Balochistan Poverty: दो में से एक को मिल रह रोटी, भुखमरी से जूझ रहा पाक का ये राज्य, भेदभाव कर रहे शहबाज?

Balochistan Poverty: पाकिस्तान के आर्थिक सर्वे 2025-26 ने बलूचिस्तान की जमीनी सच्चाई को एक बार फिर सामने ला दिया है। सर्वे के मुताबिक, बलूचिस्तान की लगभग आधी आबादी आज भी भीषण गरीबी में जीवन जीने को मजबूर है। इतनी गरीबी की दो में से सिर्फ एक को ही खाना मिल पा रहा है। इन आंकड़ों ने पाकिस्तान में संसाधनों के असमान वितरण और विकास की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरे पाकिस्तान में इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद बलूचिस्तान विकास की दौड़ में इतना पीछे क्यों है।

गरीबी में जी रहे बलूची

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और बलूचिस्तान पोस्ट के पाकिस्तान, बलूचिस्तान और पाकिस्तान के दूसरे प्रांतों के बीच विकास का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां के लोगों को आज भी रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक भेदबाव, न के बराबर इन्फ्रास्ट्रक्चर, मिनिमम इन्वेस्टमेंट और व्यापारिक प्रतिबंधों ने क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर बना दिया है। यही वजह है कि विकास की रफ्तार बाकी प्रांतों की तुलना में बेहद कम रही है।

Balochistan Poverty

आधा बलूचिस्तान सो रहा भूखा

आर्थिक सर्वे में औसत गरीबी दर 28.9 प्रतिशत है। लेकिन बलूचिस्तान में यह आंकड़ा बढ़कर 47 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि बलूचिस्तान का लगभग हर दूसरा व्यक्ति गरीबी रेखा के आसपास या उससे नीचे जीवन जी रहा है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि बलूचिस्तान की आर्थिक स्थिति राष्ट्रीय औसत से काफी खराब है।

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सालों के भेदभाव ने किया गरीब

आर्थिक जानकारों का मानना है कि बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति अचानक पैदा नहीं हुई है। इसके पीछे कई सालों से चले आ रहे प्रशासनिक भेदभाव और कमजोर विकास नीतियां जिम्मेदार हैं। प्रांत में बुनियादी ढांचे का विकास अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ। उद्योगों की संख्या बेहद कम रही और बड़े निवेश भी नहीं आए। इसका सीधा असर रोजगार के अवसरों पर पड़ा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियां पैदा नहीं हो सकीं।

बेरोजगारी ने युवाओं को निराश किया

बलूचिस्तान में बढ़ती बेरोजगारी अब सामाजिक संकट का रूप लेती जा रही है। हाल ही में प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध जिले डेरा बुगती में एक युवक ने बेरोजगारी से परेशान होकर आत्महत्या का प्रयास किया। वहीं बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में एक विश्वविद्यालय स्नातक ने नौकरी न मिलने के विरोध में सार्वजनिक रूप से अपनी मूल शैक्षणिक डिग्रियों को आग लगा दी। ये घटनाएं बताती हैं कि बलूचियों में पाकिस्तान को लेकर कितना गुस्सा भरा है।

पढ़ाई के बाद भी नहीं मिल रही नौकरी

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बलूचिस्तान के हजारों युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा। शिक्षित युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उनके लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं हैं। इससे मानसिक तनाव, निराशा और भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है।

ईरान-अफगानिस्तान से व्यापार बंद, परिवारों पर असर

बलूचिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से ईरान और अफगानिस्तान के साथ होने वाले सीमा पार व्यापार पर भी निर्भर रही है। लेकिन हाल के सालों में लगाए गए प्रतिबंधों के कारण यह व्यापार काफी प्रभावित हुआ है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों की आय पर सीधा असर पड़ा है। कई परिवारों की रोजी-रोटी का प्रमुख साधन खत्म हो गया है।

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नहीं मिल रहा पीने को साफ पानी

बलूचिस्तान के कई दूरदराज क्षेत्रों में आज भी लोगों को साफ पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। कई गांवों और कस्बों में लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पानी, बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं अभी भी कई इलाकों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। अधिकांश जिलों में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति खराब बताई जाती है। कई बार मरीजों को सामान्य इलाज के लिए भी सैकड़ों किलोमीटर दूर बड़े शहरों तक जाना पड़ता है। इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

शिक्षा भी हुई चौपट

स्वास्थ्य सेवाओं की तरह शिक्षा क्षेत्र भी कई समस्याओं से घिरा हुआ है। कई सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर हालत में हैं। शिक्षण सामग्री और संसाधनों की कमी के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही। इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और बच्चों के भविष्य पर भी असर पड़ रहा है। पूरे पाकिस्तान की तरह बलूचिस्तान भी महंगाई की मार झेल रहा है। खाना और जरूरी सामानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कई गरीब परिवार अब खर्च कम करने के लिए भोजन की मात्रा तक घटाने को मजबूर हैं। बढ़ती महंगाई ने सामाजिक और आर्थिक दबाव को और बढ़ा दिया है।

भरपूर संसाधन, फिर भी गरीब क्यों?

बलूचिस्तान प्राकृतिक गैस, खनिज और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर माना जाता है। किन स्थानीय लोगों का कहना है कि इन संसाधनों का लाभ उन्हें नहीं मिला। वर्षों से संसाधनों का दोहन तो हुआ, लेकिन उससे पैदा होने वाली संपत्ति का असर स्थानीय जीवन स्तर पर नहीं दिखाई दिया। नीय नागरिक संगठन और सामाजिक समूह लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि विकास परियोजनाओं और प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय में बलूचिस्तान को उसका उचित हिस्सा दिया जाए। लेकिन पाकिस्तान सरकार ऐसा जानबूझकर नहीं करती ताकि बलूचियों को दबाए रखा जा सके।

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