कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में जाने के बाद सस्पेंड हुईं टीचर सुलेखा दलाल कौन? अब छलका दर्द, क्या है आरोप

Teacher Sulekha Dalal (CJP Protest): दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल होना हरियाणा की एक गेस्ट टीचर के लिए इतना भारी पड़ जाएगा, शायद उन्होंने खुद भी इसकी कल्पना नहीं की होगी। रोहतक के सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली सुलेखा दलाल इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सुलेखा दलाल को सरकारी नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया है। सुलेखा दलाल का दावा है कि उनको सस्पेंड कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल होने के बाद किया गया है।

सुलेखा दलाल का दावा है कि वह किसी राजनीतिक एजेंडे या पार्टी का समर्थन करने नहीं गई थीं। उनका कहना है कि वह एक मां के रूप में अपने बेटे और लाखों युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित थीं। लेकिन प्रदर्शन में शामिल होने के कुछ दिन बाद ही उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।

who is Teacher Sulekha Dalal CJP Protest

सस्पेंशन की खबर सुनते ही सुलेखा दलाल का दर्द छलक पड़ा है। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए कहा कि व अपने होनहार बेटे और देश के लाखों युवाओं के अंधकार में डूबते भविष्य को बचाने के लिए एक मां के रूप में गई थीं। अब यह मामला सिर्फ एक शिक्षक के निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, युवाओं के रोजगार और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका पर भी बहस छिड़ गई है।

कौन हैं सुलेखा दलाल? क्या है इनके निलंबन की पूरी इनसाइड स्टोरी? (Who Is Sulekha Dalal)

सुलेखा दलाल मूल रूप से हरियाणा के बहादुरगढ़ की रहने वाली हैं। वे साल 2007 से यानी पिछले लगभग 19 सालों से रोहतक की रेनकपुरा कॉलोनी में स्थित 'गवर्नमेंट मिडिल स्कूल' में जेबीटी (JBT) प्राइमरी गेस्ट टीचर के पद पर अपनी सेवाएं दे रही थीं।

इस पूरे विवाद की शुरुआत 6 जून 2026 को हुई, जब वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल होने आई थीं। इसके ठीक चार दिन बाद यानी 10 जून 2026 की शाम को जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (DEEO) के दफ्तर से उनके पास फोन आया और उन्हें बताया गया कि उन्हें नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया है।

सुलेखा ने आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग ने उन्हें सस्पेंशन का लेटर तो थमा दिया, लेकिन उस आदेश पत्र में इस बात का कोई स्पष्ट और ठोस कारण नहीं लिखा गया है कि आखिर उन्हें किस जुर्म की सजा दी जा रही है। बिना कोई कारण बताए या बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए इस तरह की एकतरफा कार्रवाई करना पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है।

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'75 नंबर लाने के बाद भी बेटा डिप्रेशन में है'-सुलेखा दलाल ने बताई अपने बेटे की सच्चाई

हरियाणा तक को दिए इंटरव्यू में सुलेखा दलाल ने बताया कि जब वे दिल्ली के इस प्रदर्शन में शामिल होने गई थीं, तो उन्हें बिल्कुल भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह मामला इतना बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लेगा। उन्होंने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनका 21 साल का बेटा बेहद होनहार छात्र है, जो दिन-रात सिर्फ अपनी पढ़ाई में लगा रहता था।

उनके बेटे ने दिल्ली पुलिस हेड कांस्टेबल की भर्ती परीक्षा दी थी, जिसमें उसने 100 में से 75 अंक हासिल किए थे। इतने बेहतरीन नंबर आने के बाद भी उसका चयन नहीं हो सका क्योंकि उस परीक्षा की फाइनल कट-ऑफ लिस्ट 82 नंबर पर जाकर रुक गई। सुलेखा का सीधा आरोप है कि देश में नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं से लेकर कांस्टेबल भर्ती तक में जो लगातार धांधली, भ्रष्टाचार और पेपर लीक हो रहे हैं, उसी वजह से योग्य और गरीब बच्चों का हक मारा जा रहा है।

