जब कांग्रेस ने इंदिरा गांधी को ही कर दिया था पार्टी से बाहर..., जानें स्थापना से लेकर पार्टी का अब तक का सफर
कांग्रेस आज अपना 139वां स्थापना दिवस मना रही है। 1885 में बनी यह पार्टी आज भले ही विपक्ष में है, लेकिन कभी इसका पूरे देश में एकछत्र राज हुआ करता था। कांग्रेस के स्थापना दिवस के मौके पर आइए जानते हैं पार्टी के अबतक के सफर के बारे में।
कब और कैसे हुई कांग्रेस की स्थापना?
जैसा की आप जानते हैं कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी। आज ही के दिन 139 साल पहले थियिसोफिकल सोसायटी के प्रमुख सदस्य रहे एओ ह्यूम की पहल पर बम्बई (अब मुंबई) के गोकुलदास संस्कृत कॉलेज मैदान में देशभर के विभिन्न प्रांतो के राजनीतिक और सामाजिक विचारधारा के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए थे। यह राजनीतिक एकता एक संगठन में तब्दील हुई और उस संगठन का नाम रखा गया 'कांग्रेस'।

पार्टी के गठन के बाद एओ ह्यूम इसके संस्थापक महासचिव बने और वोमेश चंद्र बनर्जी को पार्टी का पहला अध्यक्ष नियुक्त गया। पार्टी में उस वक्त इन दोनों के अलावा 71 सदस्य और थे।
कब किसके पास रही कांग्रेस की कमान?
139 सालों में कांग्रेस को 56 अध्यक्ष मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा, 45 सालों तक कांग्रेस की कमान गांधी परिवार के पास रही। साल 1885 से लेकर 1919 तक कांग्रेस पार्टी में नेहरु-गांधी परिवार का ज्यादा दखल नहीं था।
साल 1919 में कांग्रेस पार्टी के अमृतसर अधिवेशन में मोती लाल नेहरु को इसका नया अध्यक्ष चुना गया। 1928 में उन्हें कलकत्ता के अधिवेशन में एक बार फिर से अध्यक्ष चुना गया। इसके अगले ही साल कांग्रेस की कमान मोती लाल नेहरु के बेटे पं. जवाहर लाल नेहरू को दी गई। दो सालों के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया।
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1936 और 1937 में जवाहर लाल नेहरु फिर से अध्यक्ष बने। देश की आजादी के बाद 1951 में फिर से कांग्रेस की कमान पं.जवाहर लाल नेहरु को सौंपी गई। 1951 में कांग्रेस की कमान मिलने के बाद वो लगातार 4 साल तक अध्यक्ष के पद पर रहे।
पार्टी में कैसे बढ़ा गांधी परिवार का दखल?
1959 में पं.जवाहरलाल नेहरू की इकलौती बेटी इंदिरा की इंट्री हुई और वो कांग्रेस की अध्यक्ष बनी। अगले साल यानी कि 1960 में कांग्रेस की कमान इंदिरा के हाथों से नीलम संजीवा रेड्डी के पास चली गई। 1978 से 1983 तक फिर से इंदिरा गांधी पार्टी की अध्यक्ष रहीं।
इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी ने 1985 में कांग्रेस की कमान संभाली और 6 साल तक अध्यक्ष की कुर्सी पर बने रहे। 1998 में सोनिया गांधी को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। 1998 से 2017 तक वो पार्टी की टॉप लीडर रहीं। वो 19 साल तक पार्टी की अध्यक्ष बनी रहीं।
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2017 में उनके बेटे राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपी गई। हालांकि, कई राज्यों के चुनावों में मिली हार के बाद राहुल ने 2019 में अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ दी। जिसके बाद एक बार फिर सोनिया पार्टी की अध्यक्ष बनी। अक्टूबर 2022 तक वो पार्टी की कमान संभालती रहीं। जिसके बाद मलिकार्जुन खड़गे को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया। वर्तमान में खड़गे पार्टी की कमान संभाल रहे हैं।
जब कांग्रेस ने इंदिरा को ही दिखा दिया था पार्टी से बाहर का रस्ता
एक समय ऐसा भी आया था जब कांग्रेस पार्टी ने अपनी एक कद्दावर नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पार्टी से बेदखल कर दिया था। ये किस्सा है 12 नवंबर 1969 का। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने इंदिरा गांधी पर अनुशासन भंग करने का आरोप लगाकर उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। तब इंदिरा गांधी ने एक नई कांग्रेस खड़ी कर ली थी जिसका नाम 'कांग्रेस आर' रखा गया था।
बताया जाता है कि 1969 में इंदिरा को पार्टी से बेदखल करने वाले वही लोग थे जिन्होंने 1966 में उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाया था। उस वक्त इंदिरा गांधी के पास अनुभव और संगठन की समझ कम थी।
उन्हें "गूंगी गुड़िया" भी कहा जाता था। उनके ऊपर पार्टी के दिग्गज नेताओं का दवाब था चुकी इंदिरा अपने पिता के स्थान पर पीएम की कुर्सी पर बैठी थी। लेकिन सभी को गलत साबित करते हुए इंदिरा के नेतृत्व में कांग्रेस में 1967 लोकसभा चुनाव में जनमत हासिल किया। उन्होंने अकेले दम पर मजबूती से चुनाव जीता और सभी का मुंह बंद करा दिया। सरकार चलाने के साथ ही वह एक मजबूत राजनीतिज्ञ के रूप में उभरीं।
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कांग्रेस से आग होकर 64 बार राजनेताओं ने बनाई अपनी अलग पार्टी
अपने 139 साल के सफर के दौरान कांग्रेस को कई बार बड़े झटके भी सहने पड़े। ये झटके उसे अपने ही नेताओं से मिले। 1885 में पार्टी की स्थापना के बाद से अब तक कांग्रेस ने 64 ऐसे बड़े मौके देखे, जब कांग्रेस नेताओं ने पार्टी छोड़ने के बाद अपनी नई पार्टी बना ली।
ममता और शरद पवार ने छोड़ी पार्टी
पश्चिम बंगाल की सीएम और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी 1998 में कांग्रेस से अलग हुईं और अपनी अलग पार्टी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का गठन किया। इसके अगले साल 1999 में शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने पार्टी को अलविदा कह कर नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी बना ली।
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