Delhi Chunav 2025: दिल्ली में BJP का खेल कैसे बिगाड़ सकती है कांग्रेस? पढ़िए क्या है ऐसी 3 वजह
Delhi Chunav 2025: दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार के विधानसभा चुनावों में पिछले एक दशक की एंटी-इंकंबेंसी का सामना कर रही है। भाजपा 1998 से यहां की सत्ता से बाहर है और वह 'आप'के विजय रथ को हर हाल में रोकने की कोशिशों में जुटी है। लेकिन, जिस तरह से कांग्रेस इस बार चुनावी जाल बिछा रही है, उससे लगता है कि कहीं बीजेपी को ही नुकसान न हो जाए!
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के कट्टर विरोधी हैं। दोनों इंडिया ब्लॉक में शामिल हैं और भाजपा-विरोधी हर मंच पर दोनों के नेता एकजुटता का प्रदर्शन करते दिखते हैं। लगभग सभी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर इनका सुर एक ही होता है। लेकिन, दिल्ली में दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि, तथ्य ये है कि करीब 6 महीने पहले दोनों के बीच दिल्ली में ही लोकसभा चुनावों में तालमेल भी हो चुका था।

Delhi Chunav 2025: 1) कांग्रेस ने पुराने दिग्गजों पर लगाया पूरजोर दांव
कांग्रेस ने दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए 70 सीटों में से अपनी 21 उम्मीदवारों की पहली ही लिस्ट में ही पूर्व सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को नई दिल्ली से उतार दिया। जबकि, यहां से खुद आप संयोजक और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल लगातार चौथी बार चुनाव मैदान में हैं।
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इसी लिस्ट में पूर्व मंत्री हारून यूसुफ को बल्लीमारान से और चौधरी अनिल कुमार को पटपड़गंज से उतारा है।
इसी तरह से 26 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट में भी कम से कम पांच पूर्व विधायकों और तीन पूर्व पार्षदों को उतारा गया है। इनमें पूर्व एमएलए मुकेश शर्मा और राजेश लिलोथिया भी शामिल हैं, जो दिल्ली कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसी तरह से पूर्व मेयर फरहाद सुरी को जंगपुरा से मनीष सिसोदिया के खिलाफ उतार दिया है।
जाहिर है कि दिल्ली की राजनीति के ये तमाम दिग्गज चेहरे जितने भी सत्ता-विरोधी वोट हासिल करेंगे, उससे आखिरकार भाजपा की उम्मीदों पर ही पानी फिरने की आशंका रहेगी।
Delhi Chunav 2025: 2) 'आप' से आए नेताओं पर भरोसा
दूसरी लिस्ट में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के तीन पूर्व विधायकों पर भी भरोसा जताया है। मसलन, विजवासन से देवेंदर सहरावत, मटिया महल से असीम अहमद खान और बाबरपुर से मोहम्मद इशराक खान को टिकट दिया है। ये सभी 2015 में आप के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं।
इशराक ने सीलमपुर से जीत दर्ज की थी। इन सभी नेताओं का अपनी सीटों पर अपना एक जनाधार भी रहा है। इनकी वजह से अगर आम आदमी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के वोट कटने की संभावना है तो जो सत्ता-विरोधी वोट भाजपा में ट्रांसफर होने के जो चांस बन रहे थे, उसमें भी कांग्रेस ने सेंध लगाने की चाल चल दी है।
पार्टी ने पूर्व आप विधायक अब्दुल रहमान को सीलमपुर से पहले ही टिकट दे दिया है। माना जा रहा है कि आप के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम का नाम भी अगली लिस्ट में सीमापुरी से हो सकता है। हालांकि, फिलहाल उनके नहीं तैयार होने की जानकारी मिल रही है।
इसी तरह पार्टी सूत्रों के अनुसार कालकाजी में मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना के खिलाफ कांग्रेस चाहती है कि चांदनी चौक की पूर्व विधायक और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा को उतारे। जानकारी के मुताबिक फिलहाल अलका ही इसके लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन, अगर वह आतिशी के खिलाफ मैदान में उतरीं तो सत्ता-विरोधी वोट में वह भी दावेदार बन सकती हैं, जिसका नुकसान बीजेपी को ही भुगतना पड़ सकता है।
Delhi Chunav 2025: 3) सरकार-विरोधी फ्लोटिंग वोटर में दुविधा से बीजेपी को हो सकता है नुकसान
कांग्रेस की पहली लिस्ट में और कई मजबूत उम्मीदवार नजर आ चुके हैं। इनमें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव का नाम भी शामिल है जो बादली से मैदान में हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी ने बहुत ही सोच-समझकर उम्मीदवारों को चुना है, जो जोरदार टक्कर दे सके और पार्टी को सीट दिला सके।
कांग्रेस 1998 से 2013 तक लगातार तीन कार्यकालों तक दिल्ली की सत्ता में रही। उसके बाद उसका ग्राफ लगातार गिरता चला गया। 2008 में पार्टी को 43% वोट मिले थे, जो 2013 के चुनाव में गिरकर 24.6% रह गए और पार्टी मुश्किल से 8 सीटें जीत सकी।
लेकिन, 2015 के बाद से तो एक तरह से आप ने कांग्रेस को दिल्ली में घुटनों पर लाना शुरू कर दिया। इस चुनाव में कांग्रेस मात्र 9.7% वोट जुटा सकी और 2020 में वह इससे भी लुढ़कर 4.3% तक पहुंच गई। दोनों ही चुनावों में पार्टी का खाता नहीं खुला।
तथ्य यह है कि दिल्ली में आज भी कांग्रेस का संगठन काफी कमजोर है। ऊपर से वोटरों के मन में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के रिश्तों को लेकर एक संदेह की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि, दिल्ली में ही बीजेपी के खिलाफ बड़े मुद्दों पर इसके बड़े नेता आदमी पार्टी के साथ कदम-ताल करते नजर आते हैं।
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ऐसे में उसके मजबूती से लड़ने का मतलब ये होगा,कि जो दुविधा वाले वोटर हैं, जिसे फ्लोटिंग वोटर कहा जाता है,वह अगर सरकार के कार्यों से नाराज होकर वोट डालना चाहते हैं, तो उनका वोट बीजेपी और कांग्रेस में बंट सकता है, जिससे बीजेपी को ही ज्यादा नुकसान होने की आशंका है।
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