्ले, हो रही तगड़ी कमाई

US Iran War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। जंग ने अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर असर डालना शुरू कर दिया है। युद्ध के 15 दिन पूरे होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इस टकराव से किसे नुकसान हुआ और किसे फायदा मिला? दरअसल, जब भी खाड़ी क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो इसका सबसे पहला असर ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।

पर्शियन गल्फ दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में संघर्ष की स्थिति बनने पर तेल की सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली जाती हैं।

US Iran War

US Iran War: तेल निर्यातक देशों को मिलता है लाभ

- तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से उन देशों को सीधा फायदा होता है जो बड़े पैमाने पर तेल निर्यात करते हैं। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और रूस जैसे देशों की अर्थव्यवस्था को महंगे तेल से बड़ा लाभ मिलता है।

- हालांकि, इस बार स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। क्षेत्र में बढ़ते हमलों और सुरक्षा खतरों की वजह से कई रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है।

- इससे कुछ खाड़ी देशों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का फायदा तेल निर्यातक मुस्लिम देशों को मिल रहा है।

US Iran war Impact: रूस को मिला आर्थिक और राजनीतिक फायदा

इस पूरे संघर्ष से सबसे ज्यादा फायदा रूस को मिलने की चर्चा हो रही है। रूस पहले से ही दुनिया के बड़े तेल और गैस निर्यातकों में शामिल है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो रूस की आय में भी तेजी से इजाफा होता है। इसके अलावा, राजनीतिक स्तर पर भी रूस को अवसर मिलता है। जब अमेरिका का ध्यान मध्य पूर्व में युद्ध पर केंद्रित रहता है तो यूरोप और पूर्वी यूरोप के अन्य मुद्दों पर उसकी सक्रियता कम हो सकती है। इससे रूस को अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश मिलती है।

चीन की रणनीति भी मजबूत

इस संघर्ष से चीन को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलता दिखाई दे रहा है। चीन लंबे समय से मध्य पूर्व में अपनी आर्थिक और राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को अपने तेल के लिए वैकल्पिक खरीदारों की तलाश रहती है। ऐसे में चीन अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईरान से तेल खरीद सकता है। इससे उसे सस्ता ईंधन मिलता है और साथ ही क्षेत्र में उसका प्रभाव भी बढ़ता है।

हथियार उद्योग की बढ़ती मांग

युद्ध का एक बड़ा आर्थिक लाभ हथियार बनाने वाली कंपनियों को भी मिलता है। अमेरिका, फ्रांस, यूके और रूस की रक्षा कंपनियों को ऐसे समय में बड़े ऑर्डर मिलने लगते हैं। मध्य पूर्व के कई देश क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट और अन्य आधुनिक हथियार खरीदते हैं। इससे रक्षा उद्योग को अरबों डॉलर का कारोबार मिलता है।

इजराइल की रणनीतिक सोच

ईरान और इजराइल के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। इजराइल हमेशा ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमता को अपने लिए बड़ा खतरा मानता रहा है। ऐसे में यदि युद्ध के कारण ईरान का सैन्य ढांचा कमजोर होता है तो इसे इजराइल अपने लिए रणनीतिक राहत के रूप में देखता है, भले ही संघर्ष के दौरान उसे भी नुकसान झेलना पड़े।

घरेलू राजनीति पर भी असर

कई बार युद्ध का लाभ सीधे देशों को नहीं बल्कि वहां के नेताओं को मिलता है। राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद के मुद्दे को आगे रखकर सरकारें घरेलू असंतोष से ध्यान हटाने की कोशिश करती हैं। ईरान और अमेरिका दोनों में यह रणनीति अलग-अलग समय पर देखने को मिलती रही है। अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, हथियार उद्योग, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+