अब नहीं चलेगी कोचिंग सेंटर्स की मनमानी! दिल्ली सरकार ला रही बड़ा कानून, फीस से सेफ्टी तक सब पर होगी नजर
Delhi Coaching Centers: दिल्ली में पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हर साल देशभर से लाखों छात्र पहुंचते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग संस्थानों की फीस, सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब दिल्ली सरकार इन समस्याओं पर लगाम लगाने की तैयारी में है। राजधानी में चल रहे कोचिंग सेंटर्स के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत नए नियम और दिशानिर्देश लागू किए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि इसका मकसद कोचिंग संस्थानों को बंद करना नहीं, बल्कि छात्रों के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह माहौल सुनिश्चित करना है। यही वजह है कि अब कोचिंग सेक्टर को व्यवस्थित करने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

आखिर क्या बदलने जा रही है दिल्ली सरकार?
दिल्ली सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए नई नीति का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो विभिन्न विभागों और एजेंसियों के साथ मिलकर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करेंगे।
शिक्षा और शहरी विकास मंत्री आशीष सूद का कहना है कि सरकार इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से देख रही है। चूंकि देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली आते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उनका दावा है कि दिल्ली इस क्षेत्र में व्यापक नियम लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकती है।
दिल्ली कोचिंग को लेकर हाई लेवल मीटिंग में क्या हुआ फैसला?
इस दिशा में आगे बढ़ते हुए गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नगर निगम, दिल्ली फायर सर्विस, उच्च शिक्षा निदेशालय, दिल्ली पुलिस, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में तय किया गया कि एक मल्टी-डिसिप्लिनरी कमिटी बनाई जाएगी, जो कोचिंग संस्थानों के लिए विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करेगी। यह कमिटी सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि छात्रों और कर्मचारियों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी सुझाव देगी।
नए नियमों में किन बातों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस?
सरकार जिन नियमों पर काम कर रही है, उनमें कई अहम मुद्दे शामिल हैं। प्रस्तावित ढांचे के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
• फीस स्ट्रक्चर में पारदर्शिता
• छात्रों की सुरक्षा और वेलफेयर
• मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग सिस्टम
• भवन और बुनियादी ढांचे के सुरक्षा मानक
• फायर सेफ्टी और आपातकालीन तैयारियां
• शिक्षकों और कर्मचारियों के कार्यस्थल की परिस्थितियां
• शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal System)
• नियमित निरीक्षण और नियमों के पालन की निगरानी
सरकार का मानना है कि इन प्रावधानों से कोचिंग सेक्टर में जवाबदेही बढ़ेगी और छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।
आखिर नियमों की जरूरत क्यों पड़ी?
कोचिंग संस्थानों के लिए सख्त नियमों की मांग अचानक नहीं उठी है। इसके पीछे पिछले साल हुई एक दर्दनाक घटना भी बड़ी वजह मानी जा रही है। साल 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर जाने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
घटना के बाद कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, ड्रेनेज सिस्टम, अवैध निर्माण, बिजली के तारों के जाल और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल उठे थे। उस समय यह भी चर्चा में आया था कि कई कोचिंग संस्थान क्षमता से अधिक छात्रों को बैठा रहे हैं और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके बाद मामले ने कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर रूप लिया।
दिल्ली के कोचिंग सेक्टर पर क्या होगा असर?
दिल्ली में करीब 600 पंजीकृत कोचिंग संस्थान व्यावसायिक रूप से संचालित होते हैं। इसके अलावा छोटे और मध्यम स्तर के कोचिंग सेंटर्स की संख्या भी काफी बड़ी है। ऐसे में नया कानून और नियामक ढांचा पूरे कोचिंग सेक्टर के कामकाज को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित नियम प्रभावी ढंग से लागू किए गए, तो छात्रों की सुरक्षा बेहतर होगी, फीस को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और कोचिंग संस्थानों को भी जवाबदेह बनाया जा सकेगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली सरकार इस प्रस्तावित व्यवस्था को किस रूप में लागू करती है और यह देश के अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन पाती है या नहीं।












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