परीक्षा रद्द होने और नौकरी न मिलने के कारण उनका बेटा इस समय गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहा है। एक मां होने के नाते अपने बच्चे को इस हाल में देखकर वे खुद को रोक नहीं पाईं और जंतर-मंतर पर चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में अपनी बात रखने पहुंच गईं।

सुलेखा दलाल का कहना है कि सरकार या विभाग को पहले उन्हें सस्पेंड करने का लिखित कारण बताना चाहिए। बिना कारण बताए कार्रवाई करना पूरी तरह गलत है। वह शिक्षा विभाग को नहीं छोड़ना चाहतीं क्योंकि यह उनका कर्म और धर्म है।

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क्या राजनीति में आएंगी सुलेखा दलाल?

सुलेखा दलाल पर इस प्रदर्शन में जाने के बाद कई तरह के राजनीतिक आरोप भी लगाए जा रहे हैं। जब मीडिया ने उनसे राजनीति में कदम रखने या किसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने इसका बहुत ही साफ और कड़ा जवाब दिया।

सुलेखा दलाल ने अपने परिवार और भविष्य की रणनीति को लेकर कहा कि उनकी पिछली सात पीढ़ियों में कोई भी व्यक्ति दूर-दूर तक राजनीति में नहीं रहा है, उनके परिवार के लगभग सभी लोग सम्मान के साथ सरकारी नौकरियों में देश की सेवा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ने का या चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है, वे भविष्य में क्या होगा इसका फैसला वक्त पर छोड़ती हैं। सुलेखा ने यह भी कहा कि वे शिक्षा विभाग को छोड़ना नहीं चाहती हैं, क्योंकि बच्चों को पढ़ाना ही उनका असली कर्म और सच्चा धर्म है।

इस कार्रवाई के बाद से वे और उनका बेटा मानसिक रूप से काफी परेशान हैं, इसलिए उन्होंने अभी आगे की कोई रणनीति तय नहीं की है। वे जल्द ही 'सर्व कर्मचारी संघ' (शिक्षकों की यूनियन) और आम जनता के सहयोग से अपने अगले कानूनी कदम का फैसला करेंगी।

विपक्षी नेताओं के फोन कॉल्स पर क्या बोलीं सुलेखा?

नौकरी से निकाले जाने की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और अखबारों में हेडलाइन बनी, देश के कई विपक्षी दलों के नेताओं और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सुलेखा से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। सुलेखा ने बताया कि उन्हें हर तरफ से भारी जनसमर्थन और हिम्मत मिल रही है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि अगर देश का युवा अपने हक और रोजगार के लिए कल को सड़कों पर उतरता है, तो वे तन, मन और धन से हमेशा उनके साथ खड़ी रहेंगी।

'कॉकरोच जनता पार्टी' ने सस्पेंड टीचर सुलेखा पर क्या कहा?

इस पूरे प्रदर्शन का आयोजन करने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर हरियाणा की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने अपने बयान में कहा,

"हरियाणा सरकार द्वारा एक शिक्षिका सुलेखा दलाल को सिर्फ इसलिए सस्पेंड कर देना क्योंकि उन्होंने युवाओं के रोजगार के लिए आवाज उठाई थी, देश के प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों पर एक सीधा हमला है। हमारा संविधान हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने, सरकार से सवाल पूछने और असहमति जताने की पूरी आजादी देता है। किसी भी मां या शिक्षिका को उसकी रोजी-रोटी और उसकी अंतरात्मा के बीच में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। सरकार इतनी असुरक्षित हो चुकी है कि वह शांतिपूर्ण भागीदारी को भी अपराध मान रही है। हम मांग करते हैं कि हरियाणा सरकार बिना किसी देरी के सुलेखा दलाल का निलंबन तुरंत वापस ले।"

पार्टी ने आगे कहा कि एक शिक्षिका को नौकरी से सस्पेंड करके सरकार देश के करोड़ों बेरोजगार युवाओं के उन तीखे सवालों को सस्पेंड नहीं कर सकती, जो वे हर दिन पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर शासन से पूछ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि चारों तरफ से घिरने के बाद क्या हरियाणा का शिक्षा विभाग इस बेबस मां का सस्पेंशन वापस लेता है या यह लड़ाई कोर्ट की चौखट तक जाती है।

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