कौन हैं रितु जायसवाल? किस जाति से? मुसलमानों के लिए ठुकराया था BJP टिकट, अब उसी पार्टी होंगी शामिल
Ritu Jaiswal Join BJP: बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है और वह हैं रितु जायसवाल। कभी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की तेज-तर्रार महिला चेहरा रहीं रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रही हैं। यही वजह है कि बिहार के राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक उनकी चर्चा तेज हो गई है।
दिलचस्प बात यह है कि वही रितु जायसवाल, जिन्होंने कभी मुसलमान समर्थकों की भावनाओं का हवाला देकर बीजेपी का टिकट ठुकरा दिया था, अब उसी पार्टी का दामन थामने जा रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर रितु जायसवाल कौन हैं, उनकी जाति क्या है और उनका राजनीतिक सफर इतना चर्चित क्यों रहा है।

▶️कौन हैं रितु जायसवाल? (Who Is Ritu Jaiswal)
रितु जायसवाल बिहार की चर्चित महिला नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व मुखिया रह चुकी हैं। उनका जन्म 1 मार्च 1977 को बिहार के हाजीपुर में हुआ था। उन्होंने वैशाली महिला कॉलेज से आर्ट्स में पढ़ाई की।
राजनीति में आने से पहले रितु जायसवाल सामाजिक कार्यों की वजह से चर्चा में आई थीं। उन्होंने सीतामढ़ी जिले के सिंहवाहिनी ग्राम पंचायत की मुखिया रहते हुए गांव में सड़क, शिक्षा, सफाई, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण को लेकर कई काम किए। यही वजह रही कि उन्हें "मुखिया दीदी" के नाम से पहचान मिलने लगी।
गांव स्तर पर किए गए उनके कामों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया और धीरे-धीरे वह बिहार की राजनीति में बड़ा चेहरा बन गईं।
▶️क्या है रितु जायसवाल की जाति? (Ritu Jaiswal Caste)
रितु जायसवाल कलवार यानी कलार समुदाय से आती हैं। बिहार में जायसवाल सरनेम मुख्य रूप से कलवार जाति से जुड़ा माना जाता है, जिसे अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी में रखा गया है।
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण काफी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में ओबीसी वर्ग से आने वाली रितु जायसवाल का राजनीतिक प्रभाव कई इलाकों में मजबूत माना जाता है।

▶️रितु जायसवाल आरजेडी में कैसे बनीं बड़ा चेहरा? (Ritu Jaiswal Rise In RJD Politics)
रितु जायसवाल ने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे। वह पहले जनता दल यूनाइटेड यानी जेडीयू में भी रह चुकी हैं, लेकिन बाद में आरजेडी में शामिल हुईं।
आरजेडी में उन्हें तेजी से जिम्मेदारियां मिलीं। लालू यादव और तेजस्वी यादव ने उन्हें पार्टी के महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष बनाया। इसके अलावा वह 2021 से 2023 तक पार्टी की आधिकारिक प्रवक्ता भी रहीं। उनकी आक्रामक शैली और मजबूत ग्राउंड कनेक्ट की वजह से वह आरजेडी की प्रमुख महिला नेताओं में गिनी जाने लगीं।
▶️दो चुनाव लड़ीं, दोनों में मामूली अंतर से हार (Ritu Jaiswal Election Journey)
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने उन्हें सीतामढ़ी जिले की परिहार सीट से टिकट दिया था। इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार गायत्री देवी ने उन्हें बेहद कम अंतर से हराया। हार का अंतर करीब 1569 वोट रहा।
इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने उन्हें शिवहर सीट से उम्मीदवार बनाया। यहां भी उन्हें अच्छी लड़ाई के बावजूद हार का सामना करना पड़ा। जेडीयू की लवली आनंद ने उन्हें करीब 29 हजार वोटों से हराया। हालांकि लगातार हार के बावजूद रितु जायसवाल की लोकप्रियता कम नहीं हुई और वह बिहार की सक्रिय महिला नेताओं में बनी रहीं।
▶️टिकट नहीं मिला तो आरजेडी से बगावत (Ritu Jaiswal RJD Rebellion Story)
रितु जायसवाल और आरजेडी के रिश्तों में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें दोबारा परिहार सीट से टिकट नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने पार्टी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया और निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
बताया जाता है कि उनके चुनाव लड़ने से आरजेडी उम्मीदवार को बड़ा नुकसान हुआ। इसके बाद पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। आरजेडी से बाहर होने के बाद उन्होंने युवाओं और महिलाओं पर फोकस करते हुए नई पार्टी बनाने की भी बात कही थी।

▶️ मुसलमानों के लिए ठुकराया था रितु जायसवाल ने BJP टिकट?
रितु जायसवाल इन दिनों एक वायरल ऑडियो की वजह से भी चर्चा में हैं। इस ऑडियो में वह दावा करती सुनाई दे रही हैं कि विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने उन्हें टिकट ऑफर किया था।
रितु के मुताबिक, उन्होंने उस समय बीजेपी का टिकट इसलिए स्वीकार नहीं किया क्योंकि उनके समर्थन में कई मुस्लिम परिवार और समर्थक गांव पहुंचे हुए थे। वह नहीं चाहती थीं कि अचानक बीजेपी में जाने से उनके समर्थकों का भरोसा टूटे। उन्होंने बातचीत में यह भी कहा कि अगर वह सिर्फ सत्ता चाहतीं, तो उसी वक्त बीजेपी जॉइन कर विधायक बन सकती थीं।
▶️अब आखिर बीजेपी में क्यों जा रहीं?
रितु जायसवाल का कहना है कि आरजेडी ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर किया है। ऐसे में अगर वह लंबे समय तक इंतजार करतीं, तो उनका पूरा राजनीतिक करियर प्रभावित हो सकता था।
उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक, वह जल्द ही पटना स्थित बीजेपी कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ले सकती हैं। हालांकि तारीख को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
बिहार में अगले विधानसभा चुनाव से पहले रितु जायसवाल का बीजेपी में जाना राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है। खासकर महिला और ओबीसी वोट बैंक के लिहाज से बीजेपी इसे एक बड़े चेहरे के रूप में देख रही है।
▶️बिहार राजनीति में क्यों खास हैं रितु?
रितु जायसवाल की सबसे बड़ी ताकत उनका ग्राउंड कनेक्शन माना जाता है। वह सिर्फ भाषण देने वाली नेता नहीं, बल्कि पंचायत स्तर पर काम करके राजनीति में पहचान बनाने वाली महिला नेता हैं।
महिला सशक्तिकरण, गांव विकास, शिक्षा और स्थानीय मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें बिहार में अलग पहचान दी है। यही वजह है कि पार्टी बदलने के बावजूद उनकी राजनीतिक अहमियत बनी हुई है।













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