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सपनों का रहस्य! क्यों और किस स्लीपिंग पोजीशन में आते हैं सबसे ज्यादा डरावने सपने ?

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नई दिल्ली, 20 जुलाई। जरा कल्पना कीजिए। आप बिस्तर पर जाते हैं। सोने की कोशिश में इधर-उधर करवट बदलते हैं फिर अपने हाथों को सीने पर रखते हैं और एक अच्छी नींद में चले जाते हैं। अचानक एक भयानक सपने के साथ आपकी नींद टूट जाती है।

अगर आपको लगता है कि आपके साथ कुछ हुआ है तो इसका मतलब कुछ यूं ही नहीं है बल्कि आपको इसे समझने की जरूरत है। आप जिस तरह या जिस पोजीशन में सोते हैं उसका आपके सपनों में एक अजीब संबंध हो सकता है। दरअसल सोने के समय सीने पर हाथ रखने और सपनों का एक अलौकिक संबंध हैं। सबसे ज्यादा बुरे सपने ऐसी ही पोजीशन में आते हैं लेकिन ऐसा क्यों होता है। आइए समझते हैं।

सोने के तरीके का सपनों पर होता है असर

सोने के तरीके का सपनों पर होता है असर

तमाम अध्ययन में ये बात सामने आ चुकी है कि हमारे सपने, हमारी नींद और तनाव समेत कई कारकों से प्रभावित होते हैं। कई मामलों में ये देखा गया है कि जो हम कल्पना करते हैं, सोने से पहले जो सोचते हैं उसका काफी हद तक सपनों पर असर हो सकता है।

इसी तरह हमारे सोने के तरीके और सपनों के बीच एक संबंध देखा जा सकता है कि हमें बुरे सपने क्यों आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि सीने पर हाथ रखकर सोने से शरीर पर तनाव पड़ता है। यहां ये बात याद रखने की है कि जब हम सोते हैं तो शरीर में सोता है। इस दौरान शरीर के हृदय, फेफड़े और मस्तिष्क बेहद ही न्यूनतम स्तर पर काम करते हैं। ऐसे में उन्हें हल्का सा भी तनाव परेशान कर सकता है।

सोते समय हाथ को सीने पर रखने से शरीर पर भार पड़ता है ऐसे में मस्तिष्क इसे पढ़ने की कोशिश करता है। इस तरह आपके सपनों पर मस्तिष्क की इस क्रिया का असर पड़ता है।

जो जानना आपके लिए जरूरी है

जो जानना आपके लिए जरूरी है

सपनों को लेकर एक और संभावना जो व्यक्त की जाती है वह यह है कि तनाव बढ़ने से मस्तिष्क के उस हिस्से में, जहां हमारी यादें संग्रहीत होती हैं, ऑक्सीजन की पहुंच बाधित होती है। यह हमारे अवचेतन कामकाज को प्रभावित करता है। एक तरह से यह अलार्म सेट कर देता है जिसके फलस्वरूप दिमाग हमें नकारात्मक इमेजरी या बुरे सपने के माध्यम से सचेत करने की कोशिश करता है।

सपने की सबसे अधिक संभावना तब होती है जब मस्तिष्क सबसे अधिक सक्रिय होता है। इसलिए, आप जिस अवस्था में हैं, या जिस विशेष तरीके से आप सो रहे हैं, वह नाटकीय रूप से आपके सपनों देखे जाने को प्रभावित कर सकता है।

क्या सोने की पोजीशन बदलने से होता है फायदा?

क्या सोने की पोजीशन बदलने से होता है फायदा?

कुछ ऐसे अध्ययन हैं जो बताते हैं कि आपकी सोने की पोजीशन या जगह को बदलने से आपके देखे जाने वाले सपनों पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नींद की अलग-अलग स्थिति आपके शरीर के विभिन्न हिस्सों पर कुछ दबाव पैदा कर सकती है और आपके सपनों में परिवर्तन पैदा कर सकती है।

हालांकि आपके सपनों के लिए थोड़ा बदलना संभव हो सकता है लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए हमेशा उचित नहीं होता है। कुछ आसन, जैसे आपके पेट के बल सोना, नुकसानदेह हो सकता है। इसी तरह के फायदे और नुकसान हर दूसरी नींद की पोजीशन के साथ होते हैं। यहां ये याद रखना जरूरी है कि सपनों का सबसे ज्यादा संबंध आपके सोचने, दिमाग पर तनाव देने से ही है।

इसलिए अच्छा है कि आप उसी पोजीशन में सोएं जो आपको आराम दे और रीढ़ के लिए उचित हो।

अच्छी नींद के लिए उपाय

अच्छी नींद के लिए उपाय

कोई भी नींद की पोजीशन नहीं हो जो आपको सबसे अच्छे सपनों की गारंटी देती है या बुरे सपने को दूर रखती है, ऐसे में कुछ तरीके हैं जिनसे आप वास्तव में अपने शरीर को शांत कर सकते हैं और आराम से नींद ले सकते हैं।

ध्यान भटकाने से बचें, सोने से एक घंटे पहले ज्यादा से ज्यादा 30 मिनट तक ही गैजेट का इस्तेमाल करें।

ऐसी चीजें न देखें जिसे सोचकर मस्तिष्क काफी देर तक सोचता रहे। जैसे डरावनी फिल्में या जासूसी चीजें।

आराम सबसे महत्वपूर्ण चीज है। सोने से पहले अच्छा सा पसंदीदा पेय लें और फिर सोने जाएं।

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English summary
why we get nightmare and how we control this
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