Pakistan Budget 2026: फौज की बल्ले-बल्ले, जनता को लगाया चूना, पाक के डिफेंस बजट में क्या निकला?

Pakistan Budget 2026: एक तरफ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण, टेक्नोलॉजी तथा रक्षा आधुनिकीकरण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान आज भी विदेशी कर्ज, IMF की शर्तों और आर्थिक अस्थिरता के दुष्चक्र में फंसा हुआ है। ऐसे हालात में पाकिस्तान सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 18.77 लाख करोड़ रुपये (67.49 अरब डॉलर) का बजट पेश किया है।

भारत के डर से बढ़ाया डिफेंस बजट?

सबसे बड़ा फैसला रक्षा बजट को लेकर लिया गया है। पाकिस्तान ने अपने सैन्य खर्च में लगभग 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। पिछले वित्त वर्ष में रक्षा बजट 2.55 लाख करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 3 लाख करोड़ रुपये (10.79 अरब डॉलर) कर दिया गया है। भारत का बजट साल 2018 में 3 लाख करोड़ रुपए के आसपास था। जो पाकिस्तान के अभी के 3 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा था। गौर करने वाली बात है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है और आम जनता महंगाई तथा बेरोजगारी से परेशान है।

Pakistan Budget 2026

भारत के साथ तनाव बना डिफेंस बजट बढ़ाने की वजह

रक्षा बजट बढ़ाने के पीछे पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा चुनौतियों को प्रमुख कारण बताया है। खासकर, से पिछले साल भारत के साथ हुए सैन्य तनाव और "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान सामने आई चुनौतियों ने पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों पर सवाल खड़े किए थे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि उसी झड़प के बाद पाकिस्तान अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक्स्ट्रा खर्च कर रहा है।

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जनता के पास नहीं आटा-दाल, सेना को भरपूर गोला-बारूद

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान इस समय भारी आर्थिक बदहाली से गुजर रहा है। देश लगातार विदेशी कर्ज पर निर्भर है, विदेशी मुद्रा भंडार सीमित है और IMF के सहारे अर्थव्यवस्था चल रही है। इसके बावजूद सरकार ने विकास योजनाओं की तुलना में सेना को ज्यादा महत्व दिया है। यह पाकिस्तान की पुरानी नीति रही है, जहां आर्थिक दबाव के बावजूद रक्षा खर्च को कभी कम नहीं किया जाता।

जनता और व्यापारियों पर टैक्स लगाने की तैयारी

नए बजट में पाकिस्तान सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का लक्ष्य रखा है। साथ ही महंगाई दर को 8.2 प्रतिशत तक सीमित रखने की योजना बनाई गई है। हालांकि आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इन दोनों लक्ष्यों को हासिल करना बेहद कठिन होगा। पाक सरकार का लक्ष्य 20.60 लाख करोड़ रुपये जुटाने का पाकिस्तान ने अगले वित्त वर्ष में 20.60 लाख करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का टारगेट सेट किया है। हालांकि पिछले कई सालों से पाक सरकार अपने टारगेट से काफी पीछे अपने साल का दि एंड करती है। बावजूद इसके, आने वाले महीनों में आम लोगों और कारोबारियों पर टैक्स का दबाव और बढ़ सकता है।

घाटा कम करने की कोशिश, लेकिन चुनौतियां बरकरार

सरकार ने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 3.6 प्रतिशत तक सीमित रखने की कोशिश की जाएगी। लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी पाकिस्तान के लिए नई मुश्किल बन सकती है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के ऊंचे बने रहने से अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे पर जीडीपी का अतिरिक्त 0.8 प्रतिशत बोझ पड़ सकता है। यानी तेल की कीमतें बढ़ीं तो पाकिस्तान की आर्थिक गणित और बिगड़ सकती है।

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सेना के लिए पैसा, विकास योजनाओं पर कैंची

बजट के सबसे विवादित पहलुओं में से एक विकास योजनाओं में कटौती है। रक्षा खर्च बढ़ाने और IMF की शर्तें पूरी करने के लिए सरकार ने कई सामाजिक और विकास परियोजनाओं के बजट में कमी की है। इसका असर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर पड़ सकता है।

IMF की शर्तों ने बढ़ाई मुश्किल

पाकिस्तान को IMF से अगली वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए कई कड़े आर्थिक कदम उठाने पड़ रहे हैं। सरकार को एक तरफ अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं की शर्तें माननी हैं और दूसरी तरफ देश के भीतर बढ़ते जन असंतोष को भी संभालना है। ऐसे में विकास परियोजनाओं में कटौती करना सरकार की मजबूरी बन गया है।

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर भी दबाव

विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित संसाधनों और भारी विदेशी कर्ज के कारण पाकिस्तान के लिए स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश करना मुश्किल होता जा रहा है। अगर यही स्थिति जारी रही तो आम लोगों की बुनियादी सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है।

रक्षा बनाम विकास की बहस फिर तेज

कई आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बजट पाकिस्तान की प्राथमिकताओं को साफ दिखाता है। एक तरफ देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य तैयारियों पर लगातार ज्यादा खर्च किया जा रहा है। जिस देश का आम नागरिक महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा हो, वहां विकास बजट कम करके रक्षा बजट बढ़ाना लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकता है।

गरीब जनता पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

सरकारी खर्च के इस असमान वितरण का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ सकता है। विकास परियोजनाओं में कमी, संभावित टैक्स बढ़ोतरी और सीमित सामाजिक सहायता का बोझ अंततः आम लोगों को ही उठाना होगा। यानी सेना को ज्यादा संसाधन मिलने का सीधा असर जनता की जेब पर पड़ सकता है।

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पाकिस्तान के सामने कठिन भविष्य

वित्त वर्ष 2026-27 का यह बजट पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों की पूरी तस्वीर पेश करता है। एक तरफ IMF की कड़ी शर्तें हैं, दूसरी तरफ बढ़ता कर्ज और कमजोर अर्थव्यवस्था। ऐसे माहौल में सेना को प्राथमिकता देने की नीति देश को आर्थिक रूप से कितना फायदा या नुकसान पहुंचाएगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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