Prateek Yadav की मौत के 30 दिन बाद, बेटी Prathama Yadav कर रही पिता का सपना साकार, VIDEO में कही दिल की बात
Prateek Yadav Daughter Prathama Yadav Video Viral: 13 मई 2026 को मात्र 38 वर्ष की उम्र में अचानक दुनिया छोड़ गए प्रतीक यादव की विरासत को उनकी बड़ी बेटी प्रथमा यादव आगे बढ़ा रही हैं। पिता की मौत के ठीक 30 दिन बाद प्रथमा का भावुक वीडियो सामने आया। उसमें प्रथमा ने बताया कि जीवाश्रय परिवार अब एक लाख लोगों तक पहुंच चुका है। लखनऊ में जीवाश्रय टीम के साथ केक काटकर इस उपलब्धि को सेलिब्रेट किया गया। यह क्षण सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि एक पिता की अटूट इच्छाशक्ति और बेटी के संकल्प की कहानी है।
प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के छोटे पुत्र, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के सौतेले भाई और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति थे। वे कारोबारी और फिटनेस प्रेमी के रूप में जाने जाते थे, लेकिन उनकी असली पहचान पशु-प्रेम और आवारा-घायल जानवरों की सेवा थी। उन्होंने ही जीवाश्रय फाउंडेशन की नींव रखी, जो आज लखनऊ में सैकड़ों जानवरों का सहारा बन चुका है। आइए जानते हैं कि पिता की आखिरी ख्वाहिश को बेटी कैसे पूरा कर रही...

Prathama Yadav Emotional VIDEO: भावुक संदेश में कहा- 'पापा, आपका अधूरा सपना पूरा करूंगी'
वीडियो में प्रथमा यादव साफ-साफ दिख रही हैं। बैकग्राउंड में जीवाश्रय के इंस्टाग्राम पेज और प्रतीक यादव का डॉग्स के साथ मस्ती करते तस्वीरें चल रही हैं। प्रथमा कहती हैं- 'आज हमारे लिए खुशी का दिन है। जीवाश्रय परिवार के साथ एक लाख लोग जुड़ चुके हैं। मेरे पिता की सोच और सपनों के साथ आज एक लाख लोगों का परिवार बन गया है। आप लोग जितना और साथ देंगे, मैं और अच्छा काम कर पाऊंगी। जीवाश्रय को आगे बढ़ा पाऊंगी। मैं आशा करती हूं कि हमारा यह परिवार आगे बढ़ता रहे। धन्यवाद।'

इस मौके पर प्रथमा ने लखनऊ की जीवाश्रय टीम के साथ केक काटा। इससे पहले, चौथे बड़े मंगल के दिन, 108वें मंगल भंडारे में उन्होंने न सिर्फ लोगों बल्कि जानवरों को भी भंडारा कराया। साथ ही लखनऊवासियों से अपील की- 'कहीं भी कोई जानवर मुसीबत में हो, बीमार हो या घायल, तुरंत जीवाश्रय से संपर्क करें।'

What Is Jeevashraya: जीवाश्रय क्या है? प्रतीक यादव की विरासत
जीवाश्रय (Jeevashraya) एक पशु कल्याण पहल है, जिसकी शुरुआत प्रतीक यादव ने की। इसका मकसद आवारा, घायल, बीमार और लावारिस जानवरों (खासकर कुत्तों, गायों और अन्य पशुओं) का रेस्क्यू, इलाज, देखभाल और पुनर्वास करना है। प्रतीक अक्सर खुद घायल कुत्तों को सड़क से उठाते, वेटरनरी अस्पताल ले जाते और उनके इलाज का खर्च उठाते थे। उनके सोशल मीडिया पर पशुओं की मदद के वीडियो और फोटो भरपूर थे। वे कहते थे कि बेजुबान प्राणियों की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। जीवाश्रय फाउंडेशन के जरिए उन्होंने एक टीम तैयार की, जो 24x7 कॉल्स पर रेस्पॉन्स देती है।
पिछले सालों में फाउंडेशन ने हजारों जानवरों का इलाज किया, कई को गोद लिया गया और कुछ को स्थायी आश्रय दिया। अपर्णा यादव (जो उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष भी हैं) ने भी कई मौकों पर फाउंडेशन को समर्थन दिया।

