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Iran America War: शशि थरूर की अध्यक्षता में संसदीय समिति की बैठक, किन-किन मुद्दों पर चर्चा

Iran America War: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच भारत सरकार की विदेश मामलों की संसदीय समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्ध जैसे हालातों के बीच वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भारत के आर्थिक हितों पर पड़ने वाले असर का जायजा लेना था।

बैठक के बाद थरूर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि चर्चा काफी व्यापक रही, जिसमें 17 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रवासियों की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और छात्रों की शिक्षा जैसे गंभीर विषयों पर सरकार से सवाल-जवाब किए गए।

Parliamentary Standing Committee

West Asia Crisis: भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वापसी

बैठक में पश्चिम एशिया, खासकर ईरान और खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। थरूर ने स्पष्ट किया कि ईरान में अभी भी लगभग 9,000 भारतीय मौजूद हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि स्थिति अब 'फंसे होने' जैसी नहीं है। यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों से कमर्शियल उड़ानें सामान्य रूप से चल रही हैं, जिससे लोग अपनी मर्जी से आ-जा सकते हैं। सरकार लगातार वहां के हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों की मदद की जा सके।

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External Affairs Meeting: छात्रों की पढ़ाई और CBSE परीक्षाएं

युद्ध के हालातों का सबसे बुरा असर वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों पर पड़ा है। थरूर ने जानकारी दी कि खाड़ी देशों के करीब 23,000 छात्र अपनी कक्षा 10वीं और 12वीं की CBSE परीक्षाएं नहीं दे पाए हैं। इस गंभीर मुद्दे पर विदेश मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है। सरकार इन छात्रों के लिए 'रेमेडियल अरेंजमेंट' (उपचारात्मक व्यवस्था) करने की योजना बना रही है ताकि उनका शैक्षणिक वर्ष खराब न हो और उन्हें परीक्षा देने का दूसरा मौका मिल सके।

ऊर्जा सुरक्षा और तेल की आपूर्ति

भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है। बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि तनाव के कारण पेट्रोलियम ले जा रहे जहाजों की आवाजाही पर क्या असर पड़ा है। हालांकि अधिकारियों के पास फंसे हुए जहाजों की सटीक संख्या उपलब्ध नहीं थी, लेकिन यह स्वीकार किया गया कि कुछ जहाज प्रभावित हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जरिए ऊर्जा की सप्लाई लाइन को सुरक्षित रखा जाए ताकि देश में ईंधन की कमी न हो।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक कूटनीति

बैठक का एक हिस्सा तकनीक और भविष्य की कूटनीति पर भी केंद्रित था। इसमें 'AI इम्पैक्ट समिट' के परिणामों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के वैश्विक प्रभावों पर चर्चा हुई। थरूर ने बताया कि कैसे भारत तकनीक के क्षेत्र में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) का नेतृत्व कर सकता है। भारत अपनी 'टेक डिप्लोमेसी' के माध्यम से अन्य देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहता है, ताकि भविष्य की डिजिटल चुनौतियों और अवसरों का मिलकर सामना किया जा सके।

प्रवासी भारतीयों का समग्र कल्याण

समिति ने इस बात पर जोर दिया कि विदेश में रहने वाला भारतीय समुदाय भारत की बहुत बड़ी ताकत है। उनकी सुरक्षा से लेकर उनकी आजीविका तक, हर पहलू पर सरकार को सक्रिय रहना होगा। थरूर ने कहा कि यद्यपि विदेश सचिव की अनुपलब्धता के कारण कुछ तकनीकी सवालों के जवाब नहीं मिल सके, लेकिन अधिकांश मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संकट की इस घड़ी में हर भारतीय को यह महसूस हो कि उनका देश उनके साथ खड़ा है।

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