भोपाल नगर निगम में करोड़ों के फर्जी बिल घोटाले में लोकायुक्त की जांच तेज, सर्वर रूम से हार्ड डिस्क जब्त
Bhopal Municipal: राजधानी भोपाल के नगर निगम में बिना किसी वास्तविक काम के फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये निकालने का मामला अब लोकायुक्त पुलिस की जांच में गहराता जा रहा है। शुक्रवार (13 मार्च 2026) को फतेहगढ़ स्थित डेटा सेंटर और अन्य शाखाओं में छापेमारी के दौरान पिछले 10 साल का सर्वर डेटा और हार्ड डिस्क जब्त की गई थी।
अब इस डेटा का फॉरेंसिक एनालिसिस चल रहा है, जिससे यह साफ होगा कि अपर आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवतकर के साथ और कौन-कौन लोग इस घोटाले में शामिल थे और पूरा फर्जीवाड़ा कैसे अंजाम दिया जाता था।

घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?
नवंबर 2025 में लोकायुक्त को शिकायत मिली थी कि नगर निगम में विभिन्न विभागों (जलकार्य, सामान्य प्रशासन, सेंट्रल वर्कशॉप आदि) के नाम पर बिना काम कराए फर्जी बिल तैयार कराए जा रहे हैं। शिकायत में नामजद आरोप अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर पर लगे थे। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर 9 मार्च 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), धारा 420, 467, 468, 471 (धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज) के तहत FIR दर्ज की गई। कोर्ट से सर्च वारंट लेकर लोकायुक्त टीम ने छापेमारी शुरू की।
फर्जी बिलिंग का तरीका
लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार, पूरा घोटाला SAP सॉफ्टवेयर के जरिए सुनियोजित था:
बिना किसी फिजिकल काम (वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग, स्पेयर पार्ट्स आदि) के सिस्टम में ई-बिल तैयार किए जाते थे।
ये बिल अधिकारियों के परिचितों, रिश्तेदारों या बाहरी फर्मों के नाम पर पास कराए जाते थे। संबंधित विभागों को कई मामलों में इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनके नाम पर भुगतान निकाला जा रहा है। सेंट्रल वर्कशॉप (जहां निगम की गाड़ियों का रखरखाव होता है) में बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग के साक्ष्य मिले हैं।
रविवार को सेंट्रल वर्कशॉप पर छापा
शुक्रवार की कार्रवाई के बाद रविवार (15 मार्च 2026) सुबह 9 बजे लोकायुक्त टीम ने माता मंदिर के पास स्थित सेंट्रल वर्कशॉप कार्यालय में दबिश दी। यहां से अहम दस्तावेज, रिकॉर्ड और मैकेनिकल कार्यों से जुड़े पेपर जब्त किए गए। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।
अपर आयुक्त सेवतकर का बचाव और स्थिति
अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने अपने बचाव में कहा है कि लेखा शाखा सीधे बिल पास नहीं करती-यह संबंधित विभागों के सत्यापन और निगम आयुक्त से चर्चा के बाद होता है। हालांकि, लोकायुक्त ने उन्हें नामजद आरोपी बनाया है। अभी उनसे पूछताछ नहीं हो सकी है, लेकिन जल्द नोटिस जारी कर तलब किया जाएगा।
जांच की प्रगति
जब्त हार्ड डिस्क और सर्वर डेटा का एनालिसिस चल रहा है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही गिरफ्तारियां होंगी। डेटा मिलान से अन्य बड़े अधिकारी, लेखा शाखा कर्मचारी और बाहरी वेंडर भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। घोटाले की राशि करोड़ों में होने की आशंका है।
आम नागरिकों पर असर
भोपाल नगर निगम में सड़कें टूटी हुई हैं, सफाई व्यवस्था जर्जर है, लेकिन करोड़ों के फर्जी बिल पास हो रहे हैं। यह आम टैक्सपेयर्स के पैसे की लूट है। नागरिकों का कहना है कि जांच से सच्चाई सामने आए और दोषियों को सजा मिले।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
भाजपा ने लोकायुक्त की कार्रवाई को सराहा है, जबकि कांग्रेस ने कहा है कि यह घोटाला सालों से चल रहा था और भाजपा शासित निगम में ही संभव हुआ। लोकायुक्त की यह जांच भोपाल नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। डेटा एनालिसिस के नतीजे आने पर और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल जांच जारी है और टीम रात-दिन काम कर रही है।












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