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क्‍या अब भारत वाकई में गरीब नहीं रहेगा?

By Aditi Pathak
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Poverty in India
केंद्र सरकार के अधीन योजना आयोग ने गरीबी की परिभाषा बनायी, तो बवाल, नरेंद्र मोदी के गुजरात में गरीबी की परिभाषा तय की गई, तो बवाल, राहुल गांधी ने कहा कि गरीबी तो एक मानसिक अवस्था है तो बवाल... गरीबी पर बवाल तबतक होता रहेगा, जब तक बेरोजगारी है और लोग भूख से मरते रहेंगे। ऐसे में यह सोचना एक सपना जैसा लगता है कि 2035 तक हम गरीब नहीं होंगे। खैर बात 2035 की आयी है तो हम शुरुआत भी उसी तस्वीर से करते हैं, जो बिल गेट्स फाउंडेशन ने प्रस्तुत की है।

सोचने पर ये तस्‍वीर कितनी अच्‍छी लगती है कि दुनिया का हर इंसान, खुश हो, उसे भर पेट भोजन मिले, उसके सिर पर छत हो और उसे भी पढ़ना-लिखना आता हो, कुल मिलाकर कोई भी गरीब न हो। ऐसी ही तस्‍वीर को हाल ही में दुनिया के सबसे धनी व्‍यक्ति बिल गेट्स ने दिखा दिया, बस तरीका अलग था। बिल गेट्स और उनकी पत्‍नी मिलिंडा के द्वारा चलाए जाने वाले फाउंडेशन के वार्षिक पत्र में यह अनुमान व्‍यक्‍त किया गया है कि 2035 तक दुनिया का कोई भी देश गरीब नहीं रह जाएगा।

इस वार्षिक पत्र का शीर्षक ''3 मिथ दैट ब्‍लॉक प्रोग्रेस फॉर द पुअर'' था, जिसमें बिल गेट्स ने 3 ऐसे मिथक पर बात की, जो सारी दुनिया में व्‍याप्‍त हैं और इनसे विकास की दिशा में काफी नुकसान होता है। ये तीनों ही मिथक निम्‍म प्रकार हैं:

1) गरीब देश हमेशा गरीब रहने को अभिशप्‍त है।

2) विदेशी सहायता बेकार है।

3) जिंदगी बचाने से जनसंख्‍या बढ़ेगी।

हालांकि, इन तीनों ही मिथक पर बिल गेट्स ने जमकर चर्चा की और एक प्रबुद्ध वर्ग को भी शामिल किया गया। उनके मुताबिक ये तीनों ही मिथक भविष्‍य की निराशापूर्ण छवि पेश करते है जिसके चलते दुनिया में सुधार होना मुश्किल है, इस गरीब इंसान और ज्‍यादा गरीब होगा और स्थिति बदहाल हो जाएगी।

गरीब देश की परिभाषा: जिन देशों की प्रति व्‍यक्ति सकल राष्‍ट्रीय आय 26 से 27 हजार रूपए होती है, वह गरीब माने जाते हैं। विश्‍व बैंक की 2012 में आई रिपोर्ट के मुताबिक 36 देश गरीबी की सूची में शामिल हैं जिसमें कांगो सबसे टॉप पर है।

भारत का क्‍या होगा?

भारत में दुनिया के 33 फीसदी गरीब रहते है जो रोजाना सौ रूपए से भी कम कमाते है। विश्‍व बैंक के अनुसार, पिछले एक दशक से भारत, इजिप्‍ट, ब्राजील, मैक्सिको आदि देशों में कोई भी क्रांतिकारी विकास नहीं हुआ। ऐसे में बिल गेट्स के इस वार्षिक पत्र संदेह करना गलत नहीं होगा। भारत पर 2012 तक 44,68,614.5 करोड़ का कर्जा था, जिसका ब्‍याज ही लगभग 3,18,756 करोड़ रुपए आता है, जिसे हर साल भारत को चुकाना होता है। ऐसे में भारत की स्थिति में सिर्फ दो दशक बाद इतने सकारात्‍मक परिवर्तन की उम्‍मीद करना मुश्किल होगा, क्‍योंकि भारतीय तंत्र को चलाने वाले लोग देश से ज्‍यादा परिवार का ध्‍यान रखते है, ऐसे में देश की गरीबी को दूर करने का ख्‍याल कम ही लोगों को आता है।

परन्‍तु बिल गेट्स, भारत को लेकर काफी आशान्वित है उनका मानना है कि आने वाले समय में भारत, चीन, ब्राजील और अन्‍य देश अमीरी और गरीबी के बीच की दूरी को कम करके विकास की ओर ज्‍यादा ध्‍यान देगें। वर्तमान गरीब देश अपने सर्वाधिक उत्‍पादक पड़ोसी देश से सीख लेगें, नए टीकों, बेहतर बीजों और डिजिटल क्रांति को ईज़ाद किया जाएगा, शिक्षा का विस्‍तार होगा और इससे उत्‍साहित, श्रम शक्ति नए निवेशों को लुभाएगी और धीरे-धीरे सारे गरीब देश अमीर हो जाएंगे।

ये सोच वाकई काबिले-तारीफ है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्‍या उनकी सोच जितना ही अच्‍छा सारे गरीब देशों का तंत्र चलता है, क्‍या सभी के दिमाग के दरवाजे-खिड़कियां इतनी जल्‍दी खुल जाएंगे कि वह अमीर-गरीब का भेद मिटा दें।

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English summary
Will India get out from Poverty? This is the relevant question when Bill Gates Foundation presented a report of poverty of several nations.
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