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मंत्रों को कैसे पहचानें, कौन से मंत्र का किसमें होता है प्रयोग?

By Gajendra Sharma
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नई दिल्ली, 18 अगस्त। लोग मंत्रों का जाप तो करते हैं, लेकिन कौन सा मंत्र किस प्रयोजन के लिए होता है उसकी पहचान किसी को नहीं होती। मंत्रों की प्रकृति और स्वभाव जाने बिना उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।

कौन सा मंत्र किस काम के लिए होता है प्रयोग?

आइए जानते हैं मंत्रों का प्रकार-

  • पल्लव मंत्र : जिस मंत्र के आदि में नाम की योजना हो, उसे पल्लव मंत्र कहते हैं। मारण, संहार, भूत निवारण, उच्चाटन, विद्वेषण आदि कार्यो में पल्लव मंत्र का प्रयोग होता है।
  • योजन मंत्र : जिस मंत्र के अंत में नाम की योजना हो, उसे योजन मंत्र कहते हैं। शांति, पुष्टि, वशीकरण, मोहन, दीपन आदि कार्यो में इस प्रकार के मंत्र का प्रयोग किया जाता है।

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  • रोध मंत्र : नाम के प्रथम, मध्य या अंत में मंत्र प्रयोग किया जाए तो उसे रोध मंत्र कहा जाता है। ज्वर, ग्रह, विष आदि की शांति के लिए इसी प्रकार के मंत्र का प्रयोग किया जाता है।
  • पर मंत्र : नाम के एक-एक अक्षर के पीछे मंत्र होने से उसको परनाम मंत्र कहते हैं। शांति कर्म में इसका प्रयोग होता है।
  • सम्पुट मंत्र : नाम के प्रथम अनुलोम और अंत में मंत्र होने पर उसे सम्पुट मंत्र कहते हैं। इस प्रकार के मंत्र का प्रयोग कीलन कार्य में होता है।
  • विदर्भ मंत्र : मंत्र के दो-दो अक्षर और साध्य नाम के दो-दो अक्षर क्रमानुसार उच्चारण करने पर विदर्भ मंत्र कहलाता है। वशीकरण, आकर्षकण आदि में इसका प्रयोग होता है।
  • हुं फट् प्रयोग : बंधन, उच्चाटन, विद्वेषण कार्यो में हुं शब्द का प्रयोग होता है। छेदन में फट्, अरिष्ट ग्रह शांति में हुं फट्, पुष्टि-शांति कार्यो में वौषट्, होम कार्यो में स्वाहा तथा अर्चन-पूजन आदि में नम: शब्द का प्रयोग किया जाता है।
  • स्त्री-पुरुष, नपुंसक मंत्र : जिन मंत्रों के अंत में स्वाहा शब्द का प्रयोग होता है वे स्त्री संज्ञक कहलाते हैं। जिनके अंत में नम: शब्द होता है वे नपुंसक तथा जिनके अंत में हुं फट् रहता है उन्हें पुरुष संज्ञक मंत्र कहते हैं। वशीकरण, शांति, अभिचार आदि कार्यो में पुरुष मंत्र, क्षुद्र कार्यो में स्त्री मंत्र तथा अन्य कार्यो में नपुंसक मंत्रों का प्रयोग होता है।

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English summary
Which mantra is used for what purpose, here is full details. Recognize and know the benefits of mantras.
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