Prateek Yadav Death Reason: प्रतीक यादव की मौत, कैसे हुई? क्या थी वजह?
13 मई 2026 को प्रतीक यादव को लखनऊ के सिविल अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) के अनुसार, मौत का कारण Massive Pulmonary Thromboembolism था। इसमें फेफड़ों की धमनियों में बड़ा ब्लड क्लॉट (रक्त का थक्का) बन जाता है, जिससे हृदय और श्वसन तंत्र अचानक फेल हो जाता है। इसे Cardiorespiratory Collapse कहते हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रतीक पहले से कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। अप्रैल 2026 में सांस की तकलीफ के कारण वे अस्पताल भर्ती भी हुए थे। उनकी मौत ने पूरे उत्तर प्रदेश में शोक की लहर पैदा कर दी। परिवार, राजनीतिक हलकों और पशु प्रेमियों ने गहरा दुख व्यक्त किया।
Who Is Prathama Yadav: प्रथमा यादव कौन हैं?
प्रथमा यादव, प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की बड़ी बेटी हैं। उनका जन्म 20 मार्च 2014 को लखनऊ के एक निजी अस्पताल में हुआ था। उनकी एक छोटी बहन भी हैं, जिनका नाम प्रतीक्षा यादव है। साल 2015 में जब प्रथमा का पहला जन्मदिन मनाया गया था, तब यह समारोह काफी चर्चा में रहा था और इसमें परिवार के कई प्रमुख सदस्य शामिल हुए थे। वर्ष 2026 के हिसाब से प्रथमा की उम्र करीब 12 साल है।
प्रथमा को अपने पिता की तरह फिटनेस में खास दिलचस्पी है। प्रतीक यादव अक्सर सोशल मीडिया पर उनके वर्कआउट और एक्सरसाइज से जुड़े वीडियो शेयर करते थे। फरवरी 2025 में शेयर किए गए एक वीडियो में प्रथमा 50 किलो वजन के साथ एक्सरसाइज करती नजर आई थीं, जिसने लोगों का ध्यान खींचा था। इससे साफ है कि कम उम्र में ही उन्होंने फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है।
फिटनेस के अलावा प्रथमा को संगीत से भी बेहद लगाव है। वे अभी पढ़ाई कर रही हैं और संगीत में खास रुचि रखती हैं। पियानो बजाना उन्हें बहुत पसंद है। प्रतीक के जन्मदिन पर अपर्णा यादव ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें प्रथमा पियानो पर 'Happy Birthday' बजा रही थीं।
पिता की मौत के बाद प्रथमा ने चुपचाप जिम्मेदारी संभाल ली। वो टूटी नहीं, खुद को मजबूत रखा। वे नियमित रूप से जीवाश्रय की गतिविधियों में शामिल हो रही हैं। 108वें भंडारे और एक लाख सदस्यों का माइलस्टोन उनके लिए पिता को श्रद्धांजलि देने का माध्यम बना। इस उम्र में एक बच्चे के लिए पिता को खोना और उनकी विरासत संभालना आसान नहीं होता। प्रथमा का यह कदम परिपक्वता और संवेदनशीलता दोनों को दर्शाता है।
पशु कल्याण की चुनौतियां और जीवाश्रय की भूमिका को समझें...
भारत में आवारा पशु समस्या गंभीर है। लखनऊ जैसे शहरों में सड़कों पर घायल कुत्ते, बीमार गायें और अन्य जानवर अक्सर मदद के लिए तरसते हैं। जीवाश्रय जैसी पहलें इस कमी को पूरा करती हैं।
- फाउंडेशन न सिर्फ रेस्क्यू करता है बल्कि:
- वेटरनरी इलाज उपलब्ध कराता है
- दवा और भोजन मुहैया कराता है
- गोद लेने (adoption) की सुविधा देता है
- जागरूकता अभियान चलाता है
प्रतीक के निधन के बाद कई लोगों ने चिंता जताई थी कि फाउंडेशन का क्या होगा। लेकिन प्रथमा, अपर्णा यादव और समर्पित टीम ने इसे न सिर्फ बचाया बल्कि आगे बढ़ाया। एक लाख सदस्यों का परिवार बनना इसकी लोकप्रियता और विश्वसनीयता का प्रमाण है।
परिवार का राजनीतिक बैकग्राउंड
प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहे, लेकिन उनका परिवार राजनीति का केंद्र रहा। पिता मुलायम सिंह यादव, भाई अखिलेश यादव और पत्नी अपर्णा यादव (भाजपा)। अलग-अलग दलों में होने के बावजूद परिवार में एकता दिखी। प्रतीक की मौत पर अखिलेश यादव ने भी दुख व्यक्त किया था।
अपर्णा यादव ने पशु कल्याण में पहले भी योगदान दिया है। पुरानी खबरों में जीवाश्रय को सरकारी मदद मिलने के मामले भी चर्चा में आए थे, जो दर्शाता है कि फाउंडेशन लंबे समय से सक्रिय था।
विरासत जीवित है
प्रतीक यादव चले गए, लेकिन उनकी सोच जिंदा है। प्रथमा यादव ने साबित किया कि उम्र मायने नहीं रखती, संकल्प रखता है। 30 दिन पहले जो शोक था, आज वह संकल्प में बदल गया है।
लखनऊ के सड़कों पर घूमते हर घायल कुत्ते की कहानी अब प्रतीक यादव की याद दिलाएगी और प्रथमा के संकल्प को मजबूत करेगी। जीवाश्रय न सिर्फ पशुओं का आश्रय है, बल्कि एक पिता-बेटी के रिश्ते की अमर कहानी भी है।













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