मंगलसूत्र से ज्यादा जरूरी शौचालय, प्रेरणा बन गई सविता

By: प्रेम कुमार
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पहले शौचालय फिर देवालय, हर घर हो शौचालय, चाहिए खुले में शौच से आज़ादी, जिस घर में शौचालय नहीं, उस घर में नहीं जाएगी बहू - एक के बाद एक नारे और सोच ने देशभर में ग्रामीणों के मनमस्तिष्क पर जबरदस्त असर डाला। लोग और खासकर महिलाएं खुद आगे आने लगीं। एक से बढ़कर एक पहल किए और समाज के लिए प्रेरणा बन गयीं।

toilet

शौचालय के लिए सविता ने बेचा मंगलसूत्र

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पड़ता है भटहट, जहां के बूढ़ाडीह गांव में रहती है सविता देवी। आज सविता देवी को हर कोई पहचानता है। वह स्वच्छता अभियान का सिम्बॉल बन चुकी हैं। सविता ने ऐसा क्या किया कि रातों रात उदाहरण बन गयीं। सविता ने शौचालय के लिए अपना मंगलसूत्र तक बेच दिया ! जी हां। मंगलसूत्र, जो सुहाग की निशानी मानी जाती है, जिसकी हिफाजत के लिए महिलाएं अपनी जान तक दे देती हैं। सविता देवी ने साबित कर दिखाया कि जिस तरह मंगलसूत्र अनमोल है, उसी तरह शौचालय भी।

प्रेरणा बन गयी सविता

'पहले शौचायल फिर देवालय' के नारे को सविता ने अपने तरीके से सच कर दिखाया। जिस समाज में पति को देवता माना जाता है और मंगलसूत्र को देवता के साथ सात फेरे लेने का प्रतीक चिन्ह। सात जन्मों का नाता कहलाता है ये मंगल सूत्र। इस मंगल सूत्र को सविता ने इसलिए बेच दिया क्योंकि उसके बदले में मिली रकम से शौचालय का निर्माण कर सके। आप समझ सकते हैं कि सविता ने शौचालय की अहमियत को किस शिद्दत से समाज के सामने स्थापित किया है। सविता का कदम त्याग है, प्रेरणा है और उनकी सोच क्रांतिकारी है जिसे आज हर कोई सैल्यूट कर रहा है।

सविता को मिल रहा भरपूर सम्मान

सविता बिहार के पटना जिले की रहने वाली है। उसकी शादी यूपी के गोरखपूर में दिव्यांग वीरेंद्र मौर्य से हुई। जब वह शादी के बाद गांव आयी, तो उसने पाया कि ससुराल में शौचालय नहीं है। सविता गरीब जरूर है लेकिन उसे पता है स्वच्छता की अहमियत। उसे पता है कि शौचालय के लिए किस तरह देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अभियान चल रहा है। इसलिए उसने फैसला किया कि वह मंगल सूत्र बेचकर यह काम कराएगी। उसने ऐसा ही किया। जब ये बात मीडिया के जरिए सरकार के सामने आयी, तो सरकार ने उसका हौंसला बढ़ाया। सविता का सम्मान किया।

कानपुर की लता देवी ने भी बेचा शौचालय के लिए मंगलसूत्र

सविता ने जब राह दिखलायी तो दूसरी महिलाओं ने भी उनका अनुसरण किया। कानपुर की रहने वाली लता देवी दिवाकर ने भी अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए अपना मंगलसूत्र बेच डाला। लता को मंगलसूत्र ही नहीं दूसरे जेवरात भी बेचने पड़े। लता का कहना है कि घर में शौचालय होना सबसे पहली जरूरत होनी चाहिए। खुले में शौच अपमान की बात है। इस परंपरा को हमें जल्द से जल्द बदलना होगा। गांव के लोगों ने लता की सोच की तारीफ की। खुद लता के गांवों में भी शौचालय बनवाने की होड़ लग गयी।

2 साल में बने 2 करोड़ शौचालय

सविता और लता जैसी महिलाएं पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं जहां 50 करोड़ लोगों के पास आज भी शौचालय नहीं है। केंद्र सरकार की पहल के बाद लोगों में अब तक पिछले दो साल में 2 करोड़ शौचालयों का निर्माण हो चुका है। सरकार ने शोचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि को भी 9 हजार रुपये बढ़ाकर 12 हज़ार रुपये कर दिया है। 2019 तक सभी घरों में शौचालय उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर सरकार चल रही है।

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English summary
Mangalsutra more essential than toilets, Savita became inspiration.
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