पंजाब में रातों-रात बहने लगी 'नई भाखड़ा नहर', भगवंत मान ने कर दिखाया वो जो 75 साल में नहीं हुआ!
Punjab Irrigation Reform: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य के कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव करते हुए मात्र 4 वर्षों में सिंचाई नेटवर्क को पुनर्जीवित कर दिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार ने बरसाती नदियों और नालों से 10,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी खेतों तक पहुंचाया है, जो प्रसिद्ध भाखड़ा नहर की क्षमता के बराबर है।
2022 तक जहां केवल 26.50% खेतों को नहरी पानी मिलता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 78% हो गया है। सरकार की इस दूरदर्शी नीति ने गिरते भूजल स्तर को बचाने और किसानों की लागत घटाने में बड़ी सफलता हासिल की है।

नहरी सिंचाई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: 26% से 78% का सफर
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि मार्च 2022 तक पंजाब में केवल 20.89 लाख एकड़ भूमि को नहरी पानी मिल रहा था। बीते चार वर्षों में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर 6,700 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जिससे अब नहरी सिंचाई का रकबा बढ़कर 58 लाख एकड़ हो गया है। यह उपलब्धि पिछली सरकारों के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक है, जिससे खेती के लिए नहरी पानी का उपयोग 78% तक सुनिश्चित हो सका है।
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लुप्त हो चुकी नहरों और खालों का पुनरुद्धार
राज्य सरकार ने उन नहरों को फिर से जीवित किया है जिन्हें पिछली सरकारों ने नजरअंदाज कर दिया था। 22 किलोमीटर लंबी सरहाली माइनर नहर, जो मिट्टी में दबकर गायब हो चुकी थी, उसे पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। इसके अलावा, पंजाब के इतिहास में पहली बार 101 बंद पड़ी नहरों (लगभग 545 किमी) को बिना किसी नई जमीन का अधिग्रहण किए दोबारा चालू किया गया और 18,349 जल मार्गों (खालों) की सफाई की गई।
फिरोजपुर और सरहिंद फीडर का आधुनिक अपग्रेड
मालवा क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली सरहिंद नहर को करीब 75 साल बाद अपग्रेड किया गया है, जिससे इसकी क्षमता में 2,844 क्यूसेक की वृद्धि हुई है। इसी तरह, फिरोजपुर फीडर की क्षमता को रिकॉर्ड 35 दिनों में 2,682 क्यूसेक बढ़ाया गया। अब इन फीडरों में 24x7 पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए अपनी बारी का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।
आजादी के बाद पहली बार 1,446 गांवों तक पहुंचा पानी
कंडी क्षेत्र जैसे दुर्गम इलाकों में सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए मान सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। कंडी नहर को बहाल कर होशियारपुर और आसपास के 1,446 गाँवों तक आजादी के बाद पहली बार नहरी पानी पहुंचाया गया है। इनमें से कई गांवों ने दशकों से नहरी पानी नहीं देखा था। इस कदम से न केवल कृषि को बढ़ावा मिला है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
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शाहपुर कंडी डैम और जल संरक्षण की बड़ी जीत
पिछले 25 सालों से लटका हुआ शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट अब 3394.49 करोड़ रुपए की लागत से पूरा हो गया है। इस बांध के बनने से पाकिस्तान की ओर जा रहे अतिरिक्त पानी पर रोक लगेगी और रणजीत सागर डैम की क्षमता बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, गुरदासपुर जैसे जिलों में भूजल की निकासी 61.48% से घटकर 31% पर आ गई है, जो पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी राहत है।
पर्यटन और राजस्व मॉडल के रूप में सिंचाई विभाग
भगवंत मान सरकार ने सिंचाई विभाग को केवल सेवा तक सीमित न रखकर इसे राजस्व मॉडल के रूप में विकसित किया है। राज्य में नहरों के किनारे बोटिंग, रेस्ट हाउस और हेडवर्क्स जैसे 26 पर्यटन स्थल विकसित किए गए हैं। साथ ही, बाढ़ की रोकथाम के लिए 206 किलोमीटर नदी तटबंधों को मजबूत किया गया है और 'पंजाब नहर एवं ड्रेनेज एक्ट, 2023' के तहत जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।












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