TEDxVivekanandaCollege 2026: द कॉन्स्टेलेशन कोड के साथ विचारों, पहचान और जुड़ाव का अद्भुत संगम
TEDxVivekanandaCollege 2026: विवेकानंद कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में 18 मार्च 2026 को TEDxVivekanandaCollege 2026 का सफल आयोजन किया गया। इस वर्ष का विचारोत्तेजक विषय "द कॉन्स्टेलेशन कोड" था, जिसने विचारों, व्यक्तियों और अनुभवों के बीच मौजूद उन अदृश्य संबंधों की पड़ताल की, जो ठीक उसी प्रकार अर्थपूर्ण बनते हैं जैसे रात्रि आकाश में तारामंडल विभिन्न बिंदुओं को जोड़कर एक रूप प्रदान करते हैं।
महाविद्यालय की प्राचार्या, प्रो. पिंकी मौर्य के कुशल नेतृत्व में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मार्गदर्शन शिक्षिका समन्वयक डॉ. अंचला पालीवाल, डॉ. ईशा गुप्ता, डॉ. रजनी जिंदल एवं डॉ. सुभाष चंद्र ने किया। उनके प्रोत्साहन और दूरदर्शिता ने इस मंच को बौद्धिक संवाद और रचनात्मक आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का आयोजन श्रेया अनुद्युति दास द्वारा किया गया, साथ ही अनन्या धवन ने सह-आयोजक के रूप में योगदान दिया। दोनों ने मिलकर ऐसे वक्ताओं का चयन किया, जिनके विचारों ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
वक्ताओं की सूची में डॉ. पुलकित कुमार ने यह विचार प्रस्तुत किया कि जीवन में सबसे बड़ी हानि धन की नहीं, बल्कि स्वयं से जुड़ाव खो देने की होती है। उन्होंने श्रोताओं को यांत्रिक जीवनशैली से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया। विधि अधिकारी ने पूर्णता के मौन दबाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असाधारण बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना आवश्यक है, विशेषकर ऐसे समाज में जो विश्राम और आत्म-विकास को अक्सर नज़रअंदाज़ करता है।

निलेश हडालगी ने एक जिज्ञासु विद्यार्थी से सृजनकर्ता बनने तक की अपनी यात्रा साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि बदलती दुनिया में अनुकूलन क्षमता ही सबसे महत्वपूर्ण कौशल है।
अंजलि राठी ने पहचान और बहुआयामी व्यक्तित्व के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि व्यक्ति केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होता, बल्कि अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकता है। श्री योगी ने श्रोताओं को अपनी विशिष्टता को अपनाने के लिए प्रेरित किया और आश्वस्त किया कि अलग होना तथा हर चीज़ का तुरंत उत्तर न होना भी स्वाभाविक है।
अतुल शर्मा ने मानव तस्करी और बाल संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए जागरूकता, उत्तरदायित्व और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। आदित्य एन. ने अपने विचारों का समापन आत्मस्वीकृति के महत्व पर करते हुए किया, यह बताते हुए कि वास्तविक विकास अपनी सीमाओं से परे अपनी क्षमताओं को पहचानने में निहित है।
प्रत्येक वक्ता ने अपने-अपने दृष्टिकोण से आपसी संबंधों और खोज की व्यापक अवधारणा को सुदृढ़ किया। उनके विचारों ने व्यक्तिगत अनुभवों, सामाजिक चिंतन और दार्शनिक दृष्टिकोणों को समाहित करते हुए एक प्रेरणादायक एवं आत्मविश्लेषणात्मक वातावरण का निर्माण किया।
वक्ताओं के प्रेरणादायक सत्रों के बाद, पूरा परिसर 'आफ्टर ग्लो फेस्ट' के रंग में रंग गया। जहाँ एक ओर गंभीर चिंतन था, वहीं दूसरी ओर उत्सव का उल्लास छा गया। इस सांस्कृतिक शाम में एक डायनामिक बैंड Sunगीत की धुनों से लेकर वायलिन और तबले की जुगलबंदी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर जहाँ एक ओर जादू के हैरतअंगेज कारनामे दिखे, वहीं दूसरी ओर शास्त्रीय नृत्य की गरिमा और सुरीले गीतों ने समां बांध दिया।
परिसर में सजे विभिन्न स्टॉल्स और लजीज व्यंजनों ने इस उत्सव के उत्साह को दोगुना कर दिया। यह केवल मनोरंजन का समय नहीं था, बल्कि एक ऐसा स्थान था जहाँ छात्र और अतिथि एक-दूसरे से मिले, विचारों को साझा किया और सुकून के कुछ पल बिताए।
TEDxVivekanandaCollege 2026 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जिज्ञासा और रचनात्मकता को सींचने का एक संकल्प था। यहाँ विचारों को केवल सुना नहीं गया, बल्कि उन्हें नए नजरिए से परखा और समझा गया। जैसे ही कार्यक्रम का समापन हुआ, "द कॉन्स्टेलेशन कोड" केवल एक थीम बनकर नहीं रह गया, बल्कि एक अहसास बन गया। इसने हर किसी को यह याद दिलाया कि हम सभी एक बड़े और निरंतर बदलते ब्रह्मांड का हिस्सा हैं-जहाँ हमारी अपनी पहचान की एक चमक है और हमारे बीच के अदृश्य धागे ही इस जीवन को अर्थ देते हैं। इसकी हेडिंग












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