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अंधेरे से आज़ादी के करीब पहुंचा हिन्दुस्तान

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत देश के गांवों में बिजली पहुंचाने का काम चल रहा है। अब तक 5 लाख 97 हज़ार 464 गांवों में से 5 लाख 93 हज़ार 601 गांवों तक बिजली पहुंचा दी गयी है।

आज़ादी के 70 साल तो पूरे हो गये, लेकिन अंधेरे से आज़ादी का हमारा सपना अधूरा है। मगर, अब ये सपना पूरा होने वाला है। हर गांव में बिजली का सपना पूरा होते ही हम अंधेरे से आज़ाद हो जाएंगे। यह बड़ी उपलब्धि होगी। अगले साल जब हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे होंगे, तब देश अंधेरे से आज़ाद हो चुका होगा क्योंकि 1 मई 2018 तक यह लक्ष्य पूरा होने जा रहा है।

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    1000 दिन में हर गांव में बिजली पहुंचाने का यत्न

    आज़ादी के 70 साल बाद भी देश का कोई हिस्सा बिजली से दूर है, अंधेरे में रह रहा है- यह बात 21वीं सदी में चौंकाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस तथ्य ने झकझोर दिया था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की बैठक करके समस्या के निदान पर विचार किया और फिर 1000 दिन के भीतर देश के हर गांव में बिजली पहुंचाने का फैसला किया। इस फैसले का असर होने लगा है। ज्यादातर गांवों में बिजली पहुंच चुकी है और 1 मई 2018 तक बाकी बचे गांवों तक भी बिजली पहुंच जाएगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।

    99.3 फीसदी गांवों में पहुंच चुकी है बिजली

    दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत देश के गांवों में बिजली पहुंचाने का काम चल रहा है। अब तक 5 लाख 97 हज़ार 464 गांवों में से 5 लाख 93 हज़ार 601 गांवों तक बिजली पहुंचा दी गयी है। मतलब ये कि 99.3 फीसदी गांवों तक बिजली पहुंच चुकी है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश को लें, जो देश का सबसे बड़ा राज्य है। यहां 97,813 गांव हैं। महज 6 गांव ही बचे हैं जहां बिजली पहुंचाया जाना बाकी है। यहां भी बिजली पहुंचाने का काम आखिरी चरण में है।

    दुगुनी हुई बिजली की उत्पादन क्षमता

    बीते तीन साल में बिजली की मांग की तुलना में उत्पादन क्षमता दुगुनी हुई है। बिजली उत्पादन और मांग का अंतर लगभग खत्म हो चुका है। एक समय वह भी था जब देश के अंधेरे में डूब जाने की स्थिति भी पैदा हो गयी थी और एक समय आज भी है जब देश बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हो चुका है।

    बिजली बचत कोलेकर जागरूकता भी बढ़ी

    बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की स्थिति के लिए उत्पादन तो महत्वपूर्ण वजह है ही, बिजली की बचत को लेकर जागरुकता भी बड़ी वजह है। बिजली की बचत और कम ऊर्जा खपत वाले LED बल्ब लगाने की योजना पर भी तेज गति से काम हुआ है। 24 करोड़ से अधिक LED बल्ब लगाए जाने का नतीजा ये हुआ है कि 3,128 करोड़ किलोवाट ऊर्जा की बचत हुई। रुपयों में यह 12.5 हज़ार करोड़ से अधिक की रकम बैठती है। इतना ही नहीं इस कदम से पर्यावरण के प्रति हमारा अंतरराष्ट्रीय दायित्व भी पूरा हुआ है। कार्बन डाइ ऑक्साइड के उत्सर्जन में अनुमानत: ढाई करोड़ टन की कमी आयी है।

    बिजली वितरण की बाधाएं दूर

    अधिक बिजली पैदा करने वाले राज्यों से कम बिजली पैदा करने वाले राज्यों तक बिजली आपूर्ति में जो बाधाएं थीं, उन्हें दूर करने का बेहतर नतीजा सामने आया। बिजली की लागत में कमी लाने के उपाय भी सफल रहे। कुल मिलाकर बिजली की समस्या से निपटने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने का ही ये नतीजा है कि आजाद हिन्दुस्तान में वो घड़ी सामने दिख रही है जब पूरा देश अंधेरे से आज़ाद होगा।